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पोते पल्लव की फिल्म में पुजारी बने थे नीरज जी

Mon, 23 Jul 2018 02:14 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Mon, 23 Jul 2018 02:14 AM IST
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Neeraj ji became a priest in the grandson's Pallava film
कवि गोपालदास नीरज के पौत्र पल्लव । - फोटो : Amar Ujala
नीरज जी के पोते पल्लव ने बताया कि वर्ष 2001 से 2004 तक वह अपने दादा नीरज जी के साथ रहे। इस दौरान उन्होंने निर्माता निर्देशक लवनीत थडानी के साथ ‘जीत’ नाम की एक फिल्म बनाई। इसमें पल्लव सह निर्देशक थे। नीरज ने फिल्म में एक्टिंग करने की इच्छा जाहिर की तो उनको पुजारी का रोल दिया गया। इस रोल को उन्होंने बखूबी निभाया क्योंकि उस वक्त वह स्वस्थ थे। दादा-पोते चाहते थे कि मायानगरी में फि र से ‘सरगम’ छेड़ी जाए लेकिन इस बीच नीरज जी की तबियत बिगड़ गई और यह योजना ‘फ्लाप’ हो गई। साल 2001 में इस फिल्म की शूटिंग गुड़गांव में हुई थी।
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पल्लव बताते हैं कि वर्ष 2001 में इंदौर स्थित देवी अहिल्या बाई यूनिवर्सिटी से उन्होंने एमबीए किया था। इसके बाद वर्ष 2004 में वह मुंबई में उगम सोल्यूशंस के साथ काम करने लगे। उन्हें बतौर कंसलटेंट रखा गया था। वर्ष 2007 तक अंधेरी मुंबई में आशियाना रहा। बाद में इसी कंपनी के साथ अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को चले गए और वहीं रहने लगे। वर्ष 2004 और 2005 में अमेरिका में हुए कवि सम्मेलन में दादा पोते फिर साथ थे।
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इससे पहले देश में होने वाले दर्जनों कवि सम्मेलनों में वे एक साथ गए। पल्लव कहते हैं वह दादा को छोड़ कर बाहर नहीं जाना चाहते थे। लेकिन फिर नीरज जी ने ही उनको समझाया कि पुरुषार्थ करो तभी कामयाबी मिलेगी। इसलिए वह बतौर कंसलटेंट स्थापित हो गए। दादा के आखिरी वक्त को याद कर भावुक हुए पल्लव ने बताया कि मुंबई में रहने के दौरान हर दो महीने में वह अलीगढ़ आ जाते थे और यहां उनके साथ एक दो दिन गुजार कर जाते थे। दादा अपने दिल की बातें उनसे कर लेते थे। अमेरिका जाने के बाद वह छह महीने में यहां आते और दादा से मन की बात कहते सुनते। इस दौरान फोन पर भी बात होती थी। जुलाई में अभी जब नीरज जी की तबियत बिगड़ी तो दो दिन पहले पल्लव की उनसे बात हुई। जिसमें नीरज जी ने कहा था कि अब जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। शरीर बहुत कष्ट दे रहा है। जब उनकी आवाज साफ नहीं सुनाई दी तो पल्लव ने सिंगसिंग के जरिये बात की। बस यही आखिरी बात थी इसके बाद दादा और पोते में कोई बात नहीं हो पाई। 
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21 अप्रैल को पोते पोती से मिलने गए थे गुड़गांव 
नीरज जी के पोते पल्लव की पत्नी का नाम अंकुर रिमझिम हैं। इनका बड़ा बेटा निवान नीरज सात वर्ष का है और छोटा बेटा अनूख नीरज ढाई वर्ष का है। अंकुर के पिता कमलेश्वरी प्रसाद का गुजरी 12 अप्रैल को निधन हो गया था। पल्लव पत्नी और बच्चों के साथ ससुर के निधन पर अप्रैल में अमेरिका से गुड़गांव स्थित ससुराल पहुंचे थे। पल्लव अपनी सगी बहन (नीरज जी की पोती) आकांक्षा नीरज के गुड़गांव सोना रोड स्थित आर्किड पैटल्स अपार्टमेंट में ठहरे थे। यहीं पर 21 अप्रैल को नीरज जी पहुंचे और पौत्र-पौत्री के पूरे परिवार को आशीर्वाद दिया। ये पौत्र और पौत्री से आखिरी मुलाकात थी। उस वक्त आकांक्षा गर्भवती थीं, जिसने दस दिन पहले ही बेटी को जन्म दिया है। आकांक्षा का बड़ा बेटा अनयरा गौड़ 6 वर्ष का है, नवजात बेटी का नाम रयना रखा गया है। गुड़गांव से विदाई लेते वक्त नीरज जी ये भी कहा था अब शायद मिलना नहीं हो पाएगा..। 
 
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