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नौशे-चंदा हत्याकांड : भाई की बेटी की शादी में भात लेकर गया था नौशे
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दोहरे हत्याकांड की घटना के अगले दिन 25 जुलाई को नौशे के पुत्र राजा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें कहा गया था कि उसके ताऊ की बेटी की शादी में भात लेकर उसके पिता नौशे अपने दोस्त चंदा के साथ गए थे। वे जाते समय अपने साथ घर की चाभी ले गए थे। रात करीब 11:30 बजे नौशे का भाई रफीक उससे चाभी लेने गया, तो वहां पता चला कि दोनों को अहसान व आसिफ अपने साथ बाहर कहीं ले गए हैं। इसी बीच राजा भी वहां पहुंच गया।
मुकदमे के अनुसार, राजा अपने चाचा संग नौशे-चंदा को खोजते हुए मौके पर पहुंचा तो देखा कि हमलावर शादी वाले घर के पास ही घेरकर दोनों पर तमंचे व पिस्टलों से गोली बरसा रहे थे, जब गोली लगने से दोनों गिर गए तो ईंटों से सिर कुचलकर उनकी हत्या की गई। चूंकि शादी समारोह की वजह से वहां रोशनी हो रही थी। सभी हमलावरों को पहचानते हुए पूरा वाकया देखा। शोर मचाया तो हमलावर पीछे भागे। नौशे की सिविल लाइंस हमदर्द नगर निवासी ग्यासुद्दीन सेक्रेटरी एडवोकेट एक जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में हमलावरों को सुपारी देकर यह हत्या कराई है। हमलावर इस बात को चीख-चीख कर कह रहे थे कि तुम दोनों ग्यासुद्दीन से रंजिश रखते हो, उसी का परिणाम भुगतो। इस सूचना पर जब स्थानीय नागरिक व पुलिस वहां पहुंची तो दोनों के शव शादी वाले घर के बाहर नाली के सहारे गली में पड़े थे।
ये है न्यायालय की टिप्पणी
‘‘प्रस्तुत मामले में सिर्फ उम्रकैद से दंडित किए जाने से न तो न्याय की मंशा की पूर्ति होती है और न समुचित प्रतीत होता है। सुप्रीम कोर्ट की नजीर के दृष्टिगत अभियुक्तगण को मृत्युदंड दिए जाने पर ही तथ्यों व परिस्थितियों में पूर्ण न्याय होता है। इनके अपराध में मृत्युदंड अथवा गर्दन से फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि अभियुक्तगण की मृत्यु न हो जाए।’’
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इस तरह सुनाई गई सभी को सजा
- पांच आरोपियों को धारा 302, साथ में 149, 120 बी में मृत्युदंड अथवा गर्दन से फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि अभियुक्तगण की मृत्यु न हो जाए और 1-1 हजार रुपये जुर्माना। साथ में धारा 147 में 1-1 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये जुर्माना, धारा 148 में 3-3 वर्ष की सजा और 1-1 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
- कफील, वकील व भूरा को 25 आर्म्स एक्ट में 3-3 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया है।
- ग्यासुद्दीन को धारा 302 व 120 बी में उम्रकैद व 1 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
- सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मृत्यु दंडादेश हाईकोर्ट के समक्ष पेश किए जाएंगे और मृत्युदंडादेश जब तक निष्पादित नहीं किए जाएंगे, जब तक हाईकोर्ट द्वारा मृत्युदंडादेश पुष्ट न कर दिए जाएं।
- इस मुकदमे में कुल 26 गवाह थे, जिनमें से दस गवाह पेश किए गए। दो गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए, मगर न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर इस अपराध को दुर्लभतम से दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए इसे मृत्युदंड के योग्य माना और पांच आरोपियों को मृत्युदंड व एक को उम्रकैद से दंडित किया है।
- कृष्ण मुरारी जौहरी, एडीजीसी
- अभियुक्तों द्वारा योजना बनाकर क्रूरतापूर्वक जघन्य दोहरा हत्याकांड किया गया था, जिसमें अभियोजन द्वारा मजबूती के साथ राज्य की ओर से पैरवी की गई, जिसके फलस्वरूप पांचों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई है। न्यायालय का निर्णय चश्मदीद साक्ष्यों के बयान व घटना से संबंधित समस्त तथ्यों के साबित हो जाने पर पारित किया गया है, जो पूर्ण रूप से उचित है।
- धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी
- अपराधियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस व अभियोजन ने कमर कस ली है। विशेष अभियान जारी है। अपराधियों पर शासन एवं पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार कठोरतम कार्रवाई के निर्देश हैं। जनपद में भी इस वर्ष काफी सजाएं हुई हैं और जनपद पूरे प्रदेश में टॉप थ्री में शुमार है। सभी को कार्यवाही निरंतर जारी रखने के निर्देश हैं। इसी क्रम में आज इस महत्वपूर्ण मुकदमे में सजा हुई है। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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मुकदमे के अनुसार, राजा अपने चाचा संग नौशे-चंदा को खोजते हुए मौके पर पहुंचा तो देखा कि हमलावर शादी वाले घर के पास ही घेरकर दोनों पर तमंचे व पिस्टलों से गोली बरसा रहे थे, जब गोली लगने से दोनों गिर गए तो ईंटों से सिर कुचलकर उनकी हत्या की गई। चूंकि शादी समारोह की वजह से वहां रोशनी हो रही थी। सभी हमलावरों को पहचानते हुए पूरा वाकया देखा। शोर मचाया तो हमलावर पीछे भागे। नौशे की सिविल लाइंस हमदर्द नगर निवासी ग्यासुद्दीन सेक्रेटरी एडवोकेट एक जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में हमलावरों को सुपारी देकर यह हत्या कराई है। हमलावर इस बात को चीख-चीख कर कह रहे थे कि तुम दोनों ग्यासुद्दीन से रंजिश रखते हो, उसी का परिणाम भुगतो। इस सूचना पर जब स्थानीय नागरिक व पुलिस वहां पहुंची तो दोनों के शव शादी वाले घर के बाहर नाली के सहारे गली में पड़े थे।
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ये है न्यायालय की टिप्पणी
‘‘प्रस्तुत मामले में सिर्फ उम्रकैद से दंडित किए जाने से न तो न्याय की मंशा की पूर्ति होती है और न समुचित प्रतीत होता है। सुप्रीम कोर्ट की नजीर के दृष्टिगत अभियुक्तगण को मृत्युदंड दिए जाने पर ही तथ्यों व परिस्थितियों में पूर्ण न्याय होता है। इनके अपराध में मृत्युदंड अथवा गर्दन से फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि अभियुक्तगण की मृत्यु न हो जाए।’’
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इस तरह सुनाई गई सभी को सजा
- पांच आरोपियों को धारा 302, साथ में 149, 120 बी में मृत्युदंड अथवा गर्दन से फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि अभियुक्तगण की मृत्यु न हो जाए और 1-1 हजार रुपये जुर्माना। साथ में धारा 147 में 1-1 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये जुर्माना, धारा 148 में 3-3 वर्ष की सजा और 1-1 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
- कफील, वकील व भूरा को 25 आर्म्स एक्ट में 3-3 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया है।
- ग्यासुद्दीन को धारा 302 व 120 बी में उम्रकैद व 1 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
- सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मृत्यु दंडादेश हाईकोर्ट के समक्ष पेश किए जाएंगे और मृत्युदंडादेश जब तक निष्पादित नहीं किए जाएंगे, जब तक हाईकोर्ट द्वारा मृत्युदंडादेश पुष्ट न कर दिए जाएं।
- इस मुकदमे में कुल 26 गवाह थे, जिनमें से दस गवाह पेश किए गए। दो गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए, मगर न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर इस अपराध को दुर्लभतम से दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए इसे मृत्युदंड के योग्य माना और पांच आरोपियों को मृत्युदंड व एक को उम्रकैद से दंडित किया है।
- कृष्ण मुरारी जौहरी, एडीजीसी
- अभियुक्तों द्वारा योजना बनाकर क्रूरतापूर्वक जघन्य दोहरा हत्याकांड किया गया था, जिसमें अभियोजन द्वारा मजबूती के साथ राज्य की ओर से पैरवी की गई, जिसके फलस्वरूप पांचों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई है। न्यायालय का निर्णय चश्मदीद साक्ष्यों के बयान व घटना से संबंधित समस्त तथ्यों के साबित हो जाने पर पारित किया गया है, जो पूर्ण रूप से उचित है।
- धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी
- अपराधियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस व अभियोजन ने कमर कस ली है। विशेष अभियान जारी है। अपराधियों पर शासन एवं पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार कठोरतम कार्रवाई के निर्देश हैं। जनपद में भी इस वर्ष काफी सजाएं हुई हैं और जनपद पूरे प्रदेश में टॉप थ्री में शुमार है। सभी को कार्यवाही निरंतर जारी रखने के निर्देश हैं। इसी क्रम में आज इस महत्वपूर्ण मुकदमे में सजा हुई है। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी