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शरारती तत्वों की उपज है चोटी कटवा: आईजी
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:38 AM IST
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शरारती तत्वों की उपज है चोटी कटवा: आईजी
- फोटो : Rupesh
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चोटी काटने की घटनाओं को लेकर लोगों में डर के हालात हैं। इस बारे में अमर उजाला ने अलीगढ़ रेंज के आईजी डॉ. संजीव गुप्ता से बातचीत की। प्रस्तुत है उसका सारांश।
अमर उजाला चोटी काटने की घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं, इनको पुलिस क्या मानकर चल रही है?
आईजी ः किसी ने शरारतन इसे शुरू किया होगा। अब बाद में कुछ शरारती तत्व इसका फायदा उठा रहे हैं। कुछ मामलों में पाया गया है कि खुद ने या परिवार ने चोटी काट ली और प्रसारित किया।
अमर उजाला ः इन पर रोक लगाने या स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या हो रहा है?
आईजी ः गोपनीय रूप से सभी मामलों की जांच करायी जा रही है। स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस को सतर्क कर दिया गया है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें। किसी भी प्रकार के अंधविश्वास आदि के चक्कर में नहीं पड़ें।
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अमर उजाला ः जिन लोगों के साथ घटनाएं घटित हुई हैं, उनके साथ कोई संपर्क कर फीड बैक लिया गया है?
आईजी ः वही लोग पुलिस के पास नहीं आए हैं। कोई रिपोर्ट तक दर्ज कराने नहीं आया है। हमारी यह भी योजना है कि अगर ऐसे मामले के प्रभावित व्यक्ति के परिवार वाले चाहेंगे तो हम साइक्लोजिकल प्रोफाइलिंग भी करवा सकते हैं। इस प्रकार के मामले पहले भी हुए हैं जैसे गणेश की मूर्ति का दूध पीना, मुंह नोचवा, काला बंदर। इसको मनोविज्ञान की भाषा में मास हिस्टीरिया कहा जाता है।
टोटके वालों पर खुफिया नजर
पुलिस ने चोटी काटने की चर्चाओं के बीच ही गली मोहल्लों में जादू टोना करने वालों, टोटका करने वालों, अफवाह फैलने वालों आदि पर खुफिया नजर रखनी शुरू कर दी है।
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अमर उजाला चोटी काटने की घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं, इनको पुलिस क्या मानकर चल रही है?
आईजी ः किसी ने शरारतन इसे शुरू किया होगा। अब बाद में कुछ शरारती तत्व इसका फायदा उठा रहे हैं। कुछ मामलों में पाया गया है कि खुद ने या परिवार ने चोटी काट ली और प्रसारित किया।
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अमर उजाला ः इन पर रोक लगाने या स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या हो रहा है?
आईजी ः गोपनीय रूप से सभी मामलों की जांच करायी जा रही है। स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस को सतर्क कर दिया गया है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें। किसी भी प्रकार के अंधविश्वास आदि के चक्कर में नहीं पड़ें।
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अमर उजाला ः जिन लोगों के साथ घटनाएं घटित हुई हैं, उनके साथ कोई संपर्क कर फीड बैक लिया गया है?
आईजी ः वही लोग पुलिस के पास नहीं आए हैं। कोई रिपोर्ट तक दर्ज कराने नहीं आया है। हमारी यह भी योजना है कि अगर ऐसे मामले के प्रभावित व्यक्ति के परिवार वाले चाहेंगे तो हम साइक्लोजिकल प्रोफाइलिंग भी करवा सकते हैं। इस प्रकार के मामले पहले भी हुए हैं जैसे गणेश की मूर्ति का दूध पीना, मुंह नोचवा, काला बंदर। इसको मनोविज्ञान की भाषा में मास हिस्टीरिया कहा जाता है।
टोटके वालों पर खुफिया नजर
पुलिस ने चोटी काटने की चर्चाओं के बीच ही गली मोहल्लों में जादू टोना करने वालों, टोटका करने वालों, अफवाह फैलने वालों आदि पर खुफिया नजर रखनी शुरू कर दी है।