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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Muslim Artisans Make Hindu Idols: Faheem Shanu Craft Laddu Gopal, Ganesh and Lakshmi-Vishnu Idols

मुस्लिम कारीगर चमकाते हैं प्रतिमा: फहीम और शानू की पुकार, हे लड्डू गोपाल करो कमाल, पल जाएं हमारे भी बाल-गोपाल

Sat, 05 Sep 2026 01:03 PM IST
Sharukh Khan आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 05 Sep 2026 01:03 PM IST
सार

अलीगढ़ के जयगंज के पास भूखी सराय में मुस्लिम कारीगर देव प्रतिमाएं चमकाते हैं। पीतल के महंगा होने के बाद कामकाज कम हुआ। कारीगरों के लिए कोई भी सुविधा नहीं होने का मलाल है।

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Muslim Artisans Make Hindu Idols: Faheem Shanu Craft Laddu Gopal, Ganesh and Lakshmi-Vishnu Idols
Muslim Artisans - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अलीगढ़ में जयगंज की मुख्य सड़क से निकलने वाली तंग गलियों में भूखी की सराय मोहल्ला है। जहां मुस्लिम कारीगर लड्डू गोपाल, गणेश जी, विष्णु-लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं को तराश कर चमका देते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले इन कारीगरों पर काम ज्यादा है। इसी काम में जुटे फहीम और शानू कहते हैं कि लड्डू गोपाल बस इतनी कृपा कर दें कि उनके बाल-गोपाल भी पल जाएं...।
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इसी मोहल्ले की तंग गली के एक घर में वेल्डिंग मशीन पर फहीम लड्डू गोपाल की मूर्तियों के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते हैं। बोले-पीतल की महंगाई ने काम समेट दिया है, एक साल से जबरदस्त संकट है। अब घर चलाना और तीन बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। बफिंग मशीन पर मूर्तियों को चमका रहे शानू कहते हैं कि पहले अच्छा काम मिल रहा था, अब वो बात नहीं रही। दो बच्चों के साथ गृहस्थी चलाना भारी पड़ रहा है।
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यहां संचालित एक कंपनी के मो. शबाब अहमद ने बताया कि उनकी कंपनी में ऐसे कई कारीगर हैं, जो पांच साल की उम्र से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं को चमका रहे हैं। जुनैद पांच साल की उम्र से काम कर रहे हैं और शमशाद को भी दस साल से अधिक हो चुके हैं। अब दोनों अपने काम में पारंगत हो चुके हैं। महंगाई ने सबका बजट बिगाड़ दिया है।

 

मो. फैजान 10 साल से इस काम में लगे हैं। कहते हैं किसी तरह से परिवार पाल रहे हैं। पीतल के महंगा होने के बाद काम कम हो रहा है, जिससे पहले जैसी दिहाड़ी नहीं बन पाती है। दिन भर में 700 से 1000 रुपये का काम हो पाता है। सात साल से इस काम में लगे मो. अरबाज ने कहा कि शादी नहीं हुई है, अब्बा-अम्मी के साथ ही रहते हैं। कमाई बढ़े तो निकाह करें। 

 
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मो. शबाब कहते हैं कि अभी शादी नहीं हुई, क्योंकि घर की जिम्मेदारियां ही पूरी नहीं हो रही हैं। गौर हो कि इन सभी कारीगरों को इस बात का मलाल है कि आज तक उन्हें सरकार से कोई सुविधा नहीं मिली है। न कोई प्रशिक्षण कार्यशाला होती है, न कोई ऐसी जगह है, जहां कारीगर काम सीख सकें, नई मशीनों की सुविधा नहीं है।
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