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अलीगढ़ में 25 लाख की चोरी का शिकार हुआ दुर्दांत मुनीर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jul 2016 01:56 AM IST
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मुनीर मेहताब
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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बेहद दुर्दांत और दुस्साहसिक अंदाज में हत्याएं करने में माहिर हो चले मुनीर को जरायम पेशे में आगे बढ़ते हुए कई मर्तबा धोखे तो मिले। वहीं खुद को एक बार 25 लाख की चोरी का भी शिकार होना पड़ा। दिल्ली से डेढ़ करोड़ की लूट के बाद वह पचास लाख रुपयों का बैग लेकर फरारी काटने अलीगढ़ आया और शरणस्थल पर पहली ही रात में उसके सिर सहारे रखे बैग से 25 लाख चोरी हो गए।
सुबह चोरी की भनक पर सबसे पहले उसने वहां से निकलने में भलाई समझी और फिर जब चोरी करने वाले का नाम उजागर हो गया तो उसे गद्दार की संज्ञा देकर मारने भी घूमा। मगर वह आज तक उसके पल्ले नहीं पड़ा। मुनीर स्वीकाराता है कि अगर चोरी करने वाला दीपू ठाकुर उसे मिल जाता तो गद्दारी करने की सजा उसने जिस तरह अपने दोस्त सद्दाम व गांव के ही तंजील अहमद को दी, उसी तरह दीपू को भी मौत के घाट उतार देता।
दीपू ने 15 लाख हजम करने को मार डाला दोस्त
पूछताछ में मुनीर ने स्वीकारा कि जब अलीगढ़ में 32-35 लाख की लूट हुईं तो उसने कौमरी सासनी निवासी दीपू ठाकुर को 15 लाख रुपये रखने के लिए दिया। उन रुपयों को दीपू ने हजम कर लिया और बाद में दीपू ने क्वार्सी इलाके में अपने एक दोस्त की हत्या कर कहानी सुना दी कि उन रुपयों को वही दोस्त एक लड़की चक्कर में लेकर भाग गया। मगर जब दीपू ने 25 लाख रुपये चुराए तो उसे पहली कहानी झूठी लगी और जानकारी करने पर हकीकत सामने आ गई। चूंकि दीपू से मुलाकात आशुतोष ने कराई थी। इसलिए आशुतोष से अनुमति लेकर वह दीपू की हत्या के लिए खूब घूमा। मगर वह आज तक अपने ठिकानों पर नहीं मिला।
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800 फोन सर्विलांस पर, एएमयू से इनपुट
मुनीर के शूटर अतीउल्ला की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ टीम को अतीउल्ला ने मुनीर के बिजनौर, दिल्ली, एएमयू व शहर से जुड़े तमाम कनेक्शन बता दिए थे। अतीउल्ला से एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल सहित तमाम एजेंसियों ने पूछताछ कर ली थी। उन कनेक्शनों के नंबर आदि भी जुटा लिए थे और करीब 800 नंबर पिछले एक माह से सर्विलांस पर थे। अलीगढ़ से जुड़े भी करीब 400 नंबर सर्विलांस पर थे। मगर पिछले दो माह में किसी नंबर पर कोई कॉल ट्रैप नहीं हुई। इधर, एसटीएफ की अलीगढ़ टीम ने उसके एएमयू कनेक्शन पर काम शुरू किया तो उन्हें इनपुट मिल गया कि वह नोएडा पहुंचने वाला है। बस इसके बाद मात्र तीन दिन के प्रयास में गिरफ्तारी में सफलता मिल गई।
मुनीर ने कीं वारदातें, जेल गया कोई और
रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर सुरेश, कारोबारी फहद, आलमगीर या तंजील अहमद की हत्याएं ही नहीं मुनीर के आपराधिक राज किसी दुर्दांत से कम नहीं। कई अपराध तो ऐसे भी हैं, जो मुनीर ने किए और उनमें किसी और को जेल जाना पड़ गया। इनमें जामिया उर्दू के पीछे एएमयूकर्मी शनी की उसकी पत्नी के सामने हत्या और रामघाट रोड पर एक युवक की हत्या के अलावा दो बाइक लूट भी शामिल हैं। मुनीर की इस स्वीकारोक्ति के बाद अलीगढ़ पुलिस ने उन मुकदमों पर मंथन शुरू कर दिया है कि आखिर उनमें अब मुनीर को कैसे शामिल किया जाए।
मुनीर ने स्वीकारा है कि 14/15 मई 2013 की रात एएमयू कैंटीन में बतौर सुपरवाइजर तैनात शनी को उस समय गोली मारी गई, जब वह अपनी पत्नी सना संग बाजार से लौट रहा था। तभी घर के बाहर टीचर्स कॉलोनी में गोली मारकर शनी की हत्या कर दी। मुनीर उस समय अकेला शनी के इंतजार में खड़ा था। गोली लगने के बाद शनी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा था। यह मुनीर द्वारा की गई पहली हत्या थी। इस हत्या में पुलिस ने यासिर-फहाद को जेल भेजा था। हालांकि मुनीर को उठाया गया था। मगर साक्ष्य नहीं मिल पाए थे। बाद में उसे छोड़ दिया था। अब उस मुकदमे में अदालत में ट्रायल चल रहा है। इसी तरह 2013-14 में कदीर पर पुरानी चुंगी पर फायरिंग के दो-तीन दिन बाद किसी के कहने पर रामघाट रोड पर एक युवक को गोली मारी गई थी। उसमें कई लोग शामिल थे। उस युवक की हत्या में भी कोई अन्य जेल गया था। उसे मरने वाले का नाम तक नहीं पता। इसके अलावा 18 जून 2014 को लालडिग्गी पर बन्नादेवी धोबी वाली गली के अख्तर से लालडिग्गी पर पल्सर, मोबाइल, नगदी लूट स्वीकारी और इसी बीच महेशपुर फाटक पर एक युवक से पल्सर लूट स्वीकारी। इन चारों घटनाओं को लेकर क्वार्सी व सिविल लाइंस पुलिस मंथन में जुटी हैं।
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सुबह चोरी की भनक पर सबसे पहले उसने वहां से निकलने में भलाई समझी और फिर जब चोरी करने वाले का नाम उजागर हो गया तो उसे गद्दार की संज्ञा देकर मारने भी घूमा। मगर वह आज तक उसके पल्ले नहीं पड़ा। मुनीर स्वीकाराता है कि अगर चोरी करने वाला दीपू ठाकुर उसे मिल जाता तो गद्दारी करने की सजा उसने जिस तरह अपने दोस्त सद्दाम व गांव के ही तंजील अहमद को दी, उसी तरह दीपू को भी मौत के घाट उतार देता।
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दीपू ने 15 लाख हजम करने को मार डाला दोस्त
पूछताछ में मुनीर ने स्वीकारा कि जब अलीगढ़ में 32-35 लाख की लूट हुईं तो उसने कौमरी सासनी निवासी दीपू ठाकुर को 15 लाख रुपये रखने के लिए दिया। उन रुपयों को दीपू ने हजम कर लिया और बाद में दीपू ने क्वार्सी इलाके में अपने एक दोस्त की हत्या कर कहानी सुना दी कि उन रुपयों को वही दोस्त एक लड़की चक्कर में लेकर भाग गया। मगर जब दीपू ने 25 लाख रुपये चुराए तो उसे पहली कहानी झूठी लगी और जानकारी करने पर हकीकत सामने आ गई। चूंकि दीपू से मुलाकात आशुतोष ने कराई थी। इसलिए आशुतोष से अनुमति लेकर वह दीपू की हत्या के लिए खूब घूमा। मगर वह आज तक अपने ठिकानों पर नहीं मिला।
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800 फोन सर्विलांस पर, एएमयू से इनपुट
मुनीर के शूटर अतीउल्ला की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ टीम को अतीउल्ला ने मुनीर के बिजनौर, दिल्ली, एएमयू व शहर से जुड़े तमाम कनेक्शन बता दिए थे। अतीउल्ला से एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल सहित तमाम एजेंसियों ने पूछताछ कर ली थी। उन कनेक्शनों के नंबर आदि भी जुटा लिए थे और करीब 800 नंबर पिछले एक माह से सर्विलांस पर थे। अलीगढ़ से जुड़े भी करीब 400 नंबर सर्विलांस पर थे। मगर पिछले दो माह में किसी नंबर पर कोई कॉल ट्रैप नहीं हुई। इधर, एसटीएफ की अलीगढ़ टीम ने उसके एएमयू कनेक्शन पर काम शुरू किया तो उन्हें इनपुट मिल गया कि वह नोएडा पहुंचने वाला है। बस इसके बाद मात्र तीन दिन के प्रयास में गिरफ्तारी में सफलता मिल गई।
मुनीर ने कीं वारदातें, जेल गया कोई और
रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर सुरेश, कारोबारी फहद, आलमगीर या तंजील अहमद की हत्याएं ही नहीं मुनीर के आपराधिक राज किसी दुर्दांत से कम नहीं। कई अपराध तो ऐसे भी हैं, जो मुनीर ने किए और उनमें किसी और को जेल जाना पड़ गया। इनमें जामिया उर्दू के पीछे एएमयूकर्मी शनी की उसकी पत्नी के सामने हत्या और रामघाट रोड पर एक युवक की हत्या के अलावा दो बाइक लूट भी शामिल हैं। मुनीर की इस स्वीकारोक्ति के बाद अलीगढ़ पुलिस ने उन मुकदमों पर मंथन शुरू कर दिया है कि आखिर उनमें अब मुनीर को कैसे शामिल किया जाए।
मुनीर ने स्वीकारा है कि 14/15 मई 2013 की रात एएमयू कैंटीन में बतौर सुपरवाइजर तैनात शनी को उस समय गोली मारी गई, जब वह अपनी पत्नी सना संग बाजार से लौट रहा था। तभी घर के बाहर टीचर्स कॉलोनी में गोली मारकर शनी की हत्या कर दी। मुनीर उस समय अकेला शनी के इंतजार में खड़ा था। गोली लगने के बाद शनी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा था। यह मुनीर द्वारा की गई पहली हत्या थी। इस हत्या में पुलिस ने यासिर-फहाद को जेल भेजा था। हालांकि मुनीर को उठाया गया था। मगर साक्ष्य नहीं मिल पाए थे। बाद में उसे छोड़ दिया था। अब उस मुकदमे में अदालत में ट्रायल चल रहा है। इसी तरह 2013-14 में कदीर पर पुरानी चुंगी पर फायरिंग के दो-तीन दिन बाद किसी के कहने पर रामघाट रोड पर एक युवक को गोली मारी गई थी। उसमें कई लोग शामिल थे। उस युवक की हत्या में भी कोई अन्य जेल गया था। उसे मरने वाले का नाम तक नहीं पता। इसके अलावा 18 जून 2014 को लालडिग्गी पर बन्नादेवी धोबी वाली गली के अख्तर से लालडिग्गी पर पल्सर, मोबाइल, नगदी लूट स्वीकारी और इसी बीच महेशपुर फाटक पर एक युवक से पल्सर लूट स्वीकारी। इन चारों घटनाओं को लेकर क्वार्सी व सिविल लाइंस पुलिस मंथन में जुटी हैं।