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कूड़े का पहाड़ : 50 हजार की आबादी बदबू-मच्छर से परेशान
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मथुरा रोड स्थित एटूजेड प्लांट में लगा कूड़े का ढेर।
- फोटो : samvad
शहर के मथुरा रोड पर ए टू जेड प्लांट के पास वर्षों से जमा करीब 11 लाख टन कूड़े के पहाड़ ने आसपास रहने वाले लोगों की जिंदगी मुश्किल कर रखी है। करीब 50 हजार की आबादी इस समस्या से परेशान है। भीषण बदबू, गंदगी व मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से स्थानीय लोग बीमार हो रहे हैं। लोग लंबे समय से नारकीय स्थिति को झेल रहे हैं।
इस समस्या से सिर्फ आसपास रहने वाले ही नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले लोग भी परेशान होते हैं। सड़क पर बदबू के कारण रुकना मुश्किल हो जाता है। बारिश के बाद या हवा चलने की स्थिति में यहां हालात और भी दयनीय बन जाते हैं।
सितंबर तक कूड़े के निस्तारण का लक्ष्य
नगर निगम स्तर से 11 लाख टन कूड़े के पहाड़ के निस्तारण का कार्य तेज कर दिया गया है। सितंबर अंत तक इस कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। नगर निगम अफसरों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया के बाद अब तक 700 टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है, कार्य लगातार जारी है। जिससे आसपास के लोगों को राहत मिलने लगी है।
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नगर निगम का जीरो वेस्ट मॉडल पर विशेष जोर
नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में शहर के 262 कूड़ा प्वाइंट में से 230 को समाप्त कर दिया गया है, जबकि नगर निगम अफसरों का दावा है कि शेष 32 कूड़ा प्वाइंट भी जल्द खत्म कर दिए जाएंगे, जिससे शहर में डोर-टू-डोर कलेक्शन और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कूड़ा निस्तारण के साथ-साथ पुराने डंपिंग स्थलों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की भी योजना है, ताकि भविष्य में दोबारा इस तरह की समस्या उत्पन्न न हो।
घरों में रहना हो जाता है मुश्किल
बरसात व गर्मी में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। कूड़े से उठने वाली सड़ांध के कारण घर के खिड़की, दरवाजे तक बंद रखने पड़ते हैं। कई बार सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होती है। वर्षों से यह समस्या चली आ रही है। कूड़ा उठ जाने से राहत मिलेगी।
- करन सिंह, कृष्णाधाम काॅलोनी
शाम होते ही बढ़ जाता है मच्छरों का प्रकोप
वर्षों से कूड़े के ढेर के इस नरक को झेल रहे हैं। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। बच्चों को बाहर खेलने भेजना मुश्किल होता है। बीमारियों का डर भी बना रहता है। अगर कूड़ा हट गया तो पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी।
- रामवती, मथुरा रोड
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल पर काम किया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के साथ पुराने डंपिंग एरिया को भी विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो। कूड़े के पहाड़ का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जा रहा है। लक्ष्य है कि सितंबर के अंत तक डंपिंग साइट को साफ कर दिया जाए।
- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
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इस समस्या से सिर्फ आसपास रहने वाले ही नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले लोग भी परेशान होते हैं। सड़क पर बदबू के कारण रुकना मुश्किल हो जाता है। बारिश के बाद या हवा चलने की स्थिति में यहां हालात और भी दयनीय बन जाते हैं।
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सितंबर तक कूड़े के निस्तारण का लक्ष्य
नगर निगम स्तर से 11 लाख टन कूड़े के पहाड़ के निस्तारण का कार्य तेज कर दिया गया है। सितंबर अंत तक इस कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। नगर निगम अफसरों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया के बाद अब तक 700 टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है, कार्य लगातार जारी है। जिससे आसपास के लोगों को राहत मिलने लगी है।
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नगर निगम का जीरो वेस्ट मॉडल पर विशेष जोर
नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में शहर के 262 कूड़ा प्वाइंट में से 230 को समाप्त कर दिया गया है, जबकि नगर निगम अफसरों का दावा है कि शेष 32 कूड़ा प्वाइंट भी जल्द खत्म कर दिए जाएंगे, जिससे शहर में डोर-टू-डोर कलेक्शन और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कूड़ा निस्तारण के साथ-साथ पुराने डंपिंग स्थलों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की भी योजना है, ताकि भविष्य में दोबारा इस तरह की समस्या उत्पन्न न हो।
घरों में रहना हो जाता है मुश्किल
बरसात व गर्मी में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। कूड़े से उठने वाली सड़ांध के कारण घर के खिड़की, दरवाजे तक बंद रखने पड़ते हैं। कई बार सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होती है। वर्षों से यह समस्या चली आ रही है। कूड़ा उठ जाने से राहत मिलेगी।
- करन सिंह, कृष्णाधाम काॅलोनी
शाम होते ही बढ़ जाता है मच्छरों का प्रकोप
वर्षों से कूड़े के ढेर के इस नरक को झेल रहे हैं। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। बच्चों को बाहर खेलने भेजना मुश्किल होता है। बीमारियों का डर भी बना रहता है। अगर कूड़ा हट गया तो पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी।
- रामवती, मथुरा रोड
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल पर काम किया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के साथ पुराने डंपिंग एरिया को भी विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो। कूड़े के पहाड़ का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जा रहा है। लक्ष्य है कि सितंबर के अंत तक डंपिंग साइट को साफ कर दिया जाए।
- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त