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चंबल में दयनीय स्थिति में हजार वर्ष पुराने 200 से अधिक मंदिर
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के म्यूजियोलोजी विभाग के अंतर्गत ‘चंबल घाटी में मंदिरों की सुरक्षा, उनका इतिहास व डाकुओं की भूमिका‘ विषय पर वेबिनार हुई। इसमें भारत और अमेरिका सहित विश्व के कई देशों के छात्रों एवं शिक्षकों ने भाग लिया।
आर्कियालोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक पद्मश्री केके मुहम्मद ने चंबल घाटी में ग्वालियर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बटेश्वर मंदिरों के रख-रखाव तथा उनके इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यहां नवीं तथा ग्यारहवी शताब्दी के लगभग 200 मंदिर हैं, जो दयनीय अवस्था में हैं। प्रो. मुहम्मद ने कहा कि इस क्षेत्र में कभी डाकुओं की बहुतायत थी तथा उनकी अनुमति के बिना इस क्षेत्र में कुछ भी नहीं किया जा सकता था। उसका एक लाभ यह हुआ कि क्षेत्र में स्थित प्राचीन मंदिरों में मौजूद सांस्कृतिक अवशेषों को कोई हानि नहीं पहुंची। उन्होेंने कहा कि स्वयं उन्होंने विभिन्न समय में डाकुओं से इन मंदिरों के रख-रखाव पर बातचीत की तथा 80 मंदिरों के परिसर को बड़ी मेहनत से सुरक्षित किया गया।
प्रो. मुहम्मद ने कहा कि वर्तमान में चंबल घाटी में ऐसे 120 मंदिर हैं जिनके जीर्णोद्धार पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डाकुओं के समाप्त होने के बाद भी इस क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय हैं तथा उनके द्वारा खनिजों की खुदाई के चलते कई प्राचीन मंदिर ढह चुके हैं। दानिश महमूद ने आभार व्यक्त किया। एमएससी की छात्रा फरहीन खान ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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आर्कियालोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक पद्मश्री केके मुहम्मद ने चंबल घाटी में ग्वालियर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बटेश्वर मंदिरों के रख-रखाव तथा उनके इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यहां नवीं तथा ग्यारहवी शताब्दी के लगभग 200 मंदिर हैं, जो दयनीय अवस्था में हैं। प्रो. मुहम्मद ने कहा कि इस क्षेत्र में कभी डाकुओं की बहुतायत थी तथा उनकी अनुमति के बिना इस क्षेत्र में कुछ भी नहीं किया जा सकता था। उसका एक लाभ यह हुआ कि क्षेत्र में स्थित प्राचीन मंदिरों में मौजूद सांस्कृतिक अवशेषों को कोई हानि नहीं पहुंची। उन्होेंने कहा कि स्वयं उन्होंने विभिन्न समय में डाकुओं से इन मंदिरों के रख-रखाव पर बातचीत की तथा 80 मंदिरों के परिसर को बड़ी मेहनत से सुरक्षित किया गया।
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प्रो. मुहम्मद ने कहा कि वर्तमान में चंबल घाटी में ऐसे 120 मंदिर हैं जिनके जीर्णोद्धार पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डाकुओं के समाप्त होने के बाद भी इस क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय हैं तथा उनके द्वारा खनिजों की खुदाई के चलते कई प्राचीन मंदिर ढह चुके हैं। दानिश महमूद ने आभार व्यक्त किया। एमएससी की छात्रा फरहीन खान ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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