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ये कैसी आजादी... जिले के 17 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित

Sat, 06 Aug 2022 12:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Aug 2022 12:39 AM IST
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More than 17 thousand children of the district are malnourished
रिंकू शर्मा
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देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ को हम आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं, हमारा देेश प्रगति के पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन कई मायनों में आज भी पीछे है। जिले के करीब 17 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से ग्रस्त हैं। यह हाल तब है, जब सरकार के स्तर से कुपोषण को खत्म करने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, मगर ये योजनाएं धरातल पर बेअसर साबित हो रही हैं और कुपोषण की काली छाया मासूमों की जिंदगी को बर्बाद कर रही है।
आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 58 फीसदी नौनिहालों (6 से 23 माह के बच्चों) को पूरा आहार नहीं मिलता है। 79 फीसदी के भोजन में विविधता की कमी है और 94 फीसदी के भोजन में विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद नहीं होते हैं। यदि अलीगढ जिले की बात करें तो यहां 3039 आंगनबाड़ी केंद्रों में चिन्हित करीब 18 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इसमें 4622 कुपोषण की गंभीर चिकित्सीय अवस्था (सैम) एवं 12521 कुपोषण की चिकित्सीय अवस्था (मैम) की श्रेणी में हैं। संभव कार्यक्रम से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कराए जाने के बाद यह स्थिति सामने आई है। ये बच्चे कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं।
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अफसर भी नहीं दिला पा रहे कुपोषण से मुुक्ति
जिला एवं मंडल स्तरीय अफसर गोद लिए गांवों को भी कुपोषण से मुक्ति नहीं दिला पा रहे हैं। जिले में छह साल तक के 3,52,353 बच्चे पंजीकृत हैं। बीते दिनों में 3,44,133 बच्चों का वजन कराया गया तो 60,747 बच्चे कुपोषित मिले। इनमें 41,168 बच्चे कुपोषित और 19,578 अति कुपोषित की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या शहरी क्षेत्र के हैं। यहां करीब तीन हजार अतिकुपोषित बच्चे हैं। देहात क्षेत्र के ब्लॉक अतरौली में 1652, खैर में 853, अकराबाद में 1190, गंगीरी में 1529, इगलास में 961, चंडौस में 1487, बिजौली में 1354, जवां में 1369, धनीपुर में 1787, टप्पल में 1463, गौंडा में 1244 व लोधा में 1523 नौनिहाल अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। इनका उपचार जारी है। अति कुपोषित बच्चों का जेएन मेडिकल कॉलेज में बने पुनर्वास केंद्र में उपचार किया जा रहा है।
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ये योजनाएं हो रहीं संचालित
आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों व गर्भवती महिलाओं के लिए मीठा-नमकीन दलिया और लड्डू बांटे जाते हैं। हर महीने तीन किलो प्रति व्यक्ति के हिसाब से पुष्टाहार देने की व्यवस्था है। केंद्र पर आने वाले नौनिहालों को पका भोजन दिया जाता है। हर माह इस पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे है। प्रदेश सरकार ने सितंबर को सुपोषण माह मनाने का फैसला लिया हैं। इसमें चारों सप्ताह के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें प्रभातफेरी, मेला, बचपन दिवस, गोदभराई, ममता दिवस, पोषण दिवस, स्वास्थ्य स्वच्छता, लाड़ली दिवस आदि मनाए जाएंगे।

कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाडी केंद्रों के जरिये ऐसे बच्चों को चिन्हित करने के साथ ही उन्हें कुपोषण से बाहर निकालने के लिए उनका समुचित उपचार कराया जा रहा है। जिले के करीब 17 हजार कुपोषित बच्चों में से करीब 10 हजार बच्चों को उचित देखभाल और उपचार के बाद सुपोषित बनाया जा चुका है।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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