{"_id":"6160a9a58ebc3e6c32117390","slug":"monkeys-cut-ears-city-office-news-ali2752621187","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः बंदरों ने काटे कान, बचपन में ही खत्म हुए आधे अरमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः बंदरों ने काटे कान, बचपन में ही खत्म हुए आधे अरमान
विज्ञापन
अपना कटा कान दिखाता अमित
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशीष निगम
बचपन में अगर किसी बच्चे का आधा कान कट जाए तो उसका सेना में जाने का अरमान धरा रह जाता है। दुर्भाग्य से शहर के एटा चुंगी के पास स्थित नगला मान सिंह इलाके में कई बच्चों के साथ आए दिन यही हो रहा है। यहां के दर्जनों बच्चों को बंदरों ने बुरी तरह से घायल कर दिया है। इन कटखने बंदरों ने अधिकांश बच्चों के कान काटे हैं या फिर नाक पर हमला किया है। कई बच्चों के कंधे, पैर, हाथ, चेहरे और गले में गंभीर जख्म हैं। बंदरों का हमला इतना खतरनाक है कि ऑपरेशन के बाद कई बच्चों का आधा कान ही काट कर अलग करना पड़ा।
इन परिवारों का दर्द यहीं पर खत्म नहीं होता। उन्हें सरकारी अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन व इलाज तक नहीं मिल रहा है, जबकि ठा. मलखान सिंह जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 150 लोगों को रैबीज इंजेक्शन लगाने का दावा किया जाता है। मजबूरन इन लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है। जिसमें 4 से 6 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। आज तक वहां कोई नेता, अधिकारी उनका दुख दर्द जानने नहीं पहुंचा। इस पर स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि नगला मान सिंह अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आबादी वाला इलाका है, इसलिए यहां पर कोई नहीं आता है।
जिले में दस हजार बंदरों का अनुमान
290 रुपये प्रति बंदर पकड़ने का रेट
जिला वन अधिकारी दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि अलीगढ़ में हाल ही में वन विभाग ने ग्राम प्रधानों के साथ बंदरों की संख्या का अनुमान लगाया था, जिसके अनुसार जिले में दस हजार से अधिक बंदर है। इनको पकड़ने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है, मंजूरी मिलने के बाद ही कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि कासगंज में जिला वन अधिकारी रहते हुए उन्होंने वहां पर बंदरों को पकड़वाया था, जिसमें प्रति बंदर 290 रुपये का खर्च आया था। इन बंदरों को 180 किमी दूर पटियाली में गंगा पार जंगल में छोड़ा गया था। अलीगढ़ नगर निगम को इस संबंध में लिखा गया है। वह अपने मद से बंदर पकड़ें क्योंकि वन विभाग के पास फिलहाल इसका बजट नहीं है।
विज्ञापन
- सेना में जाना चाहता था, लेकिन अब घर के बड़े कहते हैं कि मैं वहां नहीं जा सकता हूं। मुझे कुछ और करना होगा। छठवीं में पढ़ता हूं। स्कूल जाने में डर लगता है। कहीं दोबारा ऐसा न हो जाए। - अमित, नगला मान सिंह।
- बचपन से ही सेना में नौकरी करने का इच्छुक था, लेकिन अब लोग कहते हैं कि मैं वहां नहीं जा सकता। अब किसी दूसरे काम की तलाश करनी होगी। घर से बाहर जाने में डर लगता है। कहीं दोबारा हमला न हो जाए। - साहिल, नगला मान सिंह।
- यहां कई बच्चाें को बंदरों ने काटा है। बंदर बच्चों का कान काट रहे हैं, या फिर नाक पर हमला करते हैं। कई बच्चों के पैर में भी काटा है। लोग परेशान हैं। नेता केवल वोट मांगने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता है। - सनी, नगला मान सिंह।
- मेरी बेटी अन्नू की शादी में अब बहुत परेशानी होगी। बंदरों ने इसका कान काट लिया था। ऑपरेशन के बाद कान कटा हुआ दिखता है। प्राइवेट डाक्टर से इलाज करवाया। सरकारी अस्पताल में कोई मदद नहीं मिली। - मुनेश कुमारी नगला मान सिंह।
- अफसोस की बात ये है कि बंदरों का समाधान नहीं हो रहा है और सरकारी अस्पतालों में इन लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। रैबीज का इंजेक्शन भी सरकारी स्तर पर नहीं मिल रहा है।
- ललता प्रसाद, नगला मान सिंह।
- मैं यहां 12 साल से रह रहा हूं। पहली बार बंदरों का इतना आतंक देख रहा हूं। एक बंदरिया ज्यादा हमलावर है, जो बच्चों को काट रही है। इसी ने परेशान किया है।
- प्रताप सिंह, नगला मान सिंह।
मैं यहां पढ़ाने आती हूं। बंदरों का बहुत आतंक है। मैं अंबेडकर कॉलोनी नौरंगाबाद में रहती हूं। वहां पर भी ऐसा ही आतंक है। मेरे बेटे अनिरुद्ध को भी बंदरों ने काटा है।
- अनीता रानी, प्रभारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला मान सिंह लोधा।
विज्ञापन
बचपन में अगर किसी बच्चे का आधा कान कट जाए तो उसका सेना में जाने का अरमान धरा रह जाता है। दुर्भाग्य से शहर के एटा चुंगी के पास स्थित नगला मान सिंह इलाके में कई बच्चों के साथ आए दिन यही हो रहा है। यहां के दर्जनों बच्चों को बंदरों ने बुरी तरह से घायल कर दिया है। इन कटखने बंदरों ने अधिकांश बच्चों के कान काटे हैं या फिर नाक पर हमला किया है। कई बच्चों के कंधे, पैर, हाथ, चेहरे और गले में गंभीर जख्म हैं। बंदरों का हमला इतना खतरनाक है कि ऑपरेशन के बाद कई बच्चों का आधा कान ही काट कर अलग करना पड़ा।
इन परिवारों का दर्द यहीं पर खत्म नहीं होता। उन्हें सरकारी अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन व इलाज तक नहीं मिल रहा है, जबकि ठा. मलखान सिंह जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 150 लोगों को रैबीज इंजेक्शन लगाने का दावा किया जाता है। मजबूरन इन लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है। जिसमें 4 से 6 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। आज तक वहां कोई नेता, अधिकारी उनका दुख दर्द जानने नहीं पहुंचा। इस पर स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि नगला मान सिंह अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आबादी वाला इलाका है, इसलिए यहां पर कोई नहीं आता है।
विज्ञापन
जिले में दस हजार बंदरों का अनुमान
290 रुपये प्रति बंदर पकड़ने का रेट
जिला वन अधिकारी दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि अलीगढ़ में हाल ही में वन विभाग ने ग्राम प्रधानों के साथ बंदरों की संख्या का अनुमान लगाया था, जिसके अनुसार जिले में दस हजार से अधिक बंदर है। इनको पकड़ने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है, मंजूरी मिलने के बाद ही कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि कासगंज में जिला वन अधिकारी रहते हुए उन्होंने वहां पर बंदरों को पकड़वाया था, जिसमें प्रति बंदर 290 रुपये का खर्च आया था। इन बंदरों को 180 किमी दूर पटियाली में गंगा पार जंगल में छोड़ा गया था। अलीगढ़ नगर निगम को इस संबंध में लिखा गया है। वह अपने मद से बंदर पकड़ें क्योंकि वन विभाग के पास फिलहाल इसका बजट नहीं है।
विज्ञापन
- सेना में जाना चाहता था, लेकिन अब घर के बड़े कहते हैं कि मैं वहां नहीं जा सकता हूं। मुझे कुछ और करना होगा। छठवीं में पढ़ता हूं। स्कूल जाने में डर लगता है। कहीं दोबारा ऐसा न हो जाए। - अमित, नगला मान सिंह।
- बचपन से ही सेना में नौकरी करने का इच्छुक था, लेकिन अब लोग कहते हैं कि मैं वहां नहीं जा सकता। अब किसी दूसरे काम की तलाश करनी होगी। घर से बाहर जाने में डर लगता है। कहीं दोबारा हमला न हो जाए। - साहिल, नगला मान सिंह।
- यहां कई बच्चाें को बंदरों ने काटा है। बंदर बच्चों का कान काट रहे हैं, या फिर नाक पर हमला करते हैं। कई बच्चों के पैर में भी काटा है। लोग परेशान हैं। नेता केवल वोट मांगने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता है। - सनी, नगला मान सिंह।
- मेरी बेटी अन्नू की शादी में अब बहुत परेशानी होगी। बंदरों ने इसका कान काट लिया था। ऑपरेशन के बाद कान कटा हुआ दिखता है। प्राइवेट डाक्टर से इलाज करवाया। सरकारी अस्पताल में कोई मदद नहीं मिली। - मुनेश कुमारी नगला मान सिंह।
- अफसोस की बात ये है कि बंदरों का समाधान नहीं हो रहा है और सरकारी अस्पतालों में इन लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। रैबीज का इंजेक्शन भी सरकारी स्तर पर नहीं मिल रहा है।
- ललता प्रसाद, नगला मान सिंह।
- मैं यहां 12 साल से रह रहा हूं। पहली बार बंदरों का इतना आतंक देख रहा हूं। एक बंदरिया ज्यादा हमलावर है, जो बच्चों को काट रही है। इसी ने परेशान किया है।
- प्रताप सिंह, नगला मान सिंह।
मैं यहां पढ़ाने आती हूं। बंदरों का बहुत आतंक है। मैं अंबेडकर कॉलोनी नौरंगाबाद में रहती हूं। वहां पर भी ऐसा ही आतंक है। मेरे बेटे अनिरुद्ध को भी बंदरों ने काटा है।
- अनीता रानी, प्रभारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला मान सिंह लोधा।

घायल कार्तिक मां गीता के साथ और हर्ष का कान दिखाते यशवंत सिंह।- फोटो : CITY OFFICE