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सढ़ा में लिखी गई थी स्क्रिप्ट... लखनऊ में गूंजा मुद्दा

Fri, 14 Aug 2020 01:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2020 01:21 AM IST
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MLA and SO fight script written in saddha, matter evoke in lucknow
- भाजपा खेमे में बस एक ही चर्चा, आखिर सढ़ा में क्या हुई थी ऐसी चर्चा, अब शासन और संगठन पर टिकी निगाह, हर स्तर से चल रही खेमेबंदी
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- सांसद की पारिवारिक चाची के देहांत पर अंतिम संस्कार में शामिल थे ये सभी लोग
- वहीं उठा था यह मुद्दा, वहीं से गुस्से में तमतमाते हुए निकले थे विधायक सहयोगी
- घटना और वीडियो के बाद हर स्तर पर मैनेजमेंट में जुटा हुआ है पार्टी का हर खेमा
गोंडा में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसकी स्क्रिप्ट सांसद के गांव सढ़ा (दामोदर नगर) में उस चर्चा के दौरान लिखी गई, जिसमें विधायक के सामने एबीवीपी कार्यकर्ता का मुद्दा उठा। वहां से तमतमाते हुए निकले विधायक इगलास यही कहकर निकले, आज उस एसओ को ही देखना है। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह सभी के सामने है और अब मुद्दा लखनऊ तक गूंज रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब विधायक सढ़ा से निकले तो उनके साथ जिले के एक पदाधिकारी व पीछे-पीछे खैर विधायक थे। मगर, खैर विधायक के आने से पहले वहां सब कुछ हो गया। यह देख जिले के पदाधिकारी थाने से बाहर आ गए और पार्टी शीर्ष नेताओं को फोन कर प्रकरण बताने में लग गए। इधर, अब यह सब होने और विधायक द्वारा मारपीट स्वीकारने के बाद पार्टी में लखनऊ तक मैनेजमेंट शुरू हो गया है। हर खेमा अपने-अपने तरीके से प्रकरण को मैनेज करने में लगा हुआ है।
नेताओं के सर्किट हाउस से जाने पर भी तरह-तरह की चर्चाएं
गोंडा से आने के बाद सभी नेता सर्किट हाउस में एकत्रित हुए और वहां से बाद में डीएम आवास तक गए। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक दम से सभी लोग उठकर डीएम के यहां गए।
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वर्षों बाद भाजपा में दिखी एकजुटता लेकिन नजर लगते नहीं लगी देर
घटना के बाद भाजपा के तीन सांसद और छह विधायक सहित तमाम पार्टी के बड़े नेता एवं कार्यकर्ता एकजुट हुए थे। सर्किट हाउस में बैठक की दौरान लोग इसकी खूब चर्चा भी कर रहे थे। गुटबाजी एवं आपसी राजनीतिक होड़ को त्यागकर सभी विधायक के साथ मारपीट के मुद्दे पर एकजुट हुए थे। जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह की भूमिका की भी लोग तारीफ कर रहे थे। सर्किट हाउस में सांसद सतीश गौतम, राजवीर सिंह राजू भैया, राजवीर दिलेर, विधायक दलवीर सिंह, रवेंद्रपाल सिंह, संजीव राजा, अनिल पाराशर, अनूप प्रधान एवं राजकुमार सहयोगी के अतिरिक्त जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह, महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत, मनीष राय और डॉ. राजीव अग्रवाल सहित कई नेता एक साथ बंद कमरे में बैठे थे। एक विधायक के सुझाव पर सभी डीएम आवास पर बातचीत के लिए गए। हालांकि, रात होते-होते एकजुटता को किसी की नजर लग गई। हालात को देखते हुए अभी भाजपा नेता चुप्पी लगाए हुए हैं।
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आज ताकत न दिखाते तो शायद...?
भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच जब इस घटना की खबर पहुंची तो चारों ओर से एक ही आवाज उठी कि अब तो कुछ करना होगा। सभी एक स्वर में तत्काल एकत्रित होकर बैठक करने पर जोर देने लगे। अंदर से आवाज आने लगी कि अगर आज ताकत न दिखाई तो फिर सब बेकार है। शायद यही वजह रही कि सभी नेता एक साथ दिखाई दिए और विषय को शासन तक पहुंचाया गया।
मौका मिला, भुनाने को एड़ी चोटी का जोर लगा
भाजपा के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका नहीं, जब भाजपा या उससे जुड़े लोगों और पुलिस या प्रशासन मशीनरी के बीच विवाद न हुआ हो। मगर पूर्व में अधिकांश बार भाजपा नेताओं का चीखना चिल्लाना बेकार गया और उनको ही या तो कार्रवाई से दो-चार होना पड़ा या उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। मगर बुधवार को हुई इस घटना को भुनाने के लिए भाजपा नेताओं ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। यही वजह रही कि तीन साल में यह पहला मौका देखने को मिला, जब अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
कहीं पर तीर तो कहीं पर निशाना भी साधा गया
इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने कहीं पर तीर तो कहीं पर निशाना साधने वाली बात भी चरितार्थ की। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों संग बैठक में बेशक मुद्दा विधायक इगलास और एसओ गोंडा का रहा। मगर नेताओं ने एक-एक कर कुछ ऐसे मुद्दे भी उछाले जिनको लेकर आज भी उनके मन में टीस है कि वे कोई कार्रवाई कराना तो दूर कोई विरोध तक नहीं कर पा रहे। कुल मिलाकर माहौल ऐसा बनाने का प्रयास हुआ कि सत्ता में रहकर भी वह विपक्ष की भूमिका में हैं।
साक्ष्य जुटाने को वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की तलाश
किसी भी स्तर पर अपनी बात न सुने जाने से निराश दिखाई दे रही पुलिस इस घटना के बाद साक्ष्य जुटाने को वीडियो व सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। तलाश किया जा रहा है कि ऐसा कोई साक्ष्य मिल जाए, जिसमें यह साबित हो कि आखिर थाने में विवाद की शुरुआत किस स्तर से और क्यों हुई। इसे लेकर थाने में लगे सीसीटीवी से लेकर उन लोगों तक को टटोला जा रहा है, जो मौके पर मौजूद थे। बस एक ही सवाल है कि क्या किसी ने कोई वीडियो बनाया या नहीं।
अज्जू इशहाक के खिलाफ भी दर्ज कराया था एसओ ने मुकदमा
यह बात ज्यादा पुरानी नहीं, बल्कि पिछले माह की है, जब सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक ने गोंडा थाने में ही एक मारपीट की शिकार महिला रामश्री गौतम के फोन पर एसओ गोंडा से सिफारिश की थी। उन्होंने फोन पर कहा था कि आपने पीड़ित का मुकदमा लिखने के बजाय दूसरे पक्ष का मुकदमा लिख लिया है। इसी बात पर एसओ व अज्जू के बीच फोन पर ही मुंहवाद हुआ था। जिसमें एसओ ने अज्जू के खिलाफ फोन पर अभद्रता का मुकदमा दर्ज किया था। बाद में मामले में एसएसपी तक बात बताई गई थी।
इनको तो वैसे भी जाना था...
भले ही भाजपाई एसपी देहात अतुल शर्मा के हटने की खबर पर खुश हो रहे हों। मगर सच्चाई ये है कि उनके तो जाने की बेला वैसे भी नजदीक थी। बतौर आईपीएस एएसपी पद पर उनका यह टर्न लगभग पूरा होने को था। रहा सवाल कार्रवाई का तो उन्हें जिले से हटा कर एएसपी एटीएस लखनऊ बनाया गया है। बस फर्क इतना ही तो कि जिले से हटकर एटीएस में काम करेंगे।बता दें कि आईपीएस रहते अधिकारी को थाना प्रभारी से लेकर सीओ और एएसपी तक का सफर तय करना पड़ता है। तब वह एसपी बन पाते हैं। अब चाहे तैनाती जिले में रहे या किसी शाखा में।

सोशल मीडिया पर थाने से भागने वालों पर तंज
गोंडा में बुधवार को हुए घटनाक्रम के दौरान जो लोग थाने से निकल आए और बाहर आकर इधर उधर फोन करने में जुट गए थे, उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर खूब तंज कसे जा रहे हैं। इन्हीं सबसे महत्वपूर्ण तंज जिला कमेटी के एक पदाधिकारी ने कसा है, जिसमें कहा है कि जो लोग पार्टी के नाम पर तरह-तरह की बातें और बयानबाजी करते हैं, वह लोग कल क्यों वहां से निकल आए थे। उन्हें भी विधायक जी का साथ देना था। यह पोस्ट खूब वायरल हो रही है।
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