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स्मृति और वीसी से मिलेंगे एएमयू के रेजीडेंट डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2016 01:58 AM IST
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एएमयू
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जेएन मेडिकल कॉलेज में पिछले महीने उपचार के दौरान ढ़ाई माह के बच्चे की मौत के मामले में जांच जारी है। बुधवार को शिकायतकर्ता द्वारा जांच कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने के चर्चे है। इधर आरडीए कार्यकारिणी ने अपनी समस्याओं को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एवं कुलपति जमीरउद्दीन शाह से मिलने का निर्णय लिया है।
बुधवार को जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष डॉ. ताबिश की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें आरडीए पदाधिकारियों ने कहा कि जांच से उन्हें कोई एतराज नहीं है। इसमें यह बात भी सामने आएंगी कि मेडिकल कॉलेज में किन-किन चीजों की कमी है। आरडीए पदाधिकारियों ने यह सवाल भी उठाया कि जांच टीम के समक्ष कंसलटेंट इंचार्ज को भी बुलाना चाहिए था, जिसके अंदर में सारे रेजीडेंट डॉक्टर काम करते है।
आरडीए पदाधिकारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एवं कुलपति से मिलने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि आश्वासन के बावजूद आज तक सुरक्षा एवं एक पेसेंट के साथ अधिकतम दो तीमारदार की व्यवस्था लागू नहीं की गई। इधर मेडिकल कॉलेज में जांच को लेकर खलबली मची है। दबी जुबान लोग कह रहे है कि जब मेडिकल में डायरिया के मरीज नहीं बच पाएंगे तो गंभीर मरीजों का क्या होगा। जांच में इस बात पर फोकस किया जा रहा है कि बच्चे की मौत में पेसेंट केयर में तो कोई लापरवाही नहीं हुई और प्रोटोकॉल को फॉलो किया गया या नहीं।
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मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक प्रो. हैरिस एच खान ने बताया कि मामले की अभी जांच चल रही है। उल्लेखनीय है कि 27 मई की रात उपचार के दौरान मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 16 में खैर के सोमना रोड, सुभाष चौक निवासी ढाई महीने के बरहन पुत्र अली की मृत्यु हो गई थी।
आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने वार्ड में तैनात डॉ. जफर इकबाल एवं डॉ. अम्मर जावेद के साथ मारपीट की थी। इसकी वजह से चार दिन तक रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहे थे। जबकि दूसरे पक्ष की ओर से उपचार में लापरवाही की शिकायत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एवं वीसी से की गई थी। उसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।
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बुधवार को जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष डॉ. ताबिश की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें आरडीए पदाधिकारियों ने कहा कि जांच से उन्हें कोई एतराज नहीं है। इसमें यह बात भी सामने आएंगी कि मेडिकल कॉलेज में किन-किन चीजों की कमी है। आरडीए पदाधिकारियों ने यह सवाल भी उठाया कि जांच टीम के समक्ष कंसलटेंट इंचार्ज को भी बुलाना चाहिए था, जिसके अंदर में सारे रेजीडेंट डॉक्टर काम करते है।
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आरडीए पदाधिकारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एवं कुलपति से मिलने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि आश्वासन के बावजूद आज तक सुरक्षा एवं एक पेसेंट के साथ अधिकतम दो तीमारदार की व्यवस्था लागू नहीं की गई। इधर मेडिकल कॉलेज में जांच को लेकर खलबली मची है। दबी जुबान लोग कह रहे है कि जब मेडिकल में डायरिया के मरीज नहीं बच पाएंगे तो गंभीर मरीजों का क्या होगा। जांच में इस बात पर फोकस किया जा रहा है कि बच्चे की मौत में पेसेंट केयर में तो कोई लापरवाही नहीं हुई और प्रोटोकॉल को फॉलो किया गया या नहीं।
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मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक प्रो. हैरिस एच खान ने बताया कि मामले की अभी जांच चल रही है। उल्लेखनीय है कि 27 मई की रात उपचार के दौरान मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 16 में खैर के सोमना रोड, सुभाष चौक निवासी ढाई महीने के बरहन पुत्र अली की मृत्यु हो गई थी।
आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने वार्ड में तैनात डॉ. जफर इकबाल एवं डॉ. अम्मर जावेद के साथ मारपीट की थी। इसकी वजह से चार दिन तक रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहे थे। जबकि दूसरे पक्ष की ओर से उपचार में लापरवाही की शिकायत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एवं वीसी से की गई थी। उसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।