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Aligarh News: मेडिकल कॉलेज में हड़ताल जारी, बिना उपचार सात मरीजों की मौत

Sat, 09 May 2026 02:51 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 02:51 AM IST
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Medical college strike continues, seven patients die without treatment
जेएन मेडिकल कॉलेज में हड़ताल के चलते मरीज को वापस लेकर जाते तीमारदार। - फोटो : samvad
जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की हड़ताल में गंभीर मरीजों की जान पर बन रही है। पिछले 36 घंटे में जिला अस्पताल के दरवाजे पर छह मरीजों की मौत हो गई है, जबकि एक मरीज की शुक्रवार दोपहर में मेडिकल कॉलेज के बाहर मौत हो गई। इस तरह सात मरीजों की उपचार के अभाव में जान चली गईं। जिन्हें बाद में परिजन रोते-बिलखते अपने साथ ले गए।
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जेएन मेडिकल कॉलेज में मंगलवार रात हुए घटनाक्रम के बाद से जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर इमरजेंसी सेवाएं ठप कर रखी हैं। इसी के चलते यहां आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा और तीमारदार उन्हें इधर से उधर लेकर भटक रहे हैं। मलखान सिंह जिला अस्पताल में पिछले 36 घंटे में यानी बुधवार रात से लेकर शुक्रवार दोपहर तक छह मरीजों की इमरजेंसी के दरवाजे पर मौत हुई है। जिनमें तीन मरीजों की मौत का रिकार्ड यहां दर्ज है, जबकि तीन को परिजन मौत के बाद बिना रिकार्ड दर्ज कराए ही साथ ले गए।
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जिला अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार हाथरस की 84 वर्ष की श्यामदेवी को परिजन रात में सांस की तकलीफ पर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां से वापस जिला अस्पताल लाए। मगर उपचार शुरू होते ही मृत घोषित कर दिया। इसी तरह गभाना की 45 वर्ष की मंजू देवी की पेट में परेशानी पर हालत बिगड़ने पर परिजन मेडिकल कॉलेज लेकर गए। वहां से वापस जिला अस्पताल लाए। यहां उपचार शुरू होते ही मृत घोषित कर दिया।
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इसके अलावा गोंडा गौंदलपुर के 60 वर्ष के बीमार हाकिम सिंह को परिजन पहले मेडिकल कॉलेज और वहां से जिला अस्पताल लाए। मगर बचाया नहीं जा सका। इसके अलावा तीन अन्य मरीज ऐसे आए, जो मेडिकल कॉलेज से वापस जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाए गए।


मगर मृत होने पर परिजन बिना लिखा पढ़ी के वापस ले गए। सीएमएस डाॅ. जगवीर वर्मा स्वीकारते हैं कि यहां सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। आपात सेवा या ओपीडी में आने वाले मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। कुछ मरीजों की देरी से पहुंचने पर मृत्यु हुई है। इधर, कासगंज से 60 वर्ष की केला देवी को परिजन सांस की तकलीफ पर शुक्रवार दोपहर जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। तत्काल उपचार की जरूरत थी। मगर हड़ताल के कारण उपचार नहीं मिल सका और मेडिकल कॉलेज के दरवाजे पर ही महिला की मृत्यु होने पर परिजन शव वापस ले गए।
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