मेयर ने रुकवाया फिल्म ‘अलीगढ़’ का प्रदर्शन..?
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गे स्कैंडल के आरोप और उसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों में एएमयू प्रो. श्रीरामचंद्र सिरास की मौत पर आधारित फिल्म ‘अलीगढ़’ के निर्देशक हंसल मेहता ने कहा है कि अलीगढ़ शहर में इस फिल्म पर एक तरह का ‘अतिरिक्त संवैधानिक प्रतिबंध’ है, जिसे जबरन थोप कर अलीगढ़ के सिनेमा हॉलों में फिल्म का प्रदर्शन रोका गया है।
इसके पीछे कुछ लोग सक्रिय हैं, जिनको शहर की मेयर शकुंतला भारती का सपोर्ट मिल रहा है। वहीं इस मामले में पलटवार करते हुए मेयर शकुंतला भारती ने कहा है कि उन्होंने फिल्म के नाम ‘अलीगढ़’ पर आपत्ति जताई है। पदम्भूषण गोपालदास नीरज जैसे विश्वप्रसिद्ध कवि जिस शहर में हों, एएमयू जैसा ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान जहां हो, उस शहर के नाम को गे स्कैंडल पर बनी फिल्म में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। गंगा जमुनी तहजीब वाले इस ऐतिहासिक शहर को बदनाम होने से उनको कष्ट हुआ है।
मेयर ने स्पष्ट किया कि उनकी निर्देशक हंसल मेहता या किसी सिनेमा संचालक से कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन से भी इस संबंध में कुछ नहीं कहा है। हां, वह जिला प्रशासन के अधिकारियों के माध्यम से फिल्म का नाम बदलवाने की मांग जरूर करेंगी, जिसके लिए वह सोमवार को अधिकारियों से मिलने जाएंगी। इधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिल्म के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अप्रत्यक्ष रूप से अगर किसी एहतियात के तौर पर सिनेमा संचालकों ने इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं किया है तो ये उनका व्यक्तिगत फैसला है।
फिल्म के लेखक अपूर्व असरानी ने कहा है कि फिल्म में शहर की संस्कृति को कहीं भी गलत ढंग से पेश नहीं किया गया है, जो लोग शहर को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं उन्होंने यकीनन ये फिल्म नहीं देखी है। फिल्म में पत्रकार की भूमिका निभाने वाले अदाकार दीपू ने कहा है कि जो लोग इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं उन्हें पहले एक बार ये फिल्म देखनी चाहिए।
प्रो.सिरास ने अलीगढ़ में 30 साल गुजारे थे और वो यहां की संस्कृति में रच बस गए थे। फिल्म समलैंगिकता को प्रोत्साहित नहीं करती है। गौर हो कि प्रो. श्रीराम चंद्र सिरास को एएमयू से निलंबित कर दिया था और उन पर समलैंगिक होने का आरोप लगा था।