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महायोजना 2031 में ‘मिश्रित आबादी क्षेत्र’ को हरी झंडी
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जीटी रोड़ स्थित एक गेस्ट हाउस में भाजपा की मीटिंग को संबोधित करते विधायक संजीव राजा।
- फोटो : CITY OFFICE
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उद्यमियों का मिश्रित आबादी क्षेत्र का फार्मूला हिट कर गया। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी इससे सहमत हैं। महायोजना 2031 में मिश्रित आबादी क्षेत्र के प्रस्ताव को शामिल किया जाएगा। यही नहीं शहर के चारों तरफ औद्योगिक क्षेत्र बसाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
जीटी रोड स्थित रघुनाथ पैलेस में शुक्रवार रात को एडीए उपाध्यक्ष प्रेमरंजन सिंह की उद्योग, व्यापारिक संगठन के नेताओं एवं जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें एडीए उपाध्यक्ष सहित अन्य तमाम लोगों ने महसूस किया कि आज तक शहर की महायोजना व्यवहारिक नहीं बनी। महायोजना बनने के बाद शहरवासियों से सुझाव मांगे जाते हैं। एडीए उपाध्यक्ष ने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि इस बार महायोजना 2031 बनने के पहले शहरवासियों से सुझाव मांगा जाएगा। उसके बाद महायोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि महायोजना व्यावहारिक बन सके। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ में ताले का काम 1828 से चल रहा है, जबकि एडीए 1981 में बनी है। महायोजना में व्यावहारिक चीजों को नहीं शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि हमें जनता का हित देखना है। वह कानून बेकार है, जिससे जनता को फायदा नहीं है। उद्यमियों की मिश्रित आबादी क्षेत्र की मांग सही है।
उन्होंने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि न सिर्फ एडीए बल्कि नगर निगम से संबंधित समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता से किया जाएगा। उद्यमी एवं व्यापारियों को जब भी जरूरत हो, वह सीधे एडीए या नगर निगम कार्यालय में आकर बात कर सकते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों को अपना फोन नंबर भी नोट कराया। एडीए उपाध्यक्ष प्रेमरंजन सिंह के संबोधन के बाद उद्यमी, व्यापारी एवं जनप्रतिनिधि खुशी से झूम रहे हैं। उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा। संचालन लघु उद्योग भारती एवं उद्योग बचाओ मंच के मनोज कुमार अग्रवाल ने किया। उल्लेखनीय है कि तीन कारखानों में सील लगाने के बाद उद्यमी एवं व्यापारी तिलमिला गए थे। जिले के अधिकतर जन प्रतिनिधि एवं व्यापारिक संगठन उद्यमियों की मांगों के समर्थन में एक छतरी के नीचे आ गए थे। रघुनाथ पैलेस में ही एक नवंबर को उद्योग बचाओ मंच का गठन हुआ था। एडीए पर निशाना साधने वाले उद्यमी एवं व्यापारी आज एडीए उपाध्यक्ष का गुणगान कर रहे हैं।
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ये लोग रहे मौजूद...
जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह, विधायक संजीव राजा, अनिल पाराशर, राजकुमार सहयोगी, ठाकुर श्योराज सिंह, लघु उद्योग भारती के मुकेश जिंदल, राहुल अग्रवाल, अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के ओपी राठी, सतीश माहेश्वरी, यतेंद्र मोहन झा, प्रमोद अग्रवाल, अशोक चौधरी, प्रदीप सिंघल, आरके चतुर्वेदी, सासनीगेट औद्योगिक संगठन के मुकेश सिंघल, राकेश सरकोडा, निर्यातक दिनेश चंद्र वार्ष्णेय, सतीश गौड़, सुशील चौधरी आदि
मिश्रित आबादी के लिए क्या क्षेत्र की जनता तैयार है?
पुराने इलाकों को मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित करने की मांग उद्यमी एवं व्यापारी कर रहे हैं। मोटे तौर पर अधिकारी भी इससे सहमत होने लगे हैं। पुराने शहर की आबादी लाखों में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित करने की सहमति क्या उस क्षेत्र में रहने वाले लोग देंगे। क्या सरकारी अधिकारी उस क्षेत्र के निवासियों से राय लेने के लिए कोई रास्ता निकालेंगे। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय राघव ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर किसी भी कीमत पर मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित न करने की मांग की है। वह आवासीय क्षेत्र में संचालित इकाईयों पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
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जीटी रोड स्थित रघुनाथ पैलेस में शुक्रवार रात को एडीए उपाध्यक्ष प्रेमरंजन सिंह की उद्योग, व्यापारिक संगठन के नेताओं एवं जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें एडीए उपाध्यक्ष सहित अन्य तमाम लोगों ने महसूस किया कि आज तक शहर की महायोजना व्यवहारिक नहीं बनी। महायोजना बनने के बाद शहरवासियों से सुझाव मांगे जाते हैं। एडीए उपाध्यक्ष ने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि इस बार महायोजना 2031 बनने के पहले शहरवासियों से सुझाव मांगा जाएगा। उसके बाद महायोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि महायोजना व्यावहारिक बन सके। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ में ताले का काम 1828 से चल रहा है, जबकि एडीए 1981 में बनी है। महायोजना में व्यावहारिक चीजों को नहीं शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि हमें जनता का हित देखना है। वह कानून बेकार है, जिससे जनता को फायदा नहीं है। उद्यमियों की मिश्रित आबादी क्षेत्र की मांग सही है।
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उन्होंने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि न सिर्फ एडीए बल्कि नगर निगम से संबंधित समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता से किया जाएगा। उद्यमी एवं व्यापारियों को जब भी जरूरत हो, वह सीधे एडीए या नगर निगम कार्यालय में आकर बात कर सकते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों को अपना फोन नंबर भी नोट कराया। एडीए उपाध्यक्ष प्रेमरंजन सिंह के संबोधन के बाद उद्यमी, व्यापारी एवं जनप्रतिनिधि खुशी से झूम रहे हैं। उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा। संचालन लघु उद्योग भारती एवं उद्योग बचाओ मंच के मनोज कुमार अग्रवाल ने किया। उल्लेखनीय है कि तीन कारखानों में सील लगाने के बाद उद्यमी एवं व्यापारी तिलमिला गए थे। जिले के अधिकतर जन प्रतिनिधि एवं व्यापारिक संगठन उद्यमियों की मांगों के समर्थन में एक छतरी के नीचे आ गए थे। रघुनाथ पैलेस में ही एक नवंबर को उद्योग बचाओ मंच का गठन हुआ था। एडीए पर निशाना साधने वाले उद्यमी एवं व्यापारी आज एडीए उपाध्यक्ष का गुणगान कर रहे हैं।
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ये लोग रहे मौजूद...
जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह, विधायक संजीव राजा, अनिल पाराशर, राजकुमार सहयोगी, ठाकुर श्योराज सिंह, लघु उद्योग भारती के मुकेश जिंदल, राहुल अग्रवाल, अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के ओपी राठी, सतीश माहेश्वरी, यतेंद्र मोहन झा, प्रमोद अग्रवाल, अशोक चौधरी, प्रदीप सिंघल, आरके चतुर्वेदी, सासनीगेट औद्योगिक संगठन के मुकेश सिंघल, राकेश सरकोडा, निर्यातक दिनेश चंद्र वार्ष्णेय, सतीश गौड़, सुशील चौधरी आदि
मिश्रित आबादी के लिए क्या क्षेत्र की जनता तैयार है?
पुराने इलाकों को मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित करने की मांग उद्यमी एवं व्यापारी कर रहे हैं। मोटे तौर पर अधिकारी भी इससे सहमत होने लगे हैं। पुराने शहर की आबादी लाखों में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित करने की सहमति क्या उस क्षेत्र में रहने वाले लोग देंगे। क्या सरकारी अधिकारी उस क्षेत्र के निवासियों से राय लेने के लिए कोई रास्ता निकालेंगे। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय राघव ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर किसी भी कीमत पर मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित न करने की मांग की है। वह आवासीय क्षेत्र में संचालित इकाईयों पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।