{"_id":"69c05cbc8e6a7d894f02e59d","slug":"marital-disputes-occurring-in-the-arab-world-are-being-resolved-in-aligarh-aligarh-news-c-2-gur1004-934881-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: अलीगढ़ में सुलझ रहे अरब में होने वाले मियां-बीबी के झगड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: अलीगढ़ में सुलझ रहे अरब में होने वाले मियां-बीबी के झगड़े
विज्ञापन
ऊपर कोट स्थित जामा मस्जिद के पास बू अली शाह मस्जिद, जहां दारुल कजा है।
- फोटो : samvad
ऊपरकोट जामा मस्जिद के पास घास की मंडी वाली रोड पर बू अली शाह मस्जिद में वर्ष 2010 से दारुल कजा (शरीयत अदालत) संचालित है। यह मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड दिल्ली के अधीन कार्य करती है। यहां सउदी अरब, दुबई समेत पूरे यूएई, कनाडा, अमेरिका, मोरक्को, बांग्लादेश और पाकिस्तान तक के मियां-बीबी के झगड़ों से संबंधित मामले सुने और सुलझाए जाते हैं।
रजिस्टरों में रखे जाने वाले इसके रिकॉर्ड को अब डिजिटल करने की तैयारी है, जल्द ही इसकी शुरुआत होगी। ईद की नमाज में शनिवार को शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने कहा कि लोग यहां पर अपने मामले निपटाएं, जिसके बाद दारुल कजा चर्चा में है। बीते 16 वर्ष में यहां पर अब तक 1800 मामले निपटाए गए हैं।
विदेश के साथ ही पड़ोसी जनपद आगरा, कासगंज, एटा, इटावा, बुलंदशहर, खुर्जा के विवाद भी आते हैं। शहर से सिविल लाइंस, ऊपरकोट, शाहजमाल, जीवनगढ़ और खैर तहसील के पीड़ित भी यहां पहुंच रहे हैं। इसमें निकाह, तलाक, खुला (पत्नी मेहर या उपहार लौटाकर तलाक ले), विरासत, हिबा (संपत्ति का हस्तांतरण), हुकूक (अधिकार), शरीयत कानून के तहत जजौजियत (निकाह की कानूनी मान्यता), सुलह, बंटवारा, फस्ख (पति की सहमति के बिना काजी या अदालत से निकाह खत्म करना) के मामले शामिल हैं।
विज्ञापन
इसकी कमेटी में लगभग 50 लोग शामिल हैं। पक्षकारों से ली जाने वाली फीस के अलावा इसके सारे खर्च लोग मिलजुल कर करते हैं। एक मामले के लिए महज 500 रुपये की फीस ली जाती है। डाक के माध्यम से दोनों पक्षों को तारीख की सूचना दी जाती है। दो से चार तारीखों में पूरा मामला सुना जाता है, इसके बाद फैसला सुनाया जाता है। फैसला 20 से 50 पेज में विस्तार से लिखा जाता है।
मिला इंसाफ :
निकाह करने के बाद अलीगढ़ से दुबई गई एक महिला ने बताया कि कुछ गलतफहमी के कारण उनके दांपत्य जीवन में परेशानी आई थी। उन्होंने यहां अपनी सुनवाई की अर्जी लगाई, इसके बाद उन्हें इंसाफ मिला।
एक साथ पांच के खिलाफ मामला दर्ज
समाज सुधार संगठन के अध्यक्ष चौ. इफराहीम हुसैन ने नवंबर 2017 में पांच के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इफराहीम के मुताबिक तबलीग जमात में पद के लिए लड़ाई हो रही थी। दारुल कजा में मामला दर्ज कराया गया, जिसकी सुनवाई हुई।
वर्ष 2010 के पहले से ही इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। अलीगढ़ के दारुल कजा की तरह ही दारुल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ और दिल्ली में भी संचालित हैं। हमारा प्रयास है कि लोग कम से कम खर्च में अपने घरेलू विवाद आपसी समझौते और सुलह से निपटा लें। यह संस्था शरीयत की रोशनी में फैसले करती है। इसमें ज्यादातर मियां-बीबी से संबंधित विवाद आते हैं।
-डॉ.मुफ्ती मोहम्मद आमिर समदानी।
विज्ञापन
रजिस्टरों में रखे जाने वाले इसके रिकॉर्ड को अब डिजिटल करने की तैयारी है, जल्द ही इसकी शुरुआत होगी। ईद की नमाज में शनिवार को शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने कहा कि लोग यहां पर अपने मामले निपटाएं, जिसके बाद दारुल कजा चर्चा में है। बीते 16 वर्ष में यहां पर अब तक 1800 मामले निपटाए गए हैं।
विज्ञापन
विदेश के साथ ही पड़ोसी जनपद आगरा, कासगंज, एटा, इटावा, बुलंदशहर, खुर्जा के विवाद भी आते हैं। शहर से सिविल लाइंस, ऊपरकोट, शाहजमाल, जीवनगढ़ और खैर तहसील के पीड़ित भी यहां पहुंच रहे हैं। इसमें निकाह, तलाक, खुला (पत्नी मेहर या उपहार लौटाकर तलाक ले), विरासत, हिबा (संपत्ति का हस्तांतरण), हुकूक (अधिकार), शरीयत कानून के तहत जजौजियत (निकाह की कानूनी मान्यता), सुलह, बंटवारा, फस्ख (पति की सहमति के बिना काजी या अदालत से निकाह खत्म करना) के मामले शामिल हैं।
विज्ञापन
इसकी कमेटी में लगभग 50 लोग शामिल हैं। पक्षकारों से ली जाने वाली फीस के अलावा इसके सारे खर्च लोग मिलजुल कर करते हैं। एक मामले के लिए महज 500 रुपये की फीस ली जाती है। डाक के माध्यम से दोनों पक्षों को तारीख की सूचना दी जाती है। दो से चार तारीखों में पूरा मामला सुना जाता है, इसके बाद फैसला सुनाया जाता है। फैसला 20 से 50 पेज में विस्तार से लिखा जाता है।
मिला इंसाफ :
निकाह करने के बाद अलीगढ़ से दुबई गई एक महिला ने बताया कि कुछ गलतफहमी के कारण उनके दांपत्य जीवन में परेशानी आई थी। उन्होंने यहां अपनी सुनवाई की अर्जी लगाई, इसके बाद उन्हें इंसाफ मिला।
एक साथ पांच के खिलाफ मामला दर्ज
समाज सुधार संगठन के अध्यक्ष चौ. इफराहीम हुसैन ने नवंबर 2017 में पांच के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इफराहीम के मुताबिक तबलीग जमात में पद के लिए लड़ाई हो रही थी। दारुल कजा में मामला दर्ज कराया गया, जिसकी सुनवाई हुई।
वर्ष 2010 के पहले से ही इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। अलीगढ़ के दारुल कजा की तरह ही दारुल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ और दिल्ली में भी संचालित हैं। हमारा प्रयास है कि लोग कम से कम खर्च में अपने घरेलू विवाद आपसी समझौते और सुलह से निपटा लें। यह संस्था शरीयत की रोशनी में फैसले करती है। इसमें ज्यादातर मियां-बीबी से संबंधित विवाद आते हैं।
-डॉ.मुफ्ती मोहम्मद आमिर समदानी।