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मनकामेश्वर अग्निकांड: बिना फायर एनओसी चल रही फैक्टरी, विस्फोट के मिले कई संदिग्ध साक्ष्य, जांच रहेगी जारी

Sun, 26 May 2024 03:48 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 26 May 2024 03:48 AM IST
सार

प्रबंधन की जांच में फैक्टरी संचालन से जुड़े कुछ दस्तावेज अधूरे मिले हैं। जिनमें कारखाना, प्रदूषण, एमएसएमई, यूपीएसआईडीसी, सेटबैक के प्रपत्र तो पूरे मिले। मगर फायर की स्थायी एनओसी नहीं मिली।

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Mankameshwar factory fire investigation
फैक्टरी में जांच करते समिति के सदस्य - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ में तालानगरी की जिस फर्नेस फैक्टरी में हादसा हुआ है,वह बिना फायर एनओसी के चल रही थी। वर्ष 2011 में भवन निर्माण के समय ली गई अस्थायी एनओसी ली गई थी, इसी से काम चलता रहा। इसके बाद कारखाना संचालन पर आगे की स्थायी एनओसी नहीं ली गई। बात अगर हादसे के साक्ष्यों की करें तो एडीएम सिटी की अगुवाई वाली जांच टीम ने शनिवार को तीन घंटे तक जांच की और टीम को कई साक्ष्यों पर संदेह है। जिनमें शॉकर, गैस सिलिंडर से विस्फोट के साथ-साथ स्टाफ की लापरवाही की वजह से भी विस्फोट का अंदेशा है। अभी इस टीम की जांच दो दिन और जारी रहेगी। इसके बाद ही लापरवाही व कार्रवाई तय होगी।

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मनकामेश्वर फर्नेस फैक्टरी में 25 मई को एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट की अगुवाई वाली टीम जांच को पहुंची। करीब ग्यारह बजे पहुंची टीम ने दो बजे तक जांच की। जिसमें यूपीएसआईडीसी, कारखाना, विद्युत सुरक्षा, फायर सर्विस, उद्योग आदि विभागों के अधिकारी शामिल रहे। प्रथम दृष्टया मौके पर देखने से उजागर हुआ कि यह विस्फोट किसी प्रतिबंधित वस्तु के वायलर में जाने से हुआ है। प्रतिबंधित वस्तुओं में मौके पर छोटे-बड़े 40 सील बंद गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। इन्हें तत्काल आपूर्ति टीम को बुलाकर लॉरिक गैस एजेंसी के सुपुर्द करा दिया गया। इसके अलावा कबाड़ में काफी संख्या में वाहनों के शॉकर, स्प्रे मशीन आदि बरामद हुए। इन उत्पादों को बिना तोड़े फोड़े वायलर में डालने से विस्फोट का अंदेशा रहता है। 
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तापमान 1800 डिग्री तक होने का तथ्य भी आया 
इस दौरान जांच टीम ने कंपनी के मैनेजर, एकाउंटेंट सहित तीन कर्मचारियों के बयान लिए। मालिकान पक्ष से भी बात की गई। इस दौरान मृतकों में से एक कर्मचारी की इस लापरवाही की ओर इशारा किया गया कि फर्नेस 1600 डिग्री तापमान तक संचालित होती है। मगर किसी वजह से शनिवार शाम फर्नेस 1800 डिग्री तापमान तक पहुंच गई थी। उसमें माल भी कम पहुंच पाया था। इसी बीच कर्मचारी इधर उधर हुआ और उसमें कम माल व अधिक तापमान की वजह से गैस बनने से विस्फोट हुआ हो। इन तथ्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि बयानों में कुछ विरोधाभास होने के चलते इन पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। मगर इन्हें नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता।

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कहां से आए इतनी मात्रा में सिलिंडर 

आपूर्ति विभाग को इस बात की जांच का जिम्मा दिया गया है कि कबाड़ में इतनी मात्रा में सिलिंडर कहां से आए। उनके नंबरों के आधार पर जांच की जाए। अगर ये सिलिंडर कबाड़ में आते हैं, तो वे किस स्तर से आते हैं। यह भी देखा जाए।

सिर्फ फायर एनओसी नहीं, बाकी सभी 
प्रबंधन की जांच में फैक्टरी संचालन से जुड़े कुछ दस्तावेज अधूरे मिले हैं। जिनमें कारखाना, प्रदूषण, एमएसएमई, यूपीएसआईडीसी, सेटबैक के प्रपत्र तो पूरे मिले। मगर फायर की स्थायी एनओसी नहीं मिली। फायर अधिकारियों ने पाया कि निर्माण के समय 2011 में जो स्थायी एनओसी ली गई थी, उसी से संचालन हो रहा था। वहीं प्रदूषण के मामले में भट्टी पर चिमनी न होने का सवाल उठा। इसी तरह से कुछ अन्य दस्तावेज भी अधूरे मिले। ये अधूरे दस्तावेज कंपनी प्रबंधन व मालिकान की जिम्मेदारी तय करेंगे।
मिले सिलिंडर
सिलिंडर-टिन सुरक्षित-ट्रांसफार्मर हुआ ध्वस्त

इस फर्नेस के बाहर लगे ट्रांसफार्मर से बिजली आपूर्ति आती है। दूसरा ट्रांसफार्मर तीन हजार केवीए का वायलर के बराबर रखा था। जो इस आग में बुरी तरह जल गया। इसी ट्रांसफार्मर से 11 हजार केवी लाइन का लोड तीन हजार में बदला जाता है। मजदूरों के अनुसार आग लगने के बाद ट्रांसफार्मर में तेज धमाका हुआ था। इसके अलावा कुछ दूसरी पर फैक्टरी में एक अन्य ट्रांसफार्मर सुरक्षित मिला। वहीं जैसी अफवाह उड़ी कि टिन व सिलिंडर फटकर उड़ गए। वे सब सुरक्षित हैं। हां वायलर में कबाड़ डालने वाली चुंबक व चेन टूटी मिली। जांच में यह दुर्घटना विद्युत आपूर्ति से जुड़ी नहीं पाई गई है।

ये रहे जांच टीम में शामिल
जांच टीम में एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट की अध्यक्षता में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अरविंद कुमार सिंह, आरएम यूपीसीडा सीमा सिंह, सहायक निदेशक कारखाना सुरक्षा केसी कनोजिया व उपायुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार व विद्युत संरक्षा के अधिकारी शामिल रहे। 

वायलर सुरक्षित मिला, बंद कराई फैक्टरी

इस दौरान टीम ने पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। दुर्घटना में शिकार हुई फर्नेस व बायलर को भी देखा। बायलर सुरक्षित मिला। मौके पर पड़े कबाड़ की जांच कराई गई। इसके बाद फैक्टरी को फिलहाल जांच पूरी होने तक के लिए बंद करा दिया गया।

जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
प्रारंभिक जांच में और मौके पर मिले साक्ष्यों में लापरवाही व अनदेखी तो उजागर हो रही है। मगर जिम्मेदारी किसकी है। मालिकान की ओर से ध्यान क्यों नहीं दिया गया। इस विषय में जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी। इसमें अभी और भी कुछ लोगों के बयान होने हैं। साथ में सुरक्षा से जुड़े कुछ विभागों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जांच समिति
अन्य फैक्टिरयां भी आएंगी जांच की जद में

इस हादसे के बाद जिले की अन्य फैक्टिरयां भी जांच की जद में आएंगी। इस तरह के वायलर से लोहा गलाने का काम सिर्फ फर्नेस में ही नहीं होता। शहर में छोटे छोटे कारखानों के रूप में हार्डवेयर कारोबार में भी छोटी फर्नेस चलती हैं। भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नासिर अली नकवी की ओर से पूर्व में प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित कई पटलों पर शिकायत की गई है। जिसमें कहा गया कि शहर में किस तरह पीतला, तांबा, जस्ता गलाने संबंधी भट्टियां संचालित हो रही हैं। इसकी जांच की जाए।

डीएम स्तर से गठित जांच टीम ने मेरी अगुवाई में 25 मई को जांच की है। काफी कुछ साफ हुआ है। कुछ तथ्य सामने आए हैं। मौके पर सिलिंडर सहित कबाड़ में प्रतिबंधित उत्पाद मिले हैं। जिनसे विस्फोट होने का अंदेशा है। वो सिलिंडर या अन्य कोई उत्पाद हो सकता है। जो वायलर में गया हो। प्रबंधन पक्ष ने अपने तर्क मजदूरों की लापरवाही को लेकर रखे हैं। मगर अभी दो दिन की जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई व जिम्मेदारी तय होगी। रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी।-अमित कुमार भट्ट, एडीएम सिटी व अध्यक्ष जांच समिति
अभी जांच के लिए दो दिन का समय और है। पहले दिन प्रारंभिक जांच हुई है। बयान हुए हैं। शेष जांच दो दिन में पूरी होने के बाद मिलेगी। जिसमें सभी विभागों की कमेंट शामिल रहेंगे। तभी जिम्मेदारी तय होगी।-विशाख जी, डीएम


मेडिकल में भरती दो घायल भी भेजे दिल्ली
इधर, 25 मई को दिन में मेडिकल कॉलेज में भरती दो अन्य घायलों को भी दिल्ली भेज दिया गया है। उन्हें भी ट्रामा सेंटर से राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया है। इस तरह इस दुर्घटना के चारों घायल अब दिल्ली में उपचार पा रहे हैं।

तालानगरी में सामान्य हुआ कामकाज
24 मई देर शाम दुर्घटना के बाद शनिवार की सुबह जरूर कुछ देर को माहौल तनावपूर्ण रहा। मगर बाद में तालानगरी में कामकाज सामान्य हो गया। इसके बाद सभी कारखानों में कामकाज हुआ।

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