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कुपोषण:शिकायतों पर हरकत में आया पीएमओ
अभिषेक शर्मा, न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Sat, 03 Feb 2018 02:07 AM IST
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उपचार से वंचित कुपोषित बच्चों पर अमर उजाला की पड़ताल से पीएमओ भी हरकत में आ गया है। बुधवार को पीएमओ ने पूरा मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को फारवर्ड कर दिया है। साथ ही मंत्रालय द्वारा यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से जवाब मांगा जा रहा है।
कुपोषण के खिलाफ जंग
समाज का सबसे छोटा और परेशान इंसान कुपोषण का निवाला बन रहा है। भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम इस तरह चलाया जा रहा है कि ज्यादातर जरूरतमंद को इसकी भनक भी नहीं है। इसका बड़ा नुकसान कुपोषित बच्चों को है, क्योंकि वही तो हैं जिन्हें समय रहते उपचार न मिला तो उन्हें समाज बोझ मान लेता है। जबकि 0 से 19 वर्ष का हर बच्चा इस कार्यक्रम में कवर होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। 13 जनवरी को ‘हरियाणा के आसरे है अलीगढ़ की कुपोषित बेटी’ खबर से अमर उजाला ने कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी। और फिर परत दर परत नए खुलासे पड़ताल में हुए।
मसलन, कुपोषितों को उपचार दिलाने में सिस्टम फेल, फंड वापस, चिह्नित इलाकों में हर तीसरे घर का मासूम कुपोषित, कुपोषित डॉली को निगल गया भ्रष्टाचार, 22 दिन में एक्सपर्ट तक पहुंच पाता है 1 कुपोषित, 2 विजिट में 3 बच्चों को मिलती है दवा, गलत इलाज से कुपोषित नकुल मौत की कगार पर, अटकने लगीं सांसें तो कराया कुपोषित आरोही को भर्ती खबरें प्रकाशित हुईं। आगे अभी पड़ताल लगातार जारी है। और इस दौरान कुपोषण और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी डॉली मामले में सबसे छोटी कर्मचारी दाई पर सस्पेंशन की गाज गिराकर खानापूर्ति कर ली गई। साथ साथ अमर उजाला ने अपने सहयोगियों को सक्रिय कर कुपोषित बच्चों को उपचार भी दिलाया।
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आरोही अब भी मेडिकल में भर्ती है। अभियान के दौरान स्मार्ट विलेज फाउंडेशन जैसे सामाजिक संगठन भी सक्रिय हुए हैं। फाउंडेशन अध्यक्ष विपिन चौधरी ने प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के जिम्मेदार नुमाइंदों सहित पूरा प्रकरण पीएमओ तक भी भेजा और पीएमओ को तमाम सुझाव भी भेजे गए।
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कुपोषण के खिलाफ जंग
समाज का सबसे छोटा और परेशान इंसान कुपोषण का निवाला बन रहा है। भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम इस तरह चलाया जा रहा है कि ज्यादातर जरूरतमंद को इसकी भनक भी नहीं है। इसका बड़ा नुकसान कुपोषित बच्चों को है, क्योंकि वही तो हैं जिन्हें समय रहते उपचार न मिला तो उन्हें समाज बोझ मान लेता है। जबकि 0 से 19 वर्ष का हर बच्चा इस कार्यक्रम में कवर होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। 13 जनवरी को ‘हरियाणा के आसरे है अलीगढ़ की कुपोषित बेटी’ खबर से अमर उजाला ने कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी। और फिर परत दर परत नए खुलासे पड़ताल में हुए।
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मसलन, कुपोषितों को उपचार दिलाने में सिस्टम फेल, फंड वापस, चिह्नित इलाकों में हर तीसरे घर का मासूम कुपोषित, कुपोषित डॉली को निगल गया भ्रष्टाचार, 22 दिन में एक्सपर्ट तक पहुंच पाता है 1 कुपोषित, 2 विजिट में 3 बच्चों को मिलती है दवा, गलत इलाज से कुपोषित नकुल मौत की कगार पर, अटकने लगीं सांसें तो कराया कुपोषित आरोही को भर्ती खबरें प्रकाशित हुईं। आगे अभी पड़ताल लगातार जारी है। और इस दौरान कुपोषण और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी डॉली मामले में सबसे छोटी कर्मचारी दाई पर सस्पेंशन की गाज गिराकर खानापूर्ति कर ली गई। साथ साथ अमर उजाला ने अपने सहयोगियों को सक्रिय कर कुपोषित बच्चों को उपचार भी दिलाया।
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आरोही अब भी मेडिकल में भर्ती है। अभियान के दौरान स्मार्ट विलेज फाउंडेशन जैसे सामाजिक संगठन भी सक्रिय हुए हैं। फाउंडेशन अध्यक्ष विपिन चौधरी ने प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के जिम्मेदार नुमाइंदों सहित पूरा प्रकरण पीएमओ तक भी भेजा और पीएमओ को तमाम सुझाव भी भेजे गए।