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ईएमयू में मजिस्ट्रेट का छापा, ड्राइवर ने पीछे दौड़ाई ट्रेन
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:55 AM IST
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ईएमयू में मजिस्ट्रेट का छापा, ड्राइवर ने पीछे दौड़ाई ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली से आने वाली पैसेंजर ट्रेनों में किस कदर रेलवे स्टाफ व पुलिस की मिलीभगत से लाखों की कर चोरी कर माल आता है, इसका खुलासा मंगलवार रात रेलवे मजिस्ट्रेट की ईएमयू में छापेमारी के दौरान उजागर हुआ।
छापे के दौरान जब मजिस्ट्रेट ने माल उतरवाना शुरू किया तो गार्ड के इशारे पर ड्राइवर ने गाड़ी पीछे दौड़ा दी। इस दौरान मजिस्ट्रेट का स्टेनो ड्राइवर के पास जाकर चीखता रहा। काफी देर तक स्टाफ भी उसके पीछे भागा। बाद में ड्रइवर ने गाड़ी यार्ड में ले जाकर खड़ी कर दी।
इस मामले में विभागीय कार्रवाई के संकेत मिले हैं। वाकये के अनुसार रेलवे मजिस्ट्रेट सुनील कुमार मिश्रा ने देर रात ईएमयू में कर चोरी के माल आने की सूचना पर बिना जीआरपी या आरपीएफ को बताए अपने स्टाफ के साथ अचानक प्लेटफार्म नंबर 3/4 पर पहुंचकर चेकिंग शुरू करा दी।
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उन्होंने गाड़ी की बोगियों में रखे बड़े बड़े पैकेट उतरवाना शुरू कर दिया। स्टाफ ने कुछ ही देर में काफी संख्या में पैकेट उतार लिए और यह देख जीआरपी व आरपीएफ स्टाफ भी उनकी मदद में लग गया। मगर इसी बीच यह खबर रेलवे के गार्ड व ड्राइवर को हुई।
गार्ड के इशारे पर ड्राइवर ने गाड़ी को बैक में दौड़ाना शुरू कर दिया। यह देख मजिस्ट्रेट का स्टेनो ड्राइवर केबिन तक पहुंचा और उसने इशारा किया कि मजिस्ट्रेट साहब के निर्देश पर चेकिंग है, गाड़ी रोक लो। मगर ड्राइवर ने किसी की न सुनी और गाड़ी तेजी से कठपुला की ओर दौड़ा दी।
इस पर स्टाफ पीछे भी दौड़ा। इस पर खुद मजिस्ट्रेट ने खासी नाराजगी जताई और वह माल लावारिस में जब्त करने का निर्देश देकर चले गए। यह खुशकिस्मती रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस दौरान संकेत मिले हैं कि ड्राइवर व गार्ड ने बताए जाने के बाद भी जान बूझकर गाड़ी बैक में दौड़ाई है।
इसलिए मामले में इनके खिलाफ विभागीय लिखा पढ़ी के साथ स्पष्टीकरण भी तलब किया जाएगा। हालांकि रेलवे स्टाफ का कहना है कि पीछे से दूसरी गाड़ी आने का समय हो रहा था। इसलिए गाड़ी को मेन ट्रैक से हटाकर यार्ड में खड़ा किया गया था।
बैक में दौड़ाने जैसी कोई बात नहीं है। इधर, बताया गया है कि काफी संख्या में मिले पैकेटों में कपड़े हैं। अब जो भी उनका मालिक आएगा, उससे जुर्माना वसूलकर माल छोड़ा जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बरामद किए गए पैकेटों की संख्या 26 बताई गई है। वहीं इस मामले में कामर्शियल इंस्पेक्टर संजय शुक्ला का कहना है कि ट्रेन को पीछे दौड़ाने जैसी कोई बात नहीं है। गाड़ी को सिर्फ यार्ड में ले जाया गया था।
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छापे के दौरान जब मजिस्ट्रेट ने माल उतरवाना शुरू किया तो गार्ड के इशारे पर ड्राइवर ने गाड़ी पीछे दौड़ा दी। इस दौरान मजिस्ट्रेट का स्टेनो ड्राइवर के पास जाकर चीखता रहा। काफी देर तक स्टाफ भी उसके पीछे भागा। बाद में ड्रइवर ने गाड़ी यार्ड में ले जाकर खड़ी कर दी।
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इस मामले में विभागीय कार्रवाई के संकेत मिले हैं। वाकये के अनुसार रेलवे मजिस्ट्रेट सुनील कुमार मिश्रा ने देर रात ईएमयू में कर चोरी के माल आने की सूचना पर बिना जीआरपी या आरपीएफ को बताए अपने स्टाफ के साथ अचानक प्लेटफार्म नंबर 3/4 पर पहुंचकर चेकिंग शुरू करा दी।
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उन्होंने गाड़ी की बोगियों में रखे बड़े बड़े पैकेट उतरवाना शुरू कर दिया। स्टाफ ने कुछ ही देर में काफी संख्या में पैकेट उतार लिए और यह देख जीआरपी व आरपीएफ स्टाफ भी उनकी मदद में लग गया। मगर इसी बीच यह खबर रेलवे के गार्ड व ड्राइवर को हुई।
गार्ड के इशारे पर ड्राइवर ने गाड़ी को बैक में दौड़ाना शुरू कर दिया। यह देख मजिस्ट्रेट का स्टेनो ड्राइवर केबिन तक पहुंचा और उसने इशारा किया कि मजिस्ट्रेट साहब के निर्देश पर चेकिंग है, गाड़ी रोक लो। मगर ड्राइवर ने किसी की न सुनी और गाड़ी तेजी से कठपुला की ओर दौड़ा दी।
इस पर स्टाफ पीछे भी दौड़ा। इस पर खुद मजिस्ट्रेट ने खासी नाराजगी जताई और वह माल लावारिस में जब्त करने का निर्देश देकर चले गए। यह खुशकिस्मती रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस दौरान संकेत मिले हैं कि ड्राइवर व गार्ड ने बताए जाने के बाद भी जान बूझकर गाड़ी बैक में दौड़ाई है।
इसलिए मामले में इनके खिलाफ विभागीय लिखा पढ़ी के साथ स्पष्टीकरण भी तलब किया जाएगा। हालांकि रेलवे स्टाफ का कहना है कि पीछे से दूसरी गाड़ी आने का समय हो रहा था। इसलिए गाड़ी को मेन ट्रैक से हटाकर यार्ड में खड़ा किया गया था।
बैक में दौड़ाने जैसी कोई बात नहीं है। इधर, बताया गया है कि काफी संख्या में मिले पैकेटों में कपड़े हैं। अब जो भी उनका मालिक आएगा, उससे जुर्माना वसूलकर माल छोड़ा जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बरामद किए गए पैकेटों की संख्या 26 बताई गई है। वहीं इस मामले में कामर्शियल इंस्पेक्टर संजय शुक्ला का कहना है कि ट्रेन को पीछे दौड़ाने जैसी कोई बात नहीं है। गाड़ी को सिर्फ यार्ड में ले जाया गया था।