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Aligarh News: अलीगढ़ में लंपी वायरस की दस्तक, इगलास क्षेत्र में चार गोवंश में मिले लक्षण
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जिले में लंपी स्किन डिजीज (एलसीडी) ने दस्तक दे दी है। इगलास तहसील की ग्राम पंचायत कारस और ढाटौंली में चार गोवंश में इस बीमारी के लक्षण मिले हैं। पशु पालन विभाग ने गांवों में टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। इन दोनों गांवों के अलावा आस-पास के 10 किलोमीटर के जद में आने वाले सभी गांवों में गोवंश का टीकाकरण किया जा रहा है, जिससे बीमारी फैल न सके।
वर्ष 2022 में लंपी वायरस के चपेट में बड़ी संख्या में गोवंश आए थे। इसको लेकर शासन ने एडवाइजरी जारी कर पशुओं का बड़े पैमाने पर उपचार और टीकाकरण करने का आदेश दिया था। खुद पशुपालन विभाग के डायरेक्टर ने भी खैर ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों का दौरा किया था।
इसी तरह एक बार फिर से लंपी वायरस ने पांव पसारना शुरू किया है मगर पहले से सचेत विभाग इस बीमारी की रोकथाम में जुट गया है। सीवीओ ने सभी ब्लॉकों के पशु चिकित्साधिकारी को सतर्क कर दिया है, जहां भी गोवंश में इस वायरस का लक्षण दिखाई दे उसे अन्य पशुओं से अलग कर उपचार किया जाए। साथ ही गोशाला आदि स्थानों पर साफ-सफाई रखी जाए। इस बीमारी से पशुपालक परेशान नजर आ रहे हैं।
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कैसे फैलता है रोग
अलीगढ़। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र चौधरी ने बताया कि यह बीमारी कीड़ों और मक्खी-मच्छरों से फैलती है। एक गाय के खून से दूसरे गाय के खून में बीमारी चली जाती है। कीड़े या मच्छर के काटने के 15 से 30 दिन में यह बीमारी गोवंश में शुरू हो जाती है। सबसे पहले बुखार आता है। गाय के खाल पर छोटे-बड़े दाने हो जाते हैं। मुंह से लार टपकने लगती है। नाक और आंख से पानी आता है। इसलिए इंजेक्शन की सुई को दूसरे गोवंश के उपयोग में नहीं लाएं।
बचाव व उपचार
अलीगढ़। बीमारी से ग्रसित पशुओं के उपचार के लिए पशुपालक तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुओं को शीप पॉक्स वैक्सीन या गोट पॉक्स वैक्सीन से टीका लगवाएं। यह वैक्सीन गोवंश में बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह एक ही वायरस से होने वाली बीमारियां हैं। इसलिए इसमें क्रॉस प्रोटेक्शन मिलता है और गायों को भीषण नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए चिकित्सक बीमार पशुओं का उपचार अवश्य कराएं।
इगलास क्षेत्र में चार लंपी वायरस के केस मिले हैं। इन गांवों के सभी गोवंश को टीका लगाया जा चुका है। बीमारी से बचाव के लिए पर्याप्त दवाएं और टीका उपलब्ध है। पशुओं को कीड़े और मक्खी-मच्छर से बचाएं। गोशाला को साफ-सुथरा रखें। डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, सीवीओ
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वर्ष 2022 में लंपी वायरस के चपेट में बड़ी संख्या में गोवंश आए थे। इसको लेकर शासन ने एडवाइजरी जारी कर पशुओं का बड़े पैमाने पर उपचार और टीकाकरण करने का आदेश दिया था। खुद पशुपालन विभाग के डायरेक्टर ने भी खैर ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों का दौरा किया था।
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इसी तरह एक बार फिर से लंपी वायरस ने पांव पसारना शुरू किया है मगर पहले से सचेत विभाग इस बीमारी की रोकथाम में जुट गया है। सीवीओ ने सभी ब्लॉकों के पशु चिकित्साधिकारी को सतर्क कर दिया है, जहां भी गोवंश में इस वायरस का लक्षण दिखाई दे उसे अन्य पशुओं से अलग कर उपचार किया जाए। साथ ही गोशाला आदि स्थानों पर साफ-सफाई रखी जाए। इस बीमारी से पशुपालक परेशान नजर आ रहे हैं।
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कैसे फैलता है रोग
अलीगढ़। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र चौधरी ने बताया कि यह बीमारी कीड़ों और मक्खी-मच्छरों से फैलती है। एक गाय के खून से दूसरे गाय के खून में बीमारी चली जाती है। कीड़े या मच्छर के काटने के 15 से 30 दिन में यह बीमारी गोवंश में शुरू हो जाती है। सबसे पहले बुखार आता है। गाय के खाल पर छोटे-बड़े दाने हो जाते हैं। मुंह से लार टपकने लगती है। नाक और आंख से पानी आता है। इसलिए इंजेक्शन की सुई को दूसरे गोवंश के उपयोग में नहीं लाएं।
बचाव व उपचार
अलीगढ़। बीमारी से ग्रसित पशुओं के उपचार के लिए पशुपालक तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुओं को शीप पॉक्स वैक्सीन या गोट पॉक्स वैक्सीन से टीका लगवाएं। यह वैक्सीन गोवंश में बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह एक ही वायरस से होने वाली बीमारियां हैं। इसलिए इसमें क्रॉस प्रोटेक्शन मिलता है और गायों को भीषण नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए चिकित्सक बीमार पशुओं का उपचार अवश्य कराएं।
इगलास क्षेत्र में चार लंपी वायरस के केस मिले हैं। इन गांवों के सभी गोवंश को टीका लगाया जा चुका है। बीमारी से बचाव के लिए पर्याप्त दवाएं और टीका उपलब्ध है। पशुओं को कीड़े और मक्खी-मच्छर से बचाएं। गोशाला को साफ-सुथरा रखें। डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, सीवीओ