Lumpy Virus: घट रहा दूध; अस्पतालों में नहीं उपचार की व्यवस्था, पशुपालक परेशान
ग्रामीणों को चिंता सता रही है कि बीमार पशुओं का दूध पीने से वह भी बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में ग्रामीण इन दिनों दूध से भी परहेज करने लगे हैं। इसका असर डेयरी पर पहुंचने वाले दूध पर भी पड़ने लगा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिले में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के बढ़ते प्रकोप से पशुपालक परेशान हैं। पशुओं के बीमार होने से सप्ताह भर में ही दूध का उत्पादन घट गया है। बीमार पशुओं का बेहतर उपचार कराने में ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। देहात क्षेत्र के पशु चिकित्सालयों में न तो पर्याप्त स्टाफ मौजूद है और न ही दवाएं। ऐसे में बीमार पशुओं का इलाज कराने को ग्रामीणों को निजी पशु चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सोफा सुजानपुर के ग्रामीण दलवीर सिंह ने बताया कि उनके दो पशु लंपी बीमारी की चपेट में आ गए हैं। इलाज के लिए पशु चिकित्सालय गए थे, लेकिन वहां इलाज नहीं मिला। पिसावा के विक्रम सिंह ने बताया कि उनके चार पशु बीमार हैं। इलाज के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।
दूध से परहेज कर रहे ग्रामीण
ग्रामीणों को चिंता सता रही है कि बीमार पशुओं का दूध पीने से वह भी बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में ग्रामीण इन दिनों दूध से भी परहेज करने लगे हैं। इसका असर डेयरी पर पहुंचने वाले दूध पर भी पड़ने लगा है। ऐसा होने से दूध की कीमतों में बढ़ोत्तरी की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
चपेट में आए 300 से अधिक पशु
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि राजस्थान के रास्ते अलीगढ़ पहुंची इस लंपी बीमारी का सर्वाधिक प्रकोप खैर, टप्पल एवं चंडौस ब्लॉक के गांवों में दिखाई पड़ रहा है। अब तक जिले में 300 से अधिक पशु लंपी स्किन डिजीज की चपेट में आ चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी गायों की सभी प्रजातियों में होती है और इसकी शिकार दूध देने वाली गाय बनती है। जर्सी नस्ल की गाय के लिए यह बीमारी जानलेवा होती है। यह बीमारी गायों का खून चूसने वाले कीड़ों और मक्खी, मच्छरों के जरिए फैलती है। एक गाय के खून से दूसरे गाय के खून में फैलती है।
उन्होंने बताया कि इस रोग से बचने के लिए वैक्सीन मंगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पशु पालक अपने पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए उन्हें खुले आसमान के नीचे न बांधे। जहां बांधे वहां धुआं अवश्य कर लें। उन्होंने कहा कि पशु के बीमार होने पर सरकारी पशु अस्पताल में पहुंचकर उपचार कराएं। उन्होंने बताया कि बीमार पशुओं के इलाज के लिए 10 टीमें लगातार गांवों में भ्रमणशील है और वहां कैंप किए हुए हैं।