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एटीएम पर ताले, जनता को नकदी के लाले

Wed, 18 Apr 2018 02:29 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Wed, 18 Apr 2018 02:29 AM IST
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Locks on ATMs, cash laundering to the public
मुख्यशाख एसबीआई के बाहर लगे एटीएम में नकदी न होने पर बंद पड़ा शटर। - फोटो : Amar Ujala
नोटबंदी के बाद भले ही बैंकों की स्थिति सामान्य दर्शाने की कोशिश हो रही हो, लेकिन हकीकत कुछ और है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिजर्व बैंक से बैंकों के करेंसी चेस्टों को नोटबंदी से पहले की तुलना में मात्र दस फीसदी आपूर्ति हो रही है। 
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दो हजार के नोट आठ माह से आ ही नहीं रहे हैं तो 500 के नोटों की आपूर्ति में भी करीब 25 फीसदी की कमी आई है। इसके चलते बैंक ही नहीं, एटीएम में भी नकदी का संकट खड़ा हो गया है। मात्र छोटी करेंसी की सप्लाई मिलने के चलते बैंकें अपने एटीएम को चलाए रखने में असुविधा महसूस कर रही हैं। इसके चलते महानगर में ही कई एटीएम पर ताला नजर आता है या फिर नो कैश के बोर्ड ग्राहकों को मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं। 
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महानगर में इन प्रमुख स्थानों पर बंद मिले एटीएम
एसबीआई मुख्य शाखा के बाहर एटीएम-खराब 
 मुख्य शाखा का दूसरा एटीएम पूरी तरह बंद
सेंटर प्वाइंट पर केनरा बैंक का एटीएम बंद 
सेंटर प्वाइंट एक्सिस बैंक के एटीएम में नो कैश का बोर्ड 
स्टेडियम के सामने इंडीकैश बैंक का एटीएम-नो कैश का बोर्ड  

बैंकों एवं एटीएम में बड़े नोटों की किल्लत से बाजारों में हाहाकार की स्थिति है। खासतौर पर फुटकर व्यापारी इससे आहत हैं। उनका कहना है कि बैंकों से बड़े नोट मिल नहीं रहे हैं। ग्राहक लेने में आनाकानी करते हैं। माल मंगाने में भी बड़े नोटों से सहूलियत रहती है। इन्हें लाने ले जाने में भी सहूलियत रहती है। जबकि छोटे नोट ज्यादा रख लो तो अलग से दिखते हैं। इन्हें ले जाने में वारदात का खतरा रहता है।
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- जय गोपाल वार्ष्णेय, व्यापारी बारहद्वारी 

बैंकवाले बड़े नोट दे ही नहीं रहे हैं। मांगने पर रिजर्व बैंक से कम सप्लाई की बात बताते हैं। एटीएम भी खाली पड़े रहते हैं या फिर उनमें छोटे नोट मिलते हैं। पता नहीं ऐसा कब तक चलेगा। 
- राज सक्सेना, बैंक खाताधारक, खिरनी गेट 

नोटबंदी के बाद चेस्टों को रिजर्व बैंक से मिलने वाली करेंसी की आपूर्ति पूर्व की तुलना में दस फीसदी रह गई है। पिछले सात-आठ माह से दो हजार के नए नोट आए नहीं हैं और 500 के नोटों की आवक भी 25 फीसदी तक कम हुई है। इससे बैंकिंग पर बुरा असर पड़ रहा है। बैंकें आसपास के चेस्टों से पैसा लेकर काम चलाने पर मजबूर हैं। 

- पंकज चोपड़ा, आरएम, भारतीय स्टेट बैंक 
बडे़े नोटों की आवक कम होने तथा रिजर्व बैंक से कम नकदी आने से बैंकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कई बैंकों ग्राहकों द्वारा जमा कराए गए पैसों और आसपास के चेस्टों से पैसा लेकर काम चलाने पर मजबूर हैं।      
- आनंद गर्ग, लीड बैंक मैनेजर 
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