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अलीगढ़ : दूसरे दिन भी ताला फैक्ट्रियों पर पड़े रहे ताले
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मानिक चौक में बंद पड़े कारखाने । संवाद
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ लॉक एसोसिएशन के बैनर तले ताला कारोबारियों की हड़ताल के दूसरे दिन भी फैक्ट्रियों पर ताले लटके रहे। शहर में लगभग तीन सौ से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद रहीं। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि कच्चे माल के दामों में इजाफा होने से ताला निर्माण की लागत बढ़ गई है। लेकिन थोक व्यापारी ताले के दामों में इजाफा करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अगर व्यापारियों ने ताले के दाम में वृद्धि नहीं की तो हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।
बीते दो साल से कच्चे माल की कीमतों में बेहिसाब वृद्धि हुई है। अलीगढ़ लॉक एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल से लेकर अब तक व्यापारियों द्वारा ताले के दाम नहीं बढ़ाए गए। जबकि पैकिंग, लोहे की पत्ती, गत्ते, लोहा, निकिल, डीजल पेट्रोल आदि के दामों में दोगुने का इजाफा हो गया है। जबकि व्यापारी पुराने रेट पर ही माल खरीदना चाहते हैं। ताला निर्माण की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में ताले के दाम न बढ़ने से ताला कारोबार पर संकट है। रविवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी शहर की लगभग तीन सौ से ऊपर ताला फैक्ट्रियां बंद रहीं। ताला कारोबारियों का कहना था कि एक सप्ताह में अगर ताले के दाम नहीं बढ़े तो आगे भी हड़ताल जारी रहेगी।
सौ से सवा सौ टन ताला रोजाना जाता है बाहर
अलीगढ़ लॉक एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु गुप्ता ने बताया कि अलीगढ़ से रोजाना सौ से सवा सौ टन माल दिल्ली, बनारस, कानपुर आदि बड़ी मंडियों में जाता है। एक सप्ताह की हड़ताल के कारण अब इसकी सप्लाई रुक गई है। एक सप्ताह बाद जब मंडियों में स्टॉक खत्म हो जाएगा तो ताले के दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे।
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करीब पंद्रह हजार कामगारों पर रोजगार का संकट
जिले की लगभग तीन सौ से ऊपर ताला फैक्ट्रियां बंद होने से करीब पंद्रह हजार कामगारों पर रोजगार का संकट मंडराने लगा है। हालांकि, एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी फैक्ट्रियों में काम करने वालों को वह तनख्वाह देंगे। लेकिन ऐसे में उन मजदूरों का क्या होगा, जो ठेकेदारी पर काम करते हैं। अगर हड़ताल बढ़ी तो इन पर रोजगार का संकट मड़राना तय है।
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बीते दो साल से कच्चे माल की कीमतों में बेहिसाब वृद्धि हुई है। अलीगढ़ लॉक एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल से लेकर अब तक व्यापारियों द्वारा ताले के दाम नहीं बढ़ाए गए। जबकि पैकिंग, लोहे की पत्ती, गत्ते, लोहा, निकिल, डीजल पेट्रोल आदि के दामों में दोगुने का इजाफा हो गया है। जबकि व्यापारी पुराने रेट पर ही माल खरीदना चाहते हैं। ताला निर्माण की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में ताले के दाम न बढ़ने से ताला कारोबार पर संकट है। रविवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी शहर की लगभग तीन सौ से ऊपर ताला फैक्ट्रियां बंद रहीं। ताला कारोबारियों का कहना था कि एक सप्ताह में अगर ताले के दाम नहीं बढ़े तो आगे भी हड़ताल जारी रहेगी।
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सौ से सवा सौ टन ताला रोजाना जाता है बाहर
अलीगढ़ लॉक एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु गुप्ता ने बताया कि अलीगढ़ से रोजाना सौ से सवा सौ टन माल दिल्ली, बनारस, कानपुर आदि बड़ी मंडियों में जाता है। एक सप्ताह की हड़ताल के कारण अब इसकी सप्लाई रुक गई है। एक सप्ताह बाद जब मंडियों में स्टॉक खत्म हो जाएगा तो ताले के दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे।
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करीब पंद्रह हजार कामगारों पर रोजगार का संकट
जिले की लगभग तीन सौ से ऊपर ताला फैक्ट्रियां बंद होने से करीब पंद्रह हजार कामगारों पर रोजगार का संकट मंडराने लगा है। हालांकि, एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी फैक्ट्रियों में काम करने वालों को वह तनख्वाह देंगे। लेकिन ऐसे में उन मजदूरों का क्या होगा, जो ठेकेदारी पर काम करते हैं। अगर हड़ताल बढ़ी तो इन पर रोजगार का संकट मड़राना तय है।