PM SVANidhi Yojana: ऋण लेकर 7390 लोगों ने नहीं शुरू किया रोजगार, अब हैं 10 करोड़ के बकायेदार
योजना में प्रावधान है कि अगर कोई लाभार्थी पहला ऋण (शुरुआत में 15,000 रुपये) समय पर वापस कर देता है, तो वह अगले चरण में 25,000 और फिर 50,000 रुपये तक के ऋण के लिए पात्र हो जाता है।
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कोविड काल में आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत जिले में 32,671 रेहड़ी-पटरी वालों को कुल 82.04 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इनमें से 7390 लाभार्थी ऐसे हैं जिन्होंने ऋण की राशि वापस नहीं की है। इन पर 10 करोड़ रुपये बकाया है। बैंक अब जमा कागजात के आधार पर इनकी तलाश कर रही हैं।
डूडा विभाग के आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत अब तक 32,671 रेहड़ी-पटरी वालों को कुल 82.04 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। नगर निगम क्षेत्र में पीएम स्वनिधि योजना के तहत अब तक कुल 56,545 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 54,090 आवेदन स्वीकृत हुए और 52,802 आवेदनों के सापेक्ष पैसा जारी किया गया।
इनमें वह आवेदक भी शामिल हैं, जिन्होंने एक बार ऋण लेकर उसे वापस किया और फिर से बढ़े हुए ऋण के लिए आवेदन किया। जिन लोगों ने रुपये वापस नहीं किए हैं, उनकी तलाश हो रही है। समस्या यह है कि कोई लाभार्थी दूसरे शहर में रोजगार करने चला गया तो किसी के दस्तावेज अस्थायी पते पर पर बने थे। योजना में प्रावधान है कि अगर कोई लाभार्थी पहला ऋण (शुरुआत में 15,000 रुपये) समय पर वापस कर देता है, तो वह अगले चरण में 25,000 और फिर 50,000 रुपये तक के ऋण के लिए पात्र हो जाता है।
बैंकों के बकाया वसूली की एक प्रक्रिया है। जिन आवेदकों ने पैसा वापस नहीं किया है वह फिर से ऋण के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। बैंक उनके संबंध में जानकारी जुटा कर उनसे पैसा जमा करने के लिए प्रयास करेंगी। - अशोक कुमार सोनी, लीड बैंक मैनेजर
25 हजार ने पैसा वापस कर दोबारा ऋण भी लिया
अलीगढ़ जिले के 32,671 लाभार्थियों में से 25,298 ऐसे हैं जिन्होंने ईमानदारी से अपना लिया गया ऋण चुकाया है और बढ़ी हुई राशि के लिए सफलतापूर्वक आवेदन भी किया है। यह दिखाता है कि योजना का लाभ बड़ी संख्या में सही लोगों तक भी पहुंचा है।
कोविड के बाद फिर नौकरी करने फरीदाबाद पहुंचा
केस-1- कोविड काल में सुरेश की प्लाइवुड बनाने वाली कंपनी में नौकरी चली गई थी। वह गुरुग्राम से अलीगढ़ आ गया था। कॉस्मेटिक सामान बेचने का काम शुरू करने के लिए उसने पैसा लिया था। अब बताया गया है कि वह फरीदाबाद में किसी कंपनी में काम कर रहा है। पैसा बैंक को नहीं मिला है।
कचौड़ी की जगह कारपेंटर का काम करने पहुंचा दिल्ली
केस- 2- कचौड़ी की ढकेल लगाने के लिए लक्ष्मण ने स्वनिधि योजना के तहत पैसा लिया था। जब एक साल तक दिए गए ऋण की कोई किस्त नहीं आई तो बैंक ने उल्लेख किए गए पते पर संपर्क किया। पता चला कि वह एनसीआर में कारपेंटर का काम कर रहा है। पैसा बैंक को नहीं मिला है।