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अलीगढ़ से निकलकर जीते बड़े-बड़े गढ़

Tue, 24 Jan 2017 02:18 AM IST
मनोज माहेश्वरी
मनोज माहेश्वरी Updated Tue, 24 Jan 2017 02:18 AM IST
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अलीगढ़ जिले की मिट्टी में कई ऐसी शख्सियत पैदा हुई हैं, जिनके कद के आगे जिले व क्षेत्र की सीमाएं छोटी हो गईं। यह लोग पैदा यहां हुए। प्रारंभिक राजनीति यहां की, लेकिन बाहर जाकर परचम लहरा दिया। 
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इसकी शुरुआत अलीगढ़ जिले में शामिल रहे कस्बा मुरसान में पैदा हुए राजा महेंद्र प्रताप से होती है। आजादी से पहले 32 साल तक विदेशों में रहकर आजादी की जंग लड़ने वाले राजा महेंद्र प्रताप की शख्सियत किसी परिचय की मोहताज नहीं थी, लेकिन जब वह राजनीति में उतरे तो उन्होंने मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़ा। वर्ष 1957 में मथुरा से लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले राजा महेंद्र प्रताप के पक्ष में उस समय बयार चली। राजा साहब ने बड़े अंतर से चुनाव जीता था। उन्होंने वहां से चुनाव लड़ रहे अटल बिहारी वाजपेई की जमानत तक जब्त करा दी थी। उन्होंने साबित कर दिया कि राजनीति में भी वह ‘राजा’ ही हैं। उल्लेखनीय है कि राजा साहब के निधन तक उनकी जन्मस्थली मुरसान अलीगढ़ जिले में ही थी। अब ये हाथरस में है। 
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इस जिले में पैदा हुए और भाजपा की प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा नाम रहे पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह से 10 बार विधायक रहे ही, लेकिन वर्ष 1993 में वह कासगंज से भी विधायक रहे। वर्ष 2004 में वह बुलंदशहर और 2009 में एटा से सांसद चुने गए। उन्होंने दिखा दिया कि राजनीति के वह मंझे हुए खिलाड़ी हैं और क्षेत्र से बाहर भी उनकी पकड़ है। उनके पुत्र राजवीर सिंह राजू अलीगढ़ की सीमा के बाहर दूसरे जिले बुलंदशहर की डिबाई सीट से विधायक रह चुके हैं। उनके बेटे राजवीर सिंह राजू ने भी जिले से बाहर राजनीति की और सफल भी रहे। वह एटा से वर्तमान में सांसद हैं। 
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इस जिले की राजनीति में कई आंदोलनोें में काफी सक्रिय रहे और वर्तमान में हाथरस के गांव बहरदोई के मूल निवासी रामजीलाल सुमन ने भी जिले से बाहर राजनीति में नए आयाम स्थापित किए। वह फिरोजाबाद से कई बार एमपी रहे और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। उनकी पत्नी प्रेमवती  सुमन आगरा जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। यही नहीं उनके भाई नारायण सिंह सुमन भी आगरा की राजनीति में जाना पहचाना नाम हैं। वह बसपा के शासनकाल में प्रदेश में मंत्री रहे हैं।    
इस जिले का जिक्र हो तो सीबी गुप्त को भला कौन भूल सकता है। चंद्रभान गुप्त की जन्मभूमि बिजौली अलीगढ़ है। स्वाधीनता आंदोलन में शामिल रहे चंद्रभान गुप्त ने प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर राजनीति की और कई बार यूपी के मुख्यमंत्री बने। 

अलीगढ़ जिले से राजनीति शुरू कर वाले पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय बाद में हाथरस जिले की राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय ने राजनीति में जिले की सीमा से बाहर जाकर सफलता हासिल की। उन्होंने वर्ष 2009 में आगरा की फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ा और उसमें सिने स्टार व वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को परास्त किया। ऐसे कई और उदाहरण इस जिले में हैं। जोकि यहां से बाहर की राजनीति में छाये रहे।
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