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जनप्रतिनिधि से आस छोड़, किसानों ने चंदा कर नीम नदी पर बनवा दिया पुल
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गांव चकाथल में नीम नदी पर किसानों द्वारा बनवाया गया पुल।
- फोटो : ATHROLI
नेताओं के दरबार में किसी काम के लिए जाना और उस काम को मंजूर कराकर लाना किसी पहाड़ खोदने के बराबर मेहनत से कम नहीं... यह मानना है अतरौली के गांव चकाथल के वाशिंदों का। जब गांव के लोग नीम नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर जनप्रतिनिधि के पास जाकर थक गए तो खुद चंदा एकत्रित कर खेेतों पर जाने के लिए नदी पर पुल का निर्माण कर दिया। पुल के निर्माण और मिट्टी भराव में करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं।
गांव चकाथल में खेतों के बीच से नीम नदी गुजर रही है। नीम नदी के दोनों ओर चकाथल के लोगों के खेत हैं। शिवकुमार के खेत से जयनारायण व संतोष फौजी के खेत से होते हुए चकरोड जा रहा है, जो बुलंदशहर जिले की सीमा के गांव विजय नगरिया में जाकर मिलता है। इसी चकरोड से अधिकतर किसानों को अपने खेतों में होकर जाना होता है। लेकिन पुल नहीं होने से नीम नदी के पानी में होकर किसानों को गुजरना होता है। कुछ समय पहले ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से इस जगह पर पुल निर्माण की मांग रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
हर किसान ने दिए पांच सौ रुपये, कुछ ने किया श्रमदान
पुल के निर्माण के लिए हर किसान ने कम से कम पांच सौ रुपये दिए। संपन्न किसानों ने 2100, 5100 व 11000 हजार रुपये तक का चंदा दिया। निजी ट्रैक्टर वाले किसानों ने श्रमदान कर पुल के आसपास मिट्टी का भराव कराया। 22 फुट लंबे और 12 फुट चौड़े पुल का नीम नदी पर निर्माण कराया गया। पुल का करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा।
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दलदल में धंसकर मर चुके हैं तीन बैल
नीम नदी के पानी से होकर ही किसानों को बुग्गी आदि निकालनी होती थी। पानी में दलदल भी बन गया है। दलदल में फंसकर गत वर्ष मोनी, जयप्रकाश व देवकी के तीन बैल मर चुके हैं। इससे किसानों को बुलंदशहर जिले की सीमा के गांव विजय नगरिया होकर करीब छह किमी घूमकर अनाज आदि लेकर आना पड़ता था।
काजिमाबाद-बैलोन मार्ग को पक्का कराने की मांग
रायपुर रेलवे स्टेशन-काजिमाबाद से बुलंदशहर के गांव बेलोन को जा रहा मार्ग कच्चा है। इस मार्ग पर नीम नदी के पास पुल का निर्माण हो चुका है, लेकिन रास्ता कच्चा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि यह मार्ग पक्का बन जाए तो काजिमाबाद क्षेत्र के तमाम गांवों के लोगों को बैलोन व नरौना आने जाने के लिए बेहद सुविधा होगी। संवाद
क्षेत्र के नामी राजमिस्त्री कर रहे कार्य
नीम नदी पर पुल के निर्माण कार्य में सरकारी पुलों का निर्माण करने वाले कई राजमिस्त्री लगे हैं। निर्माण कार्य में वही मजबूती व मानक रखा जा रहा है जो सरकारी पुलों के निर्माण कार्य में रहता है।
- गांव के लोगों ने चंदा करके अपने खेतों को जाने के लिए पुल का निर्माण कराया है। किसानों ने श्रमदान भी किया है। इससे गांव के लोगों को बेहद राहत मिलेगी।
- प्रमोद पंडा
- नीम नदी के उस पार से अनाज आदि लेकर किसानों को पांच से छह किमी घूमकर बुलंदशहर के गांव विजय नगरिया होकर आना पड़ा था। पुल बनने से किसान खुश हैं।
- रामभूल सिंह
- ग्रामीणों ने पुल खुद के चंदे से बनवाया है। लेकिन जनप्रतिनिधि यदि काजिमाबाद से बैलोन को जा रहे मार्ग को ही पक्का करवा दें तो क्षेत्र के लोगों को बेहद राहत मिलेगी।
- कृपाशंकर शर्मा
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गांव चकाथल में खेतों के बीच से नीम नदी गुजर रही है। नीम नदी के दोनों ओर चकाथल के लोगों के खेत हैं। शिवकुमार के खेत से जयनारायण व संतोष फौजी के खेत से होते हुए चकरोड जा रहा है, जो बुलंदशहर जिले की सीमा के गांव विजय नगरिया में जाकर मिलता है। इसी चकरोड से अधिकतर किसानों को अपने खेतों में होकर जाना होता है। लेकिन पुल नहीं होने से नीम नदी के पानी में होकर किसानों को गुजरना होता है। कुछ समय पहले ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से इस जगह पर पुल निर्माण की मांग रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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हर किसान ने दिए पांच सौ रुपये, कुछ ने किया श्रमदान
पुल के निर्माण के लिए हर किसान ने कम से कम पांच सौ रुपये दिए। संपन्न किसानों ने 2100, 5100 व 11000 हजार रुपये तक का चंदा दिया। निजी ट्रैक्टर वाले किसानों ने श्रमदान कर पुल के आसपास मिट्टी का भराव कराया। 22 फुट लंबे और 12 फुट चौड़े पुल का नीम नदी पर निर्माण कराया गया। पुल का करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा।
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दलदल में धंसकर मर चुके हैं तीन बैल
नीम नदी के पानी से होकर ही किसानों को बुग्गी आदि निकालनी होती थी। पानी में दलदल भी बन गया है। दलदल में फंसकर गत वर्ष मोनी, जयप्रकाश व देवकी के तीन बैल मर चुके हैं। इससे किसानों को बुलंदशहर जिले की सीमा के गांव विजय नगरिया होकर करीब छह किमी घूमकर अनाज आदि लेकर आना पड़ता था।
काजिमाबाद-बैलोन मार्ग को पक्का कराने की मांग
रायपुर रेलवे स्टेशन-काजिमाबाद से बुलंदशहर के गांव बेलोन को जा रहा मार्ग कच्चा है। इस मार्ग पर नीम नदी के पास पुल का निर्माण हो चुका है, लेकिन रास्ता कच्चा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि यह मार्ग पक्का बन जाए तो काजिमाबाद क्षेत्र के तमाम गांवों के लोगों को बैलोन व नरौना आने जाने के लिए बेहद सुविधा होगी। संवाद
क्षेत्र के नामी राजमिस्त्री कर रहे कार्य
नीम नदी पर पुल के निर्माण कार्य में सरकारी पुलों का निर्माण करने वाले कई राजमिस्त्री लगे हैं। निर्माण कार्य में वही मजबूती व मानक रखा जा रहा है जो सरकारी पुलों के निर्माण कार्य में रहता है।
- गांव के लोगों ने चंदा करके अपने खेतों को जाने के लिए पुल का निर्माण कराया है। किसानों ने श्रमदान भी किया है। इससे गांव के लोगों को बेहद राहत मिलेगी।
- प्रमोद पंडा
- नीम नदी के उस पार से अनाज आदि लेकर किसानों को पांच से छह किमी घूमकर बुलंदशहर के गांव विजय नगरिया होकर आना पड़ा था। पुल बनने से किसान खुश हैं।
- रामभूल सिंह
- ग्रामीणों ने पुल खुद के चंदे से बनवाया है। लेकिन जनप्रतिनिधि यदि काजिमाबाद से बैलोन को जा रहे मार्ग को ही पक्का करवा दें तो क्षेत्र के लोगों को बेहद राहत मिलेगी।
- कृपाशंकर शर्मा