Aligarh Nagar Nigam: चढ़ावा देंगे तो जल्द बनेगा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, नहीं तो अटक जाएगा, करना पड़ेगा इंतजार
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की अधिकतम अवधि 25 दिन निर्धारित की गई है। अलीगढ़ नगर निगम में सैकड़ों आवेदन दो महीने से लंबित हैं। आवेदक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आवेदकों को प्रमाणपत्र पाने के लिए कम से कम दो माह तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद भी यह जरूरी नहीं कि जारी प्रमाणपत्र में कोई गलती न हो।
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अलीगढ़ नगर निगम से यदि आप जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इसके लिए आपको विभागीय कार्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने होंगे। फिर भी जरूरी नहीं कि आपका प्रमाणपत्र समय से जारी हो जाए। आवेदन करने वालों का कहना है कि समय से प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अलग से शुल्क भी मांगा जाता है।
बता दें कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की अधिकतम अवधि 25 दिन निर्धारित की गई है। नगर निगम में सैकड़ों आवेदन दो महीने से लंबित हैं। आवेदक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सरकार ने प्रमाणपत्रों को बनाने में पारदर्शिता और समयबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उसकी रसीद और जरूरी दस्तावेज नगर निगम में जमा करने पड़ते हैं। इसके बाद 25 दिन में प्रमाणपत्र मिल जाना चाहिए। मगर, आवेदकों को प्रमाणपत्र पाने के लिए कम से कम दो माह तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद भी यह जरूरी नहीं कि जारी प्रमाणपत्र में कोई गलती न हो। प्रमाणपत्र में होने वाली कमियों को सुधरवाने के लिए भी आपको नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
फीस से अधिक वसूले जाने की शिकायतें
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 50 रुपये एवं मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 25 रुपये का शुल्क निर्धारित है। लोगों का कहना है कि इससे कई गुना ज्यादा रकम वसूल की जाती है। समय से प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अलग से शुल्क लेने की शिकायतें आम हैं। इसकी विभागीय अफसरों से लगातार शिकायतें भी होती रही हैं।
अब पड़ोसी बनेंगे गवाह, तब जारी होगा प्रमाणपत्र
अब पड़ोसियों से रिश्ते बिगड़ने पर देरी से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने वाले आवेदकों को परेशानियां उठानी पड़ेगी। एक साल से अधिक वक्त बीत जाने पर जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र आवेदन की जांच करने वाले अधिकारी या कर्मचारी पड़ोसियों की गवाही और उनके आधार कार्ड की छायाप्रति भी लेंगे। नये प्रारूप के तहत यह प्रमाणपत्र एसडीएम द्वारा आरसीसीएमएस पोर्टल से जारी होंगे। नगर निगम जोन कार्यालयों से आवेदक नए प्रारूप को प्राप्त कर आवेदन करेंगे । इन आवेदनों की जांच सौंपने का अधिकार भी एसडीएम को सौंपा गया है। वह जांच लेखपाल से कराएंगे या नगर निगम के कर्मचारी अथवा पुलिस से यह निर्णय एसडीएम के विवेकाधिकार पर निर्भर करेगा ।
ये हैं मामले
केस एक- गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर दो-ए निवासी सुधीर कुमार शर्मा ने एक साल पहले बन्नादेवी के एक नर्सिंग होम में जन्मी बेटी शिविका शर्मा के जन्म प्रमाणपत्र के लिए 17 अक्तूबर को आवेदन किया था। एक सप्ताह पहले प्रमाणपत्र जारी भी किया तो उसमें बेटी, माता-पिता का सरनेम ही गायब है। अब प्रमाणपत्र सही कराने के जोन प्रभारी-चार से लेकर एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
केस दो- एटा बाईपास के निधिवन कॉलोनी की कृपा देवी ने पति के देहांत के बाद उनके मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। करीब ढाई महीने से वह प्रमाणपत्र पाने के लिए भटक रहीं हैं। विभागीय स्तर से कर्मचारी एवं अधिकारी कोई न कोई कमी बताकर वापस भेज देते हैं।