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वोट और कोरोना में बीती रात, कहीं बिगड़ न जाए कोई बात

Thu, 29 Apr 2021 12:43 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 12:43 AM IST
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Last night in Vote and Corona, no matter what goes wrong
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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कोरोना के खौफ के बीच आज बृहस्पतिवार को गांव की सरकार का चुनाव होने जा रहा है। जिले में टप्पल की यमुना पट्टी से लेकर सांकरा के गंगा खादर तक अबकी पंचायत चुनाव में विशेष बदलाव दिखाई दे रहा है।
मतदान के दिन से ऐन पहले यानी बुधवार रात वोटरों की रखवाली के साथ साथ कोरोना को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई, जो भी गांव में शहर से आया है, उसकी निगरानी इस डर से जारी है कि कहीं वह कोरोना की बीमारी गांव में न छोड़ जाए। इसी मंशा से लोगों ने बाहर से आए वोटरों के साथ-साथ पुलिस व पोलिंग पार्टियों के स्वागत सत्कार से भी दूरी बना रखी है।
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गांव गांव पहुंचे वोटर अपने घरों में कैद
जिले में शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां दूर दराज शहर से वोटर न आया हो। हालांकि, इन वोटरों को बुलाने का जिम्मा प्रत्याशियों ने निभाया है। उनको न्योता भेजने, वाहन, भाड़े आदि की मदद से गांव बुलाने और मतदान के बाद वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। मगर इन वोटरों के गांव पहुंचने के बाद से एक अजीब सी दूरी भी देखने को मिल रही है।
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अबकी बार उनसे पहले की तरह गांव के लोगों का मिलना जुलना कतई नहीं है। बस एक ही डर है कि हमारा गांव पहले से कोरोना से सुरक्षित है। इनके आने या मिलने जुलने से कहीं बीमारी न फैल जाए। शहर में ही बीमारी फैल रही है। ये लोग शहर से आकर गांव को संक्रमित न कर जाएं।
इस बात का अहसास गांव पहुंचे वोटरों को भी हो गया है। इसलिए उन्होंने खुद को घरों में कैद कर लिया है। प्रत्याशियों के स्तर से यह व्यवस्था की जा रही है कि बृहस्पतिवार को उन लोगों की अलग लाइन लगवाकर मतदान करा दिया जाए।
वोटों की निगरानी में दौड़ीं बाइकें
प्रत्याशियों ने युवाओं की टोलियां लगा दी गई हैं। ये टोलियां बाइक पर घूमकर चारों ओर निगरानी/रखवाली कर रही हैं। यह देखा जा रहा है कि किसका दरवाजा देर रात तक खुला हुआ है। किस बिरादरी के व्यक्ति के घर किस बिरादरी के ठेकेदार बैठे थे और कितनी देर तक बैठे रहे। देर रात तक किसके दरवाजे पर सन्नाटा रहा।
जहां ज्यादा देर तक बैठकी चल रही है, वहां दरवाजे पर बाइकें बार-बार हॉर्न देकर निकल जा रही हैं और एहसास करा रही है कि बैठकी को बहुत देर हो गई है। कुल मिलाकर ये निगरानी/रखवाली का तरीका है। वहीं, जो बाहरी वोटर घरों में कैद हैं, उनको भी इसी तरह निगरानी में लोग रखे हुए हैं।
दावत-बिस्तर न मिलने से पोलिंग पार्टियां परेशान
गांव के जानकार बताते हैं कि यह पहला मौका है कि इस बार खुल्लम खुल्ला दावतों का दौर नहीं चल रहा। जो कुछ है, वह गुपचुप अपने कार्यकर्ता, ठेकेदार के लिए है और वोटरों को पहले से व्यवस्था पहुंच गई है। इस खुल्लम दावत का हिस्सा पोलिंग पार्टियां भी बना करती थीं।

मगर कोरोना के खौफ में न तो इन पार्टियों को दावत मुहैया हो रही और न रात को रुकने के लिए बिस्तर। ऐसे में गांव में ड्यूटी देने आए पोलिंग पार्टी वाले अपने परिचितों को इस बात के लिए फोन करा रहे हैं कि कम से कम चाय पानी की व्यवस्था तो हो जाए।
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