{"_id":"69c1a89e58c347c8050b55cc","slug":"ladoo-gopals-attire-on-its-way-to-mathura-vrindavan-aligarh-news-c-56-1-hts1003-146241-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: मथुरा-वृंदावन जा रहीं लड्डू गोपाल की पोशाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: मथुरा-वृंदावन जा रहीं लड्डू गोपाल की पोशाक
Tue, 24 Mar 2026 02:24 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Tue, 24 Mar 2026 02:24 AM IST
विज्ञापन
गांव वाहनपुर में पोशाक बनातीं महिलाएं। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Samvad
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव वाहनपुर की महिलाएं अब अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यहां मंजू, प्रतिभा और अन्य महिलाएं मिलकर लड्डू गोपाल की आकर्षक पोशाकें तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि मथुरा और वृंदावन तक पहुंच गई है।
महिला समूह द्वारा बनाए जा रहे ये परिधान अलग-अलग डिजाइन, रंगों और अवसरों के अनुसार तैयार किए जाते हैं। त्योहारों और विशेष दिनों पर इनकी मांग और बढ़ जाती है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ इस कार्य को भी समय देकर आय का साधन बना रही हैं। महिलाओं की इस पहल से जहां उन्हें प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये तक की आय हो रही है, वहीं गांव की अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित हो रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन्हें सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण और विपणन की सुविधा मिले, तो यह कार्य और बड़े स्तर पर पहुंच सकता है। स्वत: रोजगार के उपायुक्त प्रेमनाथ यादव ने बताया कि गांव वाहनपुर की इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी मेहनत और लगन से बड़ी पहचान दिला सकता है।
विज्ञापन
शुरुआत में हमें ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे हमने डिजाइनिंग सीखी और काम बढ़ाया। अब हमारे बनाए कपड़े मथुरा-वृंदावन तक जा रहे हैं, जिससे हमें अच्छा लग रहा है।
-मंजू देवी।
पहले हम सिर्फ घर के काम तक सीमित थे, लेकिन अब खुद कमाकर परिवार की मदद कर रहे हैं। इससे आत्मविश्वास भी बढ़ा है और पहचान भी मिली है।
-प्रतिभा देवी।
विज्ञापन
महिला समूह द्वारा बनाए जा रहे ये परिधान अलग-अलग डिजाइन, रंगों और अवसरों के अनुसार तैयार किए जाते हैं। त्योहारों और विशेष दिनों पर इनकी मांग और बढ़ जाती है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ इस कार्य को भी समय देकर आय का साधन बना रही हैं। महिलाओं की इस पहल से जहां उन्हें प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये तक की आय हो रही है, वहीं गांव की अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित हो रही हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन्हें सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण और विपणन की सुविधा मिले, तो यह कार्य और बड़े स्तर पर पहुंच सकता है। स्वत: रोजगार के उपायुक्त प्रेमनाथ यादव ने बताया कि गांव वाहनपुर की इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी मेहनत और लगन से बड़ी पहचान दिला सकता है।
विज्ञापन
शुरुआत में हमें ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे हमने डिजाइनिंग सीखी और काम बढ़ाया। अब हमारे बनाए कपड़े मथुरा-वृंदावन तक जा रहे हैं, जिससे हमें अच्छा लग रहा है।
-मंजू देवी।
पहले हम सिर्फ घर के काम तक सीमित थे, लेकिन अब खुद कमाकर परिवार की मदद कर रहे हैं। इससे आत्मविश्वास भी बढ़ा है और पहचान भी मिली है।
-प्रतिभा देवी।