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अकराबाद में हटवाए जाएंगे कुवैत के झंडे वाले शिलालेख
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अकराबाद के गांव खुर्रमपुर में कुवैत के ध्वज वाले शिलालेख और हैंडपंप लगवाए जाने का मामला तूल पकड़ता देख शिलालेखों को हटवाए जाने का फैसला प्रशासनिक स्तर से लिया गया है। एसडीएम कोल आईएएस अनीता यादव की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कुवैत के ध्वज लगे शिलालेख हटवाने के आदेश दिए हैं। हालांकि जनहित में हैंडपंपों को यथावत संचालित रखने को कहा है। इधर, इस रुख के बाद बगल के गांव दुभिया में सोमवार को कुछ ग्रामीणों ने खुद ही वह शिलालेख व चबूतरे उखाड़ दिए हैं।
इधर, अकराबाद थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस स्तर पर विवेचना हो रही है। देखा जा रहा है कि हैंडपंप लगवाने वाली कुवैत की एनजीओ का नाम, उसे किसी भी प्रकार के अधिकारिक अनुमति पत्र जारी हुए या नहीं? फंड कहां से आया? किस उद्देश्य से हैंडपंप पर कुवैत का ध्वज लगाया गया? इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। पुलिस हैंडपंप लगवाने वाले भोलू उर्फ शमशेर व उसे हैंडपंप उपलब्ध कराने वाले बारिक वली निवासी धौर्रा माफी से पूछताछ के प्रयास में जुटी है।
भाजपा के छर्रा विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह ने शुक्रवार को डीएम चंद्रभूषण सिंह से मामले की शिकायत की थी। डीएम ने एसडीएम कोल अनीता यादव को जांच दी। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, मगर अंदरखाने खबर है कि रिपोर्ट में माहौल बिगड़ने का अंदेशा जताया गया है। वहीं डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि फिलहाल कुवैत के ध्वज वाले शिलालेख व चबूतरे हटवाने के निर्देश दे दिए गए हैं। इधर, गांव दुभिया में दो चबूतरे इसी तरह के शिलालेखों सहित लगे हुए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने खुद ही किसी विवाद से बचने के लिए हटवा दिया है।
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कुवैत की संस्था से बाबू एजूकेशनल सोसायटी को मिले हैंडपंप
गृह मंत्रालय के विदेश मामलों के अतिरिक्त सचिव की ओर से जारी अधिकार पत्र के अनुसार 22-4-2017 को बाबू एजूकेशनल सोसायटी जिसका पता मदीना मॉडल स्कूल, कौशर नगर, तेलांगना है। यह फॉरेन कंट्रिब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट 2010 के तहत पंजीकृत है। कुवैत की संस्था ने इस संस्था को हैंडपंप और धन उपलब्ध कराया था। इसके बाद इन हैंडपंपों को लगाया गया।
कानूनविदों की राय में कुछ गलत नहीं
कानून के जानकार अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के मुताबिक गृह मंत्रालय में एफसीआर एक्ट के तहत कोई पंजीकृत संस्था किसी दूसरे देश की पंजीकृत संस्था से एफसीआरए के नियमों के तहत चंदा या लोक हित के कार्यों के लिए पैसा लेती है तो वह नियमानुसार है। कुवैत की जिस संस्था से हैंडपंप दिए हैं, उसका ब्योरा गृह व विदेश मंत्रालय के पास होगा।
बिना सरकार की अनुमति के कोई फंडिंग नहीं कर सकता। रही बात झंडा लगाने की तो कुवैत भारत का शत्रु देश नहीं है। यहां लोकहित के काम के लिए वह देश पैसा दे रहा है तो उसका नाम लिखा जा सकता है। भारत के झंडे के बीच बनी तीलियों की संख्या को बदलना अपराध है। ऐसे तो हमारे देश के तमाम पुस्तकों व पाठ्यक्रमों में दूसरे देश के झंडे छपे होते हैं और उन्हें पढ़ाया जाता है तो वह भी अपराध की संज्ञा में आना चाहिए। जब नियमानुसार दूसरे देश के प्रतिनिधि किसी आयोजन, शिक्षण संस्था आदि में आते हैं तो वहां भी दूसरे देश का झंडा लगाना गलत नहीं है।
बिलौठी में 25 हिंदुओं के घर के सामने लगवाए हैंडपंप, झंडे
संस्था की ओर से बिलौठी गांव में 25 हिंदू परिवारों के सामने भी इन हैंडपंपों को लगवाया गया है। हिंदू परिवारों में मुनेश, सुनील, सुनीता, ज्ञान सिंह, दिरुपा, राजकुमारी, बबलू, धनदेवी, राजू, भगवती, रनवीर, दिनेश, रामकुमार, धमेंद्र, रिंकू, अशोक, पप्पू, विजेंद्र, सुमन देवी, काजल, बनी सिंह, राधे श्याम, आरती, हरी सिंह, ऋषिपाल शामिल हैं।
अकराबाद एसओ की कुर्सी पर बैठे विधायक, वीडियो वायरल
हैंडपंप प्रकरण में अकराबाद थाने पहुंचे विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह एसओ की कुर्सी पर ही बैठ गए। इसका वीडियो सोमवार को वायरल हो गया। वायरल वीडियो में विधायक एसओ की कुर्सी पर बैठकर बात करते व तहरीर लिखते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो पर एसओ उमेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विधायक अचानक थाने पर आए।
प्रोटोकॉल के तहत उनके सत्कार में वह खड़े होकर अभिवादन करने लगे। इतने में विधायक ने मेरी कुर्सी मेरे बैठने के स्थान से दूसरी तरफ खींच ली। विधायक का सम्मान करते हुए उन्होंने उन्हें रोका-टोका नहीं। इधर, इस वीडियो को लेकर विधायक की सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ाई जा रही है। कई यूजरों ने उन्हें सत्ता के नशे में चूर विधायक कहा, तो कइयों ने पुलिस की लाचारी पर हंसी उड़ाई।
सामान्यत: मैं थाने जाता नहीं हूं। चूंकि झंडे के अपमान का मामला था। हम काफी संख्या में लोग थाने गए थे। वहां कुर्सियां कम पड़ रही थीं। इसलिए खुद एसओ ने अपनी कुर्सी ऑफर करते हुए मुझे उस पर बैठने का आग्रह किया था। वह कुर्सी एसओ के बैठने के स्थान से हटाकर दूसरी जगह कर उस पर बैठा था। इसलिए इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है।
-ठा.रविंद्रपाल सिंह विधायक
हैंडपंप कुवैत से दोस्ती का पैगाम, मुकदमा वापस हो: पूर्व सांसद
पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अकराबाद क्षेत्र में लगाए गए कुवैत के हैंडपंप देश के संविधान और राष्ट्रीय एकता की धरोहर के साथ निशानी है। इस मामले में जो मुकदमा दर्ज हुआ है वह तत्काल निरस्त होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में जनहित के लिए एनजीओ संवैधानिक रूप से बने हैं। इसके तहत लाखों एनजीओ और अरब देश ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी मानव विकास के लिए बहुत कुछ करते हैं। इसी के तहत अकराबाद के गांव में कुवैत की सहायता से एनजीओ हैंडपंप लगवा रही है, जिसकी पट्टिका पर कुवैत और भारत के राष्ट्रीय चिह्न हैं जो जनहित के लिए और एक-दूसरे देश के लिए दोस्ती का पैगाम है। पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह ने कहा कि यह कहां की नैतिकता है कि किसी को मदद देने के लिए अपमानित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधायक बताएं कि दिल्ली में अन्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भारतीय राष्ट्र ध्वज के साथ क्यों लगे हुए हैं? दैवीय आपदा के समय भारत सरकार अपने झंडे के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान को मदद क्यों करती है? उन्होंने कहा कि ध्यान रहे कि इसी कुवैत में गरीबों, दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों को शिक्षा देने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को कई बार करोड़ों रुपए की धनराशि दान में दी है।
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इधर, अकराबाद थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस स्तर पर विवेचना हो रही है। देखा जा रहा है कि हैंडपंप लगवाने वाली कुवैत की एनजीओ का नाम, उसे किसी भी प्रकार के अधिकारिक अनुमति पत्र जारी हुए या नहीं? फंड कहां से आया? किस उद्देश्य से हैंडपंप पर कुवैत का ध्वज लगाया गया? इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। पुलिस हैंडपंप लगवाने वाले भोलू उर्फ शमशेर व उसे हैंडपंप उपलब्ध कराने वाले बारिक वली निवासी धौर्रा माफी से पूछताछ के प्रयास में जुटी है।
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भाजपा के छर्रा विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह ने शुक्रवार को डीएम चंद्रभूषण सिंह से मामले की शिकायत की थी। डीएम ने एसडीएम कोल अनीता यादव को जांच दी। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, मगर अंदरखाने खबर है कि रिपोर्ट में माहौल बिगड़ने का अंदेशा जताया गया है। वहीं डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि फिलहाल कुवैत के ध्वज वाले शिलालेख व चबूतरे हटवाने के निर्देश दे दिए गए हैं। इधर, गांव दुभिया में दो चबूतरे इसी तरह के शिलालेखों सहित लगे हुए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने खुद ही किसी विवाद से बचने के लिए हटवा दिया है।
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कुवैत की संस्था से बाबू एजूकेशनल सोसायटी को मिले हैंडपंप
गृह मंत्रालय के विदेश मामलों के अतिरिक्त सचिव की ओर से जारी अधिकार पत्र के अनुसार 22-4-2017 को बाबू एजूकेशनल सोसायटी जिसका पता मदीना मॉडल स्कूल, कौशर नगर, तेलांगना है। यह फॉरेन कंट्रिब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट 2010 के तहत पंजीकृत है। कुवैत की संस्था ने इस संस्था को हैंडपंप और धन उपलब्ध कराया था। इसके बाद इन हैंडपंपों को लगाया गया।
कानूनविदों की राय में कुछ गलत नहीं
कानून के जानकार अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के मुताबिक गृह मंत्रालय में एफसीआर एक्ट के तहत कोई पंजीकृत संस्था किसी दूसरे देश की पंजीकृत संस्था से एफसीआरए के नियमों के तहत चंदा या लोक हित के कार्यों के लिए पैसा लेती है तो वह नियमानुसार है। कुवैत की जिस संस्था से हैंडपंप दिए हैं, उसका ब्योरा गृह व विदेश मंत्रालय के पास होगा।
बिना सरकार की अनुमति के कोई फंडिंग नहीं कर सकता। रही बात झंडा लगाने की तो कुवैत भारत का शत्रु देश नहीं है। यहां लोकहित के काम के लिए वह देश पैसा दे रहा है तो उसका नाम लिखा जा सकता है। भारत के झंडे के बीच बनी तीलियों की संख्या को बदलना अपराध है। ऐसे तो हमारे देश के तमाम पुस्तकों व पाठ्यक्रमों में दूसरे देश के झंडे छपे होते हैं और उन्हें पढ़ाया जाता है तो वह भी अपराध की संज्ञा में आना चाहिए। जब नियमानुसार दूसरे देश के प्रतिनिधि किसी आयोजन, शिक्षण संस्था आदि में आते हैं तो वहां भी दूसरे देश का झंडा लगाना गलत नहीं है।
बिलौठी में 25 हिंदुओं के घर के सामने लगवाए हैंडपंप, झंडे
संस्था की ओर से बिलौठी गांव में 25 हिंदू परिवारों के सामने भी इन हैंडपंपों को लगवाया गया है। हिंदू परिवारों में मुनेश, सुनील, सुनीता, ज्ञान सिंह, दिरुपा, राजकुमारी, बबलू, धनदेवी, राजू, भगवती, रनवीर, दिनेश, रामकुमार, धमेंद्र, रिंकू, अशोक, पप्पू, विजेंद्र, सुमन देवी, काजल, बनी सिंह, राधे श्याम, आरती, हरी सिंह, ऋषिपाल शामिल हैं।
अकराबाद एसओ की कुर्सी पर बैठे विधायक, वीडियो वायरल
हैंडपंप प्रकरण में अकराबाद थाने पहुंचे विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह एसओ की कुर्सी पर ही बैठ गए। इसका वीडियो सोमवार को वायरल हो गया। वायरल वीडियो में विधायक एसओ की कुर्सी पर बैठकर बात करते व तहरीर लिखते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो पर एसओ उमेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विधायक अचानक थाने पर आए।
प्रोटोकॉल के तहत उनके सत्कार में वह खड़े होकर अभिवादन करने लगे। इतने में विधायक ने मेरी कुर्सी मेरे बैठने के स्थान से दूसरी तरफ खींच ली। विधायक का सम्मान करते हुए उन्होंने उन्हें रोका-टोका नहीं। इधर, इस वीडियो को लेकर विधायक की सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ाई जा रही है। कई यूजरों ने उन्हें सत्ता के नशे में चूर विधायक कहा, तो कइयों ने पुलिस की लाचारी पर हंसी उड़ाई।
सामान्यत: मैं थाने जाता नहीं हूं। चूंकि झंडे के अपमान का मामला था। हम काफी संख्या में लोग थाने गए थे। वहां कुर्सियां कम पड़ रही थीं। इसलिए खुद एसओ ने अपनी कुर्सी ऑफर करते हुए मुझे उस पर बैठने का आग्रह किया था। वह कुर्सी एसओ के बैठने के स्थान से हटाकर दूसरी जगह कर उस पर बैठा था। इसलिए इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है।
-ठा.रविंद्रपाल सिंह विधायक
हैंडपंप कुवैत से दोस्ती का पैगाम, मुकदमा वापस हो: पूर्व सांसद
पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अकराबाद क्षेत्र में लगाए गए कुवैत के हैंडपंप देश के संविधान और राष्ट्रीय एकता की धरोहर के साथ निशानी है। इस मामले में जो मुकदमा दर्ज हुआ है वह तत्काल निरस्त होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में जनहित के लिए एनजीओ संवैधानिक रूप से बने हैं। इसके तहत लाखों एनजीओ और अरब देश ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी मानव विकास के लिए बहुत कुछ करते हैं। इसी के तहत अकराबाद के गांव में कुवैत की सहायता से एनजीओ हैंडपंप लगवा रही है, जिसकी पट्टिका पर कुवैत और भारत के राष्ट्रीय चिह्न हैं जो जनहित के लिए और एक-दूसरे देश के लिए दोस्ती का पैगाम है। पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह ने कहा कि यह कहां की नैतिकता है कि किसी को मदद देने के लिए अपमानित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधायक बताएं कि दिल्ली में अन्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भारतीय राष्ट्र ध्वज के साथ क्यों लगे हुए हैं? दैवीय आपदा के समय भारत सरकार अपने झंडे के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान को मदद क्यों करती है? उन्होंने कहा कि ध्यान रहे कि इसी कुवैत में गरीबों, दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों को शिक्षा देने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को कई बार करोड़ों रुपए की धनराशि दान में दी है।