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केशव देव हरियाणा ः केवल जमानत राशि पर जीते एमएलए का चुनाव

Sun, 15 Jan 2017 02:32 AM IST
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा Updated Sun, 15 Jan 2017 02:32 AM IST
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Keshav Dev: The only security deposit Haryana MLA won election
Keshav Dev: The only security deposit Haryana MLA won election - फोटो : Amar Ujala
15 अगस्त 1947 की सुबह देश की आजादी मिलने की सुबह का सूरज देखने वाले वयोवृद्ध केशव देव हरियाणा ने राजनीति में पगडंडियों पर होने वाले जनसंपर्क का दौर देखा है। चुनाव जब सिर्फ छवि और काम पर आधारित होते थे। यही वजह थी कि वह 1962 में जवां के ब्लॉक प्रमुख का चुनाव सिर्फ एक छबड़ा पूड़ियों पर ही जीत गए थे। 
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उनका पैतृक गांव जवां ब्लॉक में साथा गांव है।  कार्यकर्ता अपने खर्चे पर साथ चलते थे। समर्थन की कीमत नहीं मांगी जाती थी। क्षेत्र के विकास की उम्मीद की जाती थी। लेकिन अब 93 वर्ष के हो चुके केशव देव हरियाणा को सब कुछ बदला नजर आता है। कहते हैं अब राजनीति एक कारोबार हो चली है। जिसमें चुनाव लड़ने से पहले खर्चे को ‘निवेश’और उसके बाद होने वाले ‘रिटर्न’ को देखा जाता है। अब तो हालत यह हो गई है कि कुछ राजनीतिक दल टिकट के लिए पैसे जमा करवाते हैं।
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आजादी के लिए संघर्ष कर रहे लोगों ने भारतीय राजनीति में इस दिन की कल्पना भी नहीं की थी। केशव देव हरियाणा कहते हैं कि उन्होंने 1967 में बरौली विधानसभा से निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए थे। उस समय साइकिल चुनाव चिह्न मिला था। न झंडा लगाया न बैनर लगाए बस लोगों से मिलना मिलाना रहता था। बाद में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। बाद में क्षेत्र में साथा चीनी मिल की स्थापना करवाई। जब इंदिरा गांधी चीनी मिल का उद्घाटन करने आईं और सभा को संबोधित कर रही थीं तब इस चीनी मिल का नाम साथा (क्षेत्र के नाम पर) करवाया। इससे पहले इसका नाम आधिकारिक रूप से हरदुआगंज चीनी मिल रखा जा रहा था। 
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मूल्यों की गिरावट ने किया राजनीति से विमुख
राजनीति में सादगी और विचारों का दौर देखने वाले केशव देव हरियाणा ने सक्रिय राजनीति से बहुत पहले ही दूरी बना ली थी। कहते हैं कि अब फैल रहे भ्रष्टाचार, लूट खसोट और मूल्यों की गिरावट देखकर राजनीति से विमुख तो हो गया हूं लेकिन सामाजिक सरोकारों के प्रति चिंता अभी भी बनी रहती है। परिवार में दो बेटे हैं। एक बेटे सत्येंद्र पूर्व ग्राम प्रधान रह चुके हैं दूसरे बेटे डॉ. संजीव हरदुआगंज में क्लीनिक चलाते हैं। 
राजनीतिक सफर
- 1960 में साथा गांव के प्रधान बने
- 1962 में जवां के ब्लॉक प्रमुख बने
- 1967 में निर्दलीय चुनाव बरौली क्षेत्र से विधानसभा से लड़ा, जीते
- 1968 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए (सीबी गुप्त और चरण सिंह पैक्ट के बाद)
- 1974 में कांग्रेस ने अतरौली विधानसभा के लिए टिकट दिया, कल्याण से हारे
-1977 में साथा चीनी मिल की स्थापना करवाई, इंदिरा गांधी ने उद्घाटन किया
-1991 में अतरौली से जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़ा, हार गए
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