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आरिफ मोहम्मद के एक आह्वान पर खाली हो गया था कैनेडी हॉल
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केरल के राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव एवं अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी पत्नी रेशमा भी एएमयू की छात्रा रह चुकी हैं। एएमयू के इतिहास के बड़े आंदोलनों में एक का नेतृत्व आरिफ मोहम्मद खान ने किया था।
आरिफ मोहम्मद खान एएमयू के विधि विभाग के छात्र रहे हैं। उनकी पत्नी रेशमा भी इसी विभाग की छात्रा रही हैं। 1972-73 में कैसर महमूद एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष एवं आरिफ मोहम्मद खान सचिव थे। अगले वर्ष यानी 1973-74 में आरिफ मोहम्मद खान एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक एवं जनसंपर्क कार्यालय के डिप्टी एमआईसी डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान ने एएमयू के इतिहास के बड़े आंदोलनों में से एक का नेतृत्व किया था।
1972 में एक एक्ट के माध्यम से एएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप खत्म कर दिया गया था। इसके विरोध में आरिफ मोहम्मद खान के नेतृत्व में जबर्दस्त आंदोलन हुआ था। डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि उस समय वह छात्र थे और आज तक वैसा आंदोलन नहीं देखा। उस समय एएमयू के ही पूर्व छात्र प्रो. नूरूल हसन शिक्षा मंत्री थे। छात्रों का मन टटोलने एवं उनकी भावनाओं को जानने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जगजीवन राम को एएमयू भेजा था। कैनेडी हॉल में बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्रों से हॉल खचाखच भरा हुआ था। आरिफ मोहम्मद खान ने अपने तकरीर में छात्रों से तुरंत कैनेडी हॉल खाली करने का आह्वान कर दिया।
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इसके पीछे उद्देश्य यह था कि जगजीवन राम जाकर इंदिरा गांधी को बताएं कि एएमयू छात्रों की भावनाएं क्या हैं और वह क्या चाहते हैं। आरिफ मोहम्मद खान के आह्वान पर छात्र बाहर निकल गए और हॉल खाली हो गया। 1981 के एक्ट के बाद आरिफ मोहम्मद खान एएमयू के कोर्ट सदस्य बने। एएमयू से शिक्षा हासिल करने के बाद आरिफ मोहम्मद खान कांग्रेस, जनता दल, बसपा एवं भाजपा सहित कई पार्र्टियों में रहे। वह विधायक, सांसद एवं महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी बनें।
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आरिफ मोहम्मद खान एएमयू के विधि विभाग के छात्र रहे हैं। उनकी पत्नी रेशमा भी इसी विभाग की छात्रा रही हैं। 1972-73 में कैसर महमूद एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष एवं आरिफ मोहम्मद खान सचिव थे। अगले वर्ष यानी 1973-74 में आरिफ मोहम्मद खान एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक एवं जनसंपर्क कार्यालय के डिप्टी एमआईसी डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान ने एएमयू के इतिहास के बड़े आंदोलनों में से एक का नेतृत्व किया था।
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1972 में एक एक्ट के माध्यम से एएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप खत्म कर दिया गया था। इसके विरोध में आरिफ मोहम्मद खान के नेतृत्व में जबर्दस्त आंदोलन हुआ था। डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि उस समय वह छात्र थे और आज तक वैसा आंदोलन नहीं देखा। उस समय एएमयू के ही पूर्व छात्र प्रो. नूरूल हसन शिक्षा मंत्री थे। छात्रों का मन टटोलने एवं उनकी भावनाओं को जानने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जगजीवन राम को एएमयू भेजा था। कैनेडी हॉल में बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्रों से हॉल खचाखच भरा हुआ था। आरिफ मोहम्मद खान ने अपने तकरीर में छात्रों से तुरंत कैनेडी हॉल खाली करने का आह्वान कर दिया।
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इसके पीछे उद्देश्य यह था कि जगजीवन राम जाकर इंदिरा गांधी को बताएं कि एएमयू छात्रों की भावनाएं क्या हैं और वह क्या चाहते हैं। आरिफ मोहम्मद खान के आह्वान पर छात्र बाहर निकल गए और हॉल खाली हो गया। 1981 के एक्ट के बाद आरिफ मोहम्मद खान एएमयू के कोर्ट सदस्य बने। एएमयू से शिक्षा हासिल करने के बाद आरिफ मोहम्मद खान कांग्रेस, जनता दल, बसपा एवं भाजपा सहित कई पार्र्टियों में रहे। वह विधायक, सांसद एवं महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी बनें।