फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Junk against mosquitoes by Neeraj's song

नीरज के गीत से मच्छरों के खिलाफ जंग

Tue, 18 Apr 2017 01:52 AM IST
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा Updated Tue, 18 Apr 2017 01:52 AM IST
विज्ञापन
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संक्रामक एवं कृमि जनित रोगों के नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जागरूकता अभियान में अलीगढ़ के प्रसिद्ध गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज के गीत को थीम गीत बनाया है।
विज्ञापन


इस 44 सेकेंड के विज्ञापन में नीरज के लिखे फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के गीत ‘ऐ भाई जरा देख के चलो’ की पैरोडी बैक ग्राउंड में बजती रहती है। इस बीच बचाव के उपाय भी बताते जाते हैं। जल्द ही यह विज्ञापन दूरदर्शन सहित सभी चैनल्स पर प्रसारित होने वाला है। 
विज्ञापन



केंद्र सरकार ने नीरज के इस गीत को इसकी लोकप्रियता और सहजता को देखकर प्रयोग करने का फैसला किया हैै। अलीगढ़ के जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि सरकार की मंशा है कि बीमारी फैलने से पहले ही बचाव कर लिया जाए। इसलिए शुरू से ही लोगों को बताया जाए कि डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया आदि कैसे फैलता है और कैसे उसका बचाव किया जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन



प्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश कुमार कहते हैं कि अलीगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि अलीगढ़ के नीरज जी का गीत भारत सरकार के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा बना है। 
इस तरह होगा पैरोडी गीत
‘ऐ भाई जरा देखो तो
टंकी ही नहीं, कूलर भी
कूलर ही नहीं, गमले भी
घर में ही नहीं, बाहर भी, ऐ भाई...
इधर देखो हर तरफ ये मच्छर
घड़े में, डिब्बे में, प्याले में, टायर में हर जगह पनपता है
प्यारे और इस हालत में बचाव ही एक रस्ता है’

राजकपूर के विशेष आग्रह पर लिखा था गीत
उस समय नीरज डीएस कालेज में शिक्षक थे। छह दिन की छुट्टी पर राजकपूर ने मुंबई बुलवाया। शुरू के चार दिन सिटिंग हुई लेकिन गीत नहीं लिखा जा सका। नीरज ने राजकपूर से कहा राज साहब फिल्म का मुख्य किरदार जोकर है। वो न ठुमरी गाएगा, न क्लासिकल, न मंझा हुआ गायक है।


जोकर तो अपने ही अंदाज में बात कहेगा जिसका एक अर्थ हास्य में होगा तो दूसरा अर्थ दार्शनिक होगा। इसके बाद नीरज ने ‘ऐ भाई गीत सुनाया’। इसे सुनकर राजकपूर झूम गए। बाद में शंकर जयकिशन ने इसी गीत मानने से इनकार करते हुए कहा धुन नहीं बन सकती।

बाद में जैसे नीरज ने गीत सुनाया था वैसे ही मन्ना डे ने गाया और वही धुन बन गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed