हम नहीं.. जनता खुद ही टिकट कटवा देती है
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अलीगढ़। बसपा के कद्दावर नेता, पूर्व कबीना मंत्री एवं वर्तमान एमएलसी ठा. जयवीर सिंह लगातार तीसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बरकरार रखने में सफल रहे। 14 जून 2006 को रामसखी कठेरिया एवं 14 जनवरी 2011 को चौ. सुधीर सिंह को अध्यक्ष बनवाने वाले ठा. जयवीर सिंह के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू 7 जनवरी 2016 को भारी बहुमत (51 वोटों में से 42 प्राप्त किए) से अध्यक्ष पद जीतने में सफल रहे। कहा जाता है कि ऐसा ठाकुर जयवीर सिंह की कूटनीति चाल, राजनीतिक समझ और जबरदस्त प्रबंधन से ही संभव हो सका। इस दौरान कई सवाल भी उठे, पर जवाब नहीं मिले। ऐसे ही उलझाने वाले सवालों के बेबाक जवाबों के साथ पेश है ठा. जयवीर सिंह से विशेष बातचीत -
सवाल : क्या सपा के दीपक चौधरी का टिकट कटवाने में पर्दे के पीछे आपकी कोई कूटनीति थी..? क्योंकि माना जा रहा था कि तेजवीर सिंह गुड्डू से सीधी टक्कर हुई तो मुकाबला तगड़ा होगा। इसीलिए आप सपा में टिकट बदलाने का पूरा प्रयास कर रहे थे। 15 दिसंबर को सीएम अखिलेश यादव के अलीगढ़ दौरे के बाद आपको सफलता मिली। जवाब : हमारा सपा की अंदरूनी गुटबाजी से कोई लेनादेना नहीं है। ये उनका निजी मामला है। जिला पंचायत सदस्यों के नतीजे आने के बाद से बसपा आधे से ज्यादा विजयी सदस्यों के समर्थन से लैस हो चुकी थी। हम नहीं कटवाते.. जनता टिकट कटवा देती है।
सवाल : जिले में चर्चा है कि सपा प्रत्याशी डा. नीतू सिंह के पति और सपा से छर्रा विधायक ठा. राकेश सिंह ने आपके ‘प्रभाव’ में आकर मन से चुनाव नहीं लड़ा। इसीलिए आपकी इतनी बड़ी जीत मिली है। कहते हैं, आपने ठा. राकेश सिंह को बसपा से विधानसभा का टिकट दिलवाने का भरोसा दिया है। जवाब : ये कोरी अफवाह है, जो बेवजह फैलाई जा रही हैं। हारने के बाद ऐसी बातें फैलाया जाना आम बात है। बसपा में टिकट देने या काटने का फैसला केवल बहन मायावती करती हैं। दूसरा कोई इसकी बात भी नहीं कर सकता। बसपा, सपा या भाजपा की तरह नहीं है, जहां तथाकथित चार पांच बड़े नेता फैसला करते हों।
सवाल :जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करोड़ों रुपये के खर्च का है। चर्चा है कि आपने भी बहुमत हांसिल करने के लिए काफी खर्च किए हैं ? जवाब : कही सुनी बातों पर ध्यान देने से अच्छा है तथ्यों पर बात की जाए। सपा के विरोध में जुटने वाले जिला पंचायत सदस्य केवल परिवर्तन चाहते थे। ये परिवर्तन केवल बसपा ही कर सकती है। बसपा धन बल से नहीं, जन बल से सत्ता पर आती रही है। आगे भी आती रहेगी।
सवाल : इतनी बड़ी जीत की पटकथा कैसे लिखी गई ? जवाब : जब जिला पंचायत सदस्यों का नतीजा आ गया तो कुछ दिनों तक रायशुमारी की गई। इस दौरान भाजपा, रालोद, कांग्रेस, लोकदल सहित गैर सपाई और निर्दलियाें ने समर्थन देने का भरोसा दिया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह का खेमा भी इसमें शामिल था। सभी सपा के गुंडाराज से परेशान हैं। ये जीत सपा शासन और उनके प्रत्याशियों के विरुद्ध जनता की नाराजगी का नतीजा है। इसीलिए सबने एक राय से उपेंद्र सिंह ‘नीटू’ को चुनाव लड़वाना तय किया। नतीजा, रिकार्ड जीत हुई।
सवाल : जिला पंचायत के चुनाव के बाद ब्लाक प्रमुख और विधानसभा चुनाव 2017 में भी बसपा का ऐसा ही प्रदर्शन जारी रहेगा ? जवाब : यकीनन..! लोग सपा शासन के दौरान अपराधों से तंग आ चुके हैं। हत्या, लूट, डकैती, छिनैती, अपहरण, दुष्कर्म, महिलाओं से छेड़खानी आम बात हो चुकी है। पुलिस अपराधियों को जेल भेजे इससे पहले ही नेताओं की सिफारिशों के फोन आने लगते हैं। बसपा के शासन में गुंडागर्दी नहीं होती। हम बहन मायावती जी के नेतृत्व में सपा सरकार को उखाड़ फेकेंगे। जनता ने बहन जी को मुख्यमंत्री बनाने की बात मन में ठान ली है, इसीलिए बौखलाए सपाई अनर्गल बातें कर रहे हैं। झूठे मुकदमों में बसपा समर्थकों को फंसाया जा रहा है। चौ. सुधीर सिंह का ताजा प्रकरण आपके सामने है।
सवाल : पहले रामसखी कठेरिया, फिर चौ. सुधीर सिंह और अब उपेंद्र सिंह नीटू। लगातार तीन जिला पंचायत अध्यक्ष आपने अपनी कुशलता से बनवाए, फिर भी ग्रामीण इलाकों का सर्वांगीर्ण विकास नहीं हो पाया। इसकी क्या वजह है..? जवाब : रामसखी कठेरिया के समय बहुत काम हुआ, तब बसपा का शासन था। चौ. सुधीर सिंह के समय में भी विकास कार्य हुए, लेकिन सपा सरकार ने सपोर्ट नहीं किया। इस कारण कुछ बड़े काम रुक गए। अब बसपा की सरकार आने वाली है। जिला पंचायत को विशेष बजट आवंटित करा कर गांव से जिले तक का विकास किया जाएगा।