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अलीगढ़ः जामताड़ा के हैकर गैंग का सदस्य दिल्ली से गिरफ्तार
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झारखंड के जामताड़ा के हैकर गैंग का एक सदस्य साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। यह गैंग फोन पे का कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों से नए एकाउंट खुलवाने के नाम पर ठगी करता है। पकड़ा गया हैकर दिल्ली में रहकर खाते ऑपरेट करता था और मजदूरों से खाते लेता था। यह गिरफ्तारी साइबर थाना पुलिस ने एटा के व्यक्ति से हुई ठगी के मुकदमे में की है। अब इस गैंग के अन्य सदस्यों के नाम उजागर हुए हैं, उनको भी रडार पर ले लिया गया है।
इंस्पेक्टर साइबर थाना सुरेंद्र सिंह के अनुसार 18 जनवरी को एटा के असरौली कोतवाली देहात के विक्रम सिंह ने इस साल का पहला मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि फोन पे के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर एकाउंट खुलवाने का झांसा देकर उनके खाते से एक लाख 6 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। इस मामले में मुकदमे के आधार पर जब जांच शुरू हुई तो पहले सामने आया कि सीतापुर के किसी पेटीएम एकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए हैं। उस एकाउंट धारक की सही लोकेशन तो स्पष्ट नहीं हुई। मगर यह जरूर साफ हुआ कि पेटीएम एकाउंट से कई अन्य वायलेट खातों में रुपये घूमते हुए झारखंड के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए हैं। जिसमें झारखंड के बारटांड जरमुंडी के गांव कुसमहा के समीन अंसारी का नाम सामने आया। साइबर थाना टीम ने समीन अंसारी को खोजना शुरू किया तो पिछले सप्ताह उसकी लोकेशन दिल्ली के बवाना क्षेत्र में मिली। बुधवार को उसे वहां से दबोच लिया गया।
पूछताछ में समीर अंसारी ने स्वीकारा कि उसके गांव में कई दर्जन युवक जामताड़ा रैकेट से जुड़े हैं और इस धंधे में हैं। उसका रिश्ते का भाई खुशरुद्दीन खुद फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर ये ठगी करता है। उसके इस धंधे में समीन पेटीएम खाते या अन्य तरह के वॉयलेट खाते मुहैया कराता है। उसने स्वीकारा कि बवाना दिल्ली के कारखानों में उसके गांव क्षेत्र के काफी संख्या में लोग मजदूरी करते हैं। वह खुद 2014 से यहां दिल्ली में है। मजदूरी में इतनी कमाई नहीं होती। उसने मजदूरी छोड़ दी और अपने रिश्ते के भाई के साथ मिलकर लोगों से पेटीएम व अन्य वॉयलेट खाते लेकर उनमें रुपये लेने और उनमें से दूसरे खातों में ट्रांसफर करके ऑपरेट करते हुए बैंक खातों में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया। 2014 से वह इसी धंधे में है। चूंकि उनके गांव में पुलिस की नजर रहती है। इसलिए वे लोग गांव में नहीं रहते। लॉकडाउन के समय में कुछ दिन गांव रुके थे। अन्यथा वे दिल्ली या हिमाचल में रहकर समय व्यतीत करते हैं। समीन के पास से पुलिस ने मोबाइल, तीन सिम, कुछ एटीएम कार्ड, आईडी कार्ड आदि बरामद किए हैं।
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अपराध का तरीका
गैंग द्वारा फोन पे कस्टमर सपोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाकर उनमें अपने मोबाइल नंबरों को कस्टमर केयर नंबर के रूप में दर्ज करना। गूगल सर्च में फर्जी फोन पे कस्टमर केयर वेबसाइट को वादी द्वारा सही मान कर दिए नंबरों पर काल करना। इन नंबरों पर काल के दौरान गैंग द्वारा फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बन कर फोन पे एकाउंट बनाने में सहायता करने का झांसा देकर वादी के मोबाइल पर क्विक सपोर्ट एप या एनी डेस्क डाउनलोड कर मोबाइल को हैक कर उसके बैंक खाते से संबंधित जानकारी लेकर खाते से रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं।
एक सप्ताह में खाते में आए थे डेढ़ लाख रुपये
समीन के बैंक खाते की जांच के दौरान पाया कि जिस दौरान पीड़ित विक्रम के खाते से रुपये कटे थे। उस दौरान समीन के खाते में डेढ़ लाख रुपये आए थे। अब समीन के पैन कार्ड की मदद से उससे जुड़े अन्य खातों का ब्योरा लिया जा रहा है। साथ में उसके रिश्ते के भाई व गैंग के अन्य सदस्यों को तलाशा जा रहा है। विक्रम के मामले में सीतापुर के जिस व्यक्ति का पेटीएम खाता प्रयोग किया गया। वह भी दिल्ली में मजदूर है। उसे भी तलाशा जा रहा है।
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इंस्पेक्टर साइबर थाना सुरेंद्र सिंह के अनुसार 18 जनवरी को एटा के असरौली कोतवाली देहात के विक्रम सिंह ने इस साल का पहला मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि फोन पे के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर एकाउंट खुलवाने का झांसा देकर उनके खाते से एक लाख 6 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। इस मामले में मुकदमे के आधार पर जब जांच शुरू हुई तो पहले सामने आया कि सीतापुर के किसी पेटीएम एकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए हैं। उस एकाउंट धारक की सही लोकेशन तो स्पष्ट नहीं हुई। मगर यह जरूर साफ हुआ कि पेटीएम एकाउंट से कई अन्य वायलेट खातों में रुपये घूमते हुए झारखंड के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए हैं। जिसमें झारखंड के बारटांड जरमुंडी के गांव कुसमहा के समीन अंसारी का नाम सामने आया। साइबर थाना टीम ने समीन अंसारी को खोजना शुरू किया तो पिछले सप्ताह उसकी लोकेशन दिल्ली के बवाना क्षेत्र में मिली। बुधवार को उसे वहां से दबोच लिया गया।
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पूछताछ में समीर अंसारी ने स्वीकारा कि उसके गांव में कई दर्जन युवक जामताड़ा रैकेट से जुड़े हैं और इस धंधे में हैं। उसका रिश्ते का भाई खुशरुद्दीन खुद फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर ये ठगी करता है। उसके इस धंधे में समीन पेटीएम खाते या अन्य तरह के वॉयलेट खाते मुहैया कराता है। उसने स्वीकारा कि बवाना दिल्ली के कारखानों में उसके गांव क्षेत्र के काफी संख्या में लोग मजदूरी करते हैं। वह खुद 2014 से यहां दिल्ली में है। मजदूरी में इतनी कमाई नहीं होती। उसने मजदूरी छोड़ दी और अपने रिश्ते के भाई के साथ मिलकर लोगों से पेटीएम व अन्य वॉयलेट खाते लेकर उनमें रुपये लेने और उनमें से दूसरे खातों में ट्रांसफर करके ऑपरेट करते हुए बैंक खातों में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया। 2014 से वह इसी धंधे में है। चूंकि उनके गांव में पुलिस की नजर रहती है। इसलिए वे लोग गांव में नहीं रहते। लॉकडाउन के समय में कुछ दिन गांव रुके थे। अन्यथा वे दिल्ली या हिमाचल में रहकर समय व्यतीत करते हैं। समीन के पास से पुलिस ने मोबाइल, तीन सिम, कुछ एटीएम कार्ड, आईडी कार्ड आदि बरामद किए हैं।
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अपराध का तरीका
गैंग द्वारा फोन पे कस्टमर सपोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाकर उनमें अपने मोबाइल नंबरों को कस्टमर केयर नंबर के रूप में दर्ज करना। गूगल सर्च में फर्जी फोन पे कस्टमर केयर वेबसाइट को वादी द्वारा सही मान कर दिए नंबरों पर काल करना। इन नंबरों पर काल के दौरान गैंग द्वारा फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बन कर फोन पे एकाउंट बनाने में सहायता करने का झांसा देकर वादी के मोबाइल पर क्विक सपोर्ट एप या एनी डेस्क डाउनलोड कर मोबाइल को हैक कर उसके बैंक खाते से संबंधित जानकारी लेकर खाते से रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं।
एक सप्ताह में खाते में आए थे डेढ़ लाख रुपये
समीन के बैंक खाते की जांच के दौरान पाया कि जिस दौरान पीड़ित विक्रम के खाते से रुपये कटे थे। उस दौरान समीन के खाते में डेढ़ लाख रुपये आए थे। अब समीन के पैन कार्ड की मदद से उससे जुड़े अन्य खातों का ब्योरा लिया जा रहा है। साथ में उसके रिश्ते के भाई व गैंग के अन्य सदस्यों को तलाशा जा रहा है। विक्रम के मामले में सीतापुर के जिस व्यक्ति का पेटीएम खाता प्रयोग किया गया। वह भी दिल्ली में मजदूर है। उसे भी तलाशा जा रहा है।