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Jammu Accident: 'मैंने कई लोगों को बचाया, लेकिन पापा को न बचा सकी...' सावित्री ने बताया घटना का दर्दनाक मंजर

Mon, 03 Jun 2024 10:07 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 03 Jun 2024 10:07 AM IST
सार

जम्मू के अखनूर में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस वीरवार को जम्मू-पुंछ हाईवे पर सड़क से फिसलकर 150 फीट गहरी खाई में खाई में गिर गई। इस भीषण हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 69 घायल हैं। बस में 90 से अधिक लोग सवार थे।

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Jammu akhnoor Accident Daughter says I saved many people but could not save Papa
सावित्री - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू बस हादसे में मौत के मंजर को अपनी आंखों से देखने वाली मृतक जयप्रकाश की पुत्री सावित्री की आंखों में यह मंजर समाया हुआ है। पिता जयप्रकाश के शव के साथ एंबुलेंस से पहुंची सावित्री अभी तक बेहाल है। इस मंजर को देख आंखें पथराई हुई हैं।
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सावित्री ने बताया कि बस के आगे अचानक एक छोटी गाड़ी आ गई थी। इसे बचाने के लिए बस चालक ने संभलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बस अनियंत्रित हो गई। मैंने बस में लगे एक पिलर को कसकर पकड़ लिया था, पैरों को सीधा कुर्सी से अड़ा दिया था। 
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बस पलट गई, लेकिन मैंने खुद को व अपने साथ दो छोटी बहनों को कसकर पकड़ रखा था। जैसे ही बस खाई में गिरी तो हम घायल हो गए थे। मैंने ही सभी घायलों और गांव के मृतकों की शिनाख्त कर पुलिस को जानकारी दी। मैं अपने पापा को इन घायलों की बीच तलाशती की, लेकिन पापा कहीं नहीं मिले तो मुझे लगा कि पापा सुरक्षित होंगे। 
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जैसे ही बस को खाई से हटाया गया तो पापा का शव दिखाई दिया। रोते हुए सावित्री बोली, मैंने कई लोगों को बचाया, लेकिन अपने पापा को नहीं बचा सकी। सावित्री ने बताया कि मैं बीमार रहती थी तो पापा ने कहा था कि दर्शन कराकर लाता हूं, फिर तू बिल्कुल ठीक हो जाएगी। 

मकान बना रहे थे रणवीर, बोले-आकर काम पूरा करुंगा...
रणवीर सिंह राजमिस्त्री थे। फिलहाल वह गांव में पंकज के मकान को बनाने का काम कर रहे थे। पंकज ने बताया कि रणवीर बहुत अच्छे मिस्त्री थे। वह मेरा मकान बना रहे थे। वैष्णो देवी दर्शन के लिए बस जाने की बात आई तो मुझसे बोले कि मैं दर्शन कर आऊं, तब आकर मकान का कार्य पूर्ण करुंगा। रणवीर परिवार में अकेले कमाने वाले थे। इसी कार्य से उनके घर का चूल्हा जलता था।

-रेनू की चिता को बड़े बेटे मयंक ने दी मुखाग्नि ।
-जयप्रकाश को बेटे सुभाष ने दी मुखाग्नि।
-रनवीर सिंह के बेटे चेतन ने पिता को दी मुखाग्नि।
-राहुल के छोटे भाई विक्रम ने चिता को मुखाग्नि दी।
-आठ साल की प्राची को ताऊ-चाचा व गांव के लोगों ने दफनाया।
 

सबसे पहले एक कैंटर चालक बना मददगार
गांव नाया निवासी मृतक सबरजीत सिंह व सीमा देवी के घर पर मौजूद उनके बेटे ललित ने बताया कि बस के खाईं में गिरने के तत्काल बाद अचानक एक कैंटर वाला आ गया था। उसने अपनी गाड़ी से रस्सा नीचे डालकर यात्रियों को खाईं से ऊपर लाने में मदद की। इसी बीच निकल रहे लोकल वाहन चालकों ने प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन की ओर से राहत-बचाव कार्य शुरू हुआ। घायलों को मौके से सीधे अस्पताल भेजा गया।
 

ललित के अनुसार जब बस खाईं में गिरने लगी तो वह बस से कूद पड़े और पेड़ का सहारा लेकर संभले। इस दौरान उन्होंने अपने भांजे जतिन पुत्र शमशेर सिंह निवासी अलालपुर सोनीपत हरियाणा को बस से नीचे खींचा, जिसकी रीढ़ की हड़्डी में चोट आ गई है और जम्मू में उपचार चल रहा है।

उन्हें अपनी मां और पिता की मौत की आशंका हो गई थी। बस में पीछे की सीट पर बैठने वाली सवारियां ज्यादा घायल हुईं तथा मौत हुई। उन्हें दिल्ली में रहने वाले अपने भाई ओम कुमार का मोबाइल नंबर ही जुबानी याद था। इस पर एक राहगीर के मोबाइल की मदद से भाई को हादसे की जानकारी दी।
 
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