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फिरोजाबाद से नहीं आया होता जमाती तो जिले में नहीं फैलता कोरोना ः डीएम
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लंबे समय तक कोरोना से मुक्त अलीगढ़ में पिछले चार दिनों में संक्रमित मरीजों की बाढ़ आ गई है। यहां वायरस कौन लाया और कैसे संक्रमण बढ़ा प्रशासन इस मामले में मंथन में जुटा है। डीएम ने जिले में कोरोना संक्रमण लाने के लिए राजस्थान में जमात करके अलीगढ़ के गोविंदनगर फैज मस्जिद में आए जमाती को संक्रमण फैलाने का जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि यदि वह यहां नहीं आया होता तो जनपद में कोरोना संक्रमण नहीं फैलता। उससे संपर्क से जो चेन बनी, उससे कोरोना संक्रमितों की संख्या 24 तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि फैज मस्जिद में रुका फिरोजाबाद का जमाती पहले कोटा राजस्थान समेत वहां के कई जिलों में जमात करके लौटा था। उसके बाद वह अलीगढ़ आ गया और उसके संपर्क से उस्मानपाड़ा निवासी कोरोना से मृत व्यक्ति और गांव अलहदादपुर का जमाती भी संक्रमित हो गया। इनके जरिये ही एक चेन बनती चली गई। उस्मानपाड़ा से संक्रमित मृतक के संपर्क में उनका बड़ा भाई और उसकी जंगलगढ़ी में क्लीनिक चलाने वाली डाक्टर बेटी व दामाद और उनके बच्चे आये। पड़ोसी भी नहीं बच सका। इधर, मृतक का इलाज करने वाली अल शिफा अस्पताल की डाक्टर एवं जेएन मेडिकल में कार्यरत उनके पति भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने न सिर्फ सब कुछ जानते हुए बुरी तरह संक्रमित उस्मानपाड़ा के व्यक्ति का अपने अस्पताल में इलाज किया, बल्कि उसे जेएन मेडिकल कालेज में भी बगैर सूचना भर्ती करा दिया।
अस्पताल प्रशासन ने भी लापरवाही की हदें पार करते हुए उसे जनरल वार्ड में डाल दिया। मरीज की जंगलगढ़ी में निजी प्रैक्टिस करने वाली बेटी के यहां जयगंज की एक गर्भवती का इलाज चला और उसके बाद जेएन मेडिकल में। यहां वह भी संक्त्रस्मित हो गई। इधर अलहदादपुर के संक्रमित के चलते उसी के गांव का व्यक्ति संक्रमित हुआ। इस तरह चेन बनती चली गई। परिणाम सभी के सामने है।
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उन्होंने बताया कि फैज मस्जिद में रुका फिरोजाबाद का जमाती पहले कोटा राजस्थान समेत वहां के कई जिलों में जमात करके लौटा था। उसके बाद वह अलीगढ़ आ गया और उसके संपर्क से उस्मानपाड़ा निवासी कोरोना से मृत व्यक्ति और गांव अलहदादपुर का जमाती भी संक्रमित हो गया। इनके जरिये ही एक चेन बनती चली गई। उस्मानपाड़ा से संक्रमित मृतक के संपर्क में उनका बड़ा भाई और उसकी जंगलगढ़ी में क्लीनिक चलाने वाली डाक्टर बेटी व दामाद और उनके बच्चे आये। पड़ोसी भी नहीं बच सका। इधर, मृतक का इलाज करने वाली अल शिफा अस्पताल की डाक्टर एवं जेएन मेडिकल में कार्यरत उनके पति भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने न सिर्फ सब कुछ जानते हुए बुरी तरह संक्रमित उस्मानपाड़ा के व्यक्ति का अपने अस्पताल में इलाज किया, बल्कि उसे जेएन मेडिकल कालेज में भी बगैर सूचना भर्ती करा दिया।
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अस्पताल प्रशासन ने भी लापरवाही की हदें पार करते हुए उसे जनरल वार्ड में डाल दिया। मरीज की जंगलगढ़ी में निजी प्रैक्टिस करने वाली बेटी के यहां जयगंज की एक गर्भवती का इलाज चला और उसके बाद जेएन मेडिकल में। यहां वह भी संक्त्रस्मित हो गई। इधर अलहदादपुर के संक्रमित के चलते उसी के गांव का व्यक्ति संक्रमित हुआ। इस तरह चेन बनती चली गई। परिणाम सभी के सामने है।
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