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योगी जी सुनो पुकार, महिलाओं को दो सम्मान से जीने का अधिकार

Sat, 14 Sep 2019 05:11 PM IST
Abhishek Singh राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़
राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Abhishek Singh Updated Sat, 14 Sep 2019 05:11 PM IST
सार

  • जलाली नगर पंचायत ओडीएफ घोषित 
  • मोदी से शौचालय बनाने की गुहार
  • लोगों ने सरकार के खिलाफ लिखे दीवारों पर नारे

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Jalali Nagar Panchayat declared ODF but reality is different
शौचालय निर्माण - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सरकारी अभिलेखों में यूं तो जलाली नगर पंचायत ओडीएफ घोषित हो चुकी है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि सैकड़ों परिवार खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। वार्ड संख्या-13 के 70 फीसदी घरों में शौचालय नहीं है।

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सरकारी अनुदान से बनने वाले लगभग दो दर्जन से अधिक शौचालय अधूरे पड़े हैं, जबकि अधिकारियों के मुताबिक वह शौचालय बना चुके हैं। इसकी एक शिकायत की जांच भी चल रही है। परेशान निवासियों ने अधूरे बने शौचालयों की दीवार पर स्लोगन लिखकर इन्हें पूर्ण कराने के लिए मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने इन दीवारों पर ‘मोदी जी आओ, लोटा हटाओ, महिलाओं को सम्मान दिलाओ’ जैसे नारे लिखे हैं।
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जलाली नगर पंचायत के वार्ड नंबर 13 में नगला खुमी, नगला बास्त अली और नगला बबूल बस्तियां हैं। पिछले साल नगला खुमी में लगभग 57 शौचालय सरकारी अनुदान से तैयार करवाए गए थे। इन शौचालयों में भारी अनियमितता बरती गई। यह शौचालय 20 हजार रुपये की अनुदान राशि वाले हैं। क्लैंप के सहारे खड़े किए गए इन शौचालयों के टैंक काफी निम्न स्तर के बनवाए गए। कई शौचालयों में तो दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं। बने टैंक भी चटक गए हैं। 
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ग्रामीणों ने बताया कि दबंगई के दम पर जेल जाने की धमकी देकर यह शौचालयों के नमूने खड़े करवाए गए थे। अमर उजाला ने जब इन तीनों बस्तियों का दौरा किया तो इनके निवासियों ने अपना दर्द बताया। इन लोगों ने कहा कि शिकायत तो कई बार की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।

चेयरमैन, ईओ के खिलाफ टांगा बैनर

नगर पंचायत जलाली द्वारा जगह-जगह ‘बाहर नहीं शौच को जाना, शौचालय अपना बनवाना’ के बैनर टांग रखे हैं। गुस्साए लोगों के इन बैनरों के बगल में ही योगी मोदी से शौचालय बनवाने की गुहार के साथ चेयरमैन और ईओ के खिलाफ लिखा है कि वे भविष्य में कभी गांव में न आएं।

इनके यहां साल भर से अधूरे पडे़ हैं शौचालय

राजेंद्र सिंह सिंह पुत्र बहोरी सिंह, चटरू सिंह पुत्र विद्याराम, श्री निवास पुत्र नरसिंह, देवराज सिंह पुत्र गोपी सिंह, राजेश कुमार पुत्र अमर सिंह, राजकुमार सिंह पुत्र गोपी सिंह, राजेश कुमार पुत्र अमर सिंह, रामखिलाड़ी पुत्र मान सिंह, मीरा देवी पत्नी रामबाबू सिंह, कृपाल सिंह पुत्र राम सिंह, महेंद्र सिंह पुत्र अशर्फी लाल, विजेंद्र सिंह पुत्र लालाराम, दुर्जन सिंह पुत्र लालाराम, आराम सिंह पुत्र सुम्मेर सिंह।

68 हजार के बजाय चार लाख का भुगतान

नगर पंचायत ने पिछले वर्ष वार्ड संख्या 13 में 20 हजार की लागत से रेडीमेड शौचालय का जुलाई 2018 में टेंडर निकाला था। जिसमें स्वच्छ भारत मिशन की मदद से आठ हजार रुपये प्रति शौचालय का भुगतान करना था। शेष 12 हजार का भुगतान नगर पंचायत को स्वयं की आय से करना था। लेकिन ईओ और चेयरमैन ने पिछले वर्ष नौ अगस्त को चेक संख्या 3,92,700 के द्वारा चार लाख का भुगतान कर दिया। इस संबंध में जब शिकायत हुई तो चेयरमैन ईओ ने आनन फानन में ठेकेदार से एडवांस पहुंची धनराशि को जमा कराया। वहीं मंडलायुक्त से की गई शिकायत के बाद एडीएम प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है।

नगला बबूल में किसी को नहीं मिला लाभ

नगला बबूल के निवासियों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत द्वारा यहां किसी भी व्यक्ति को कोई लाभ नहीं दिया गया है। कई बार फार्म भरकर शौचालय बनवाने के लिए आवेदन किए हैं। लेकिन आज तक एक भी शौचालय नहीं बनवाया गया है। वहीं पूरी बस्ती में 10 लोगों ने शौचालय स्वयं बनवाए हैं, बाकी सभी खेत में शौच के लिए जाते हैं।

तीनों बस्तियों में जांच करवाई जाएगी। अगर शौचालय नहीं पाए गए या अधूरे मिले तो संबंधित दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- कृष्ण लाल तिवारी, एडीएम प्रशासन।

मैने पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया है। अब कोई बयान नहीं दूंगा। बयान ही लेना है तो स्थानीय लोगों का लो। मैं घर-घर शौचालय देखने थोड़े जाता हूं- नीलाभ शल्या, अधिशासी अधिकारी। 

अब लोग खेतों में शौच करने जाएंगे तो हम रोक थोड़े ही सकते हैं। दरवाजे, टैंक गायब करने में सभासद का हाथ है। ऐसे काम वही करवा सकते हैं- रोरन सिंह, अध्यक्ष नगर पंचायत जलाली।

काम नहीं हो रहा है। लोग मुझसे शिकायत करते हैं। मैं चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी को समस्या बता चुका हूं। तीन बस्तियों के साथ भेदभाव कर कोई काम नहीं किया जा रहा है। लोग खेतों में शौच जाने को मजबूर हैं- ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ शीलू, सभासद।

लोगों के बयान


जेल भेजने की धमकी देकर शौचालय के नमूने खड़े कर दिए हैं। मजबूरन अब खेत में जाना पड़ रहा है- प्रेमा देवी, नगला खुमी।

शौचालय तो बना दिया, टैंक नहीं बनाए गए। बच्चा नहीं गिर जाएं तो गड्ढा भरवा दिया है। शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं है- भागो देवी, नगला खुमी।

पूरी बस्ती में शौचालय नहीं है। चार पांच घरों में ही शौचालय हैं जो कि खुद बनवाए गए हैं, किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही- श्री कृष्ण, बास्त अली।

सरकारी सहायता गांव में किसी को नहीं मिली है। खुद शौचालय बनवा रहे हैं, इसलिए अभी अधूरा पड़ा हुआ है- विमलेश, नगला बबूल।

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