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जेल का गेट हिलाया, कलेक्ट्रेट में गिरफ्तारी, रिहा
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:22 AM IST
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जेल का गेट हिलाया, कलेक्ट्रेट में गिरफ्तारी, रिहा
- फोटो : Rupesh
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 18 हजार रुपया मानदेय समेत अन्य मांगों को लेकर लगातार 60 दिन से कलेक्ट्रेट पर धरना व अनशन करने के बावजूद प्रशासन द्वारा मांगों पर ध्यान न देने से कार्यकर्ताओं के तेवर बुधवार को उग्र हो गए। सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट से जिला कारागार तक पैदल मार्च निकाला।
कारागार पर गेट पीटते हुए गिरफ्तारी देने पर अड़ गई। बाद में उन्हें किसी तरह समझाबुझाकर कलेक्ट्रेट बुलाया गया। यहां उन्होंने एसीएम द्वितीय के समक्ष गिरफ्तारी दी। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें तत्काल रिहा कर दिया गया।
इस मौके पर महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिला उपाध्यक्ष मृदुला सिंह ने कहा कि हम 60 दिन से धरने पर बैठे हैं, लेकिन किसी प्रशासनिक अफसर ने हमसे मिलने का प्रयास तक नहीं किया। हम 65 हजार रुपया प्रति माह वेतन पाने वाले शिक्षकों से ज्यादा काम करते हैं।
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हमें भी सरकारी कर्मचारी होने का दर्जा मिलना ही चाहिए। पुष्पा शर्मा ने कहा कि जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता है, तब तक 18 हजार रुपया प्रति माह मानदेय दिया जाए। कुसुम शर्मा ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर झुमका शर्मा, राजकुमारी, राधा तोमर, स्नेहलता, सूरजमुखी आदि समेत 250 कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी।
मर्यादाएं टूटती रही और मूकदर्शक बनी महिला पुलिस
कलेक्ट्रेट परिसर को साइलेंट जोन माना जाता है, लेकिन आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बुधवार को इसकी मर्यादाओं को तार-तार कर दिया और उन्हें रोकने को बुलाई गई महिला पुलिस गाड़ी में ही बैठी रही। हुआ यूं कि दोपहर दो बजे के करीब आंगनबाड़ी कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार पर एकत्र होने लगीं तो तत्काल सिविल लाइन थाने से उन्हें रोकने के लिए महिला पुलिस बुला ली गई, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास तो दूर गाड़ी से निकलना भी मुनासिब नहीं समझा। अकेले इंस्पेक्टर सिविल लाइन उन्हें रोकने की नाकाम कोशिश करते रहे। कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट में घुसीं और पीछे के रास्ते से जिला कारागार तक पहुंच गई। वापसी भी इसी रास्ते से हुई।
कैदी को अंदर ले जाने में करनी पड़ी मशक्कत
अलीगढ़। दोपहर तीन बजे से पौन घंटे तक कारागार के गेट पर जमी रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चलते जेल प्रशासन उस समय पसीना पसीना हो गया जब एक कैदी को लेकर वज्र वाहन से पुलिसकर्मी आए। उस कैदी को अंदर लाने के लिए पुलिस कर्मी कारागार के छोटे गेट पर बड़ी संख्या में जम गए। तब कही जाकर उसे अंदर ले जाया जा सका।
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कारागार पर गेट पीटते हुए गिरफ्तारी देने पर अड़ गई। बाद में उन्हें किसी तरह समझाबुझाकर कलेक्ट्रेट बुलाया गया। यहां उन्होंने एसीएम द्वितीय के समक्ष गिरफ्तारी दी। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें तत्काल रिहा कर दिया गया।
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इस मौके पर महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिला उपाध्यक्ष मृदुला सिंह ने कहा कि हम 60 दिन से धरने पर बैठे हैं, लेकिन किसी प्रशासनिक अफसर ने हमसे मिलने का प्रयास तक नहीं किया। हम 65 हजार रुपया प्रति माह वेतन पाने वाले शिक्षकों से ज्यादा काम करते हैं।
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हमें भी सरकारी कर्मचारी होने का दर्जा मिलना ही चाहिए। पुष्पा शर्मा ने कहा कि जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता है, तब तक 18 हजार रुपया प्रति माह मानदेय दिया जाए। कुसुम शर्मा ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर झुमका शर्मा, राजकुमारी, राधा तोमर, स्नेहलता, सूरजमुखी आदि समेत 250 कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी।
मर्यादाएं टूटती रही और मूकदर्शक बनी महिला पुलिस
कलेक्ट्रेट परिसर को साइलेंट जोन माना जाता है, लेकिन आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बुधवार को इसकी मर्यादाओं को तार-तार कर दिया और उन्हें रोकने को बुलाई गई महिला पुलिस गाड़ी में ही बैठी रही। हुआ यूं कि दोपहर दो बजे के करीब आंगनबाड़ी कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार पर एकत्र होने लगीं तो तत्काल सिविल लाइन थाने से उन्हें रोकने के लिए महिला पुलिस बुला ली गई, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास तो दूर गाड़ी से निकलना भी मुनासिब नहीं समझा। अकेले इंस्पेक्टर सिविल लाइन उन्हें रोकने की नाकाम कोशिश करते रहे। कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट में घुसीं और पीछे के रास्ते से जिला कारागार तक पहुंच गई। वापसी भी इसी रास्ते से हुई।
कैदी को अंदर ले जाने में करनी पड़ी मशक्कत
अलीगढ़। दोपहर तीन बजे से पौन घंटे तक कारागार के गेट पर जमी रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चलते जेल प्रशासन उस समय पसीना पसीना हो गया जब एक कैदी को लेकर वज्र वाहन से पुलिसकर्मी आए। उस कैदी को अंदर लाने के लिए पुलिस कर्मी कारागार के छोटे गेट पर बड़ी संख्या में जम गए। तब कही जाकर उसे अंदर ले जाया जा सका।