{"_id":"61afba96917f1949d1479b8d","slug":"ive-crore-rupees-were-lost-in-just-24-hours-city-office-news-ali280012063","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः मात्र 24 घंटे में बह गए पांच करोड़ रुपये, 800 से अधिक किसानों की आलू, सरसों व मटर की फसल बर्बाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः मात्र 24 घंटे में बह गए पांच करोड़ रुपये, 800 से अधिक किसानों की आलू, सरसों व मटर की फसल बर्बाद
Wed, 08 Dec 2021 01:18 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Dec 2021 01:18 AM IST
विज्ञापन
हाथरस नहर की पटरी कटने के बाद बंध लगाकर पानी रोकने का काम करते कर्मचारी।
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा जिले के भूरेका से निकलकर अलीगढ़, हाथरस, आगरा, एटा व फिरोजाबाद तक जाने वाली हाथरस नहर पुनर्निर्माण के बाद 24 घंटे भी नहीं चल सकी। इसकी मरम्मत के लिए आई पांच करोड़ की धनराशि पानी में बह गई। वह भी तब जब स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्रालय के पोर्टल पर इस नहर के शुरू होने पर मथुरा, हाथरस, आगरा, एटा व फिरोजाबाद तक के हजारों किसानों की सिंचाई की समस्या के समाधान का दावा किया था। 13.20 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए 18 जनवरी 2021 को शासन के विशेष सचिव मुश्ताक अहमद ने इस नहर की पुनर्स्थापना के लिए वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की थी।
करीब सात-आठ वर्षों से अपनी जर्जर अवस्था के चलते सफेद हाथी बनी 74 किमी लंबी हाथरस नहर का हाल ही में सिंचाई विभाग ने 13.20 करोड़ की धनराशि से पुनरोद्धार कराया था। इसके तहत नहर की पटरियों के निर्माण समेत अन्य काम हुए। इसके लिए जनवरी 2021 में वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद धनराशि रिलीज की गई। हाल ही में निर्माण पूर्ण होने के बाद पांच करोड़ रुपया रिलीज किया गया था। इसके बाद 4 दिसंबर से इसमें पानी छोड़ा गया था। पहले दिन 251 क्यूसेक पानी छोड़कर इसकी टेस्टिंग की गई।
इसके बाद आगरा, फिरोजाबाद आदि जिलों की डिमांड पर रविवार रात इसमें 498 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अफसरों की माने तो उसी रात किसी ने अवैध कुलाबा काटकर घटना को अंजाम दे दिया। यह बात छिपाई गई कि इसी नहर की मिट्टी काटने के मामले में इगलास थाने में लेखपाल एवं अमीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी और आधी अधूरी तैयारियों के बावजूद नहर में पानी छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
सवाल यह उठता है कि यदि अवैध कुलाबा भी काटा गया तो नहर के पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार अमीन व सींचपाल आदि कर्मचारी क्या कर रहे थे। हालांकि विभाग के एसई धर्मेंद्र सिंह फोगाट निर्माण में कमी से स्पष्ट इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया नहर कटने का कारण अवैध रूप से कुलाबा काटना है।
800 से अधिक किसानों की आलू, सरसों व मटर की फसल बर्बाद
रविवार रात करीब एक बजे मथुरा जिले के भूरेका से निकलने वाली हाथरस नहर की पटरी इगलास के समीप कटने से चार गांवों बादामपुर, गिंदौली, करथला व चिरौली की 1200 बीघा क्षेत्र की आलू, सरसों एवं मटर की फसलें बर्बाद हुई हैं। घटना का कारण किसानों द्वारा अवैध रूप से कुलाबा काटना बताया जा रहा है। फिलहाल बंध लगाकर नहर का पानी रोक दिया गया है। मामले में अज्ञात किसानों के खिलाफ इगलास थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
रविवार रात करीब एक बजे मथुरा से भूरेका से इगलास, हाथरस होते हुए आगरा, जलेसर एटा, फिरोजाबाद तक जाने वाली 74 किमी लंबी हाथरस नहर इगलास के पास कट गई थी। उस समय 840 क्यूसेक क्षमता वाली इस नहर में 498 क्यूसेक पानी चल रहा था। तहसील इगलास की टीम के सर्वे में पता चला है कि इससे इगलास के गांव बादामपुर, गिंदौली, करथला व चिरौली में 170 हेक्टेयर यानि 1200 बीघा क्षेत्र में फसलें जलमग्न हो गई। सिंचाई विभाग की टीम ने 48 घंटे तक चले प्रयासों के बाद बंध लगाकर नहर से बहता पानी रोक दिया है। इससे करीब 800 से अधिक किसानों की सरसों, आलू एवं मटर की फसल बह गई। सिंचाई खंड हाथरस के अधिशासी अभियंता बलजीत सिंह ने बताया कि नहर कटने का कारण प्रथमदृष्टया किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कुलावा काटना है। इसकी जांच की जा रही है। इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ इगलास थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तहसीलदार इगलास सौरभ यादव ने बताया कि सर्वे करा लिया गया है। इसके अनुसार 1200 बीघा क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई हैं। इसमें आलू, मटर व सरसों की फसलें प्रमुख हैं। इनकी कीमत के हिसाब से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
अंग्रेजों के जमाने में बनी थी नहर
अलीगढ़। हाथरस नहर अग्रेजों के समय सन् 1919 में बनी थी। 74 किमी लंबी यह नहर मथुरा जिले के भूरेका से आरंभ होकर अलीगढ़ के इगलास, हाथरस होती हुई आगरा के जलेसर, एटा के लोहचा होते हुए फिरोजाबाद के बरहन नहर तक जाती है। इससे हजारों बीघा फसलों की सिंचाई होती है।
हर बार अवैध कुलाबे के बहाने छिपाई जाती हैं कमियां
अलीगढ़। क्षेत्रीय किसान गुलाब सिंह व राजेंद्र ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। हर बार जब नहर व राजवाहा की घटिया गुणवत्ता की पटरियों की वजह से कटती है तो सिंचाई विभाग के पास एक ही बहाना होता है कि अवैध कुलाबा काटा गया है। हर बार अज्ञात लोगोें खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है। अगले साल फिर बजट आ जाता है और पुराना मामला छिपा लिया जाता है। सवाल यह उठता है कि नहर व राजवाहों की पटरियों की देखरेख के लिए जिम्मेदार विभागीय अमीन आदि कर्मचारी क्या करते हैं और किसने पटरी काटी इसका खुलासा क्यों नहीं हो पाता है।
विज्ञापन
करीब सात-आठ वर्षों से अपनी जर्जर अवस्था के चलते सफेद हाथी बनी 74 किमी लंबी हाथरस नहर का हाल ही में सिंचाई विभाग ने 13.20 करोड़ की धनराशि से पुनरोद्धार कराया था। इसके तहत नहर की पटरियों के निर्माण समेत अन्य काम हुए। इसके लिए जनवरी 2021 में वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद धनराशि रिलीज की गई। हाल ही में निर्माण पूर्ण होने के बाद पांच करोड़ रुपया रिलीज किया गया था। इसके बाद 4 दिसंबर से इसमें पानी छोड़ा गया था। पहले दिन 251 क्यूसेक पानी छोड़कर इसकी टेस्टिंग की गई।
विज्ञापन
इसके बाद आगरा, फिरोजाबाद आदि जिलों की डिमांड पर रविवार रात इसमें 498 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अफसरों की माने तो उसी रात किसी ने अवैध कुलाबा काटकर घटना को अंजाम दे दिया। यह बात छिपाई गई कि इसी नहर की मिट्टी काटने के मामले में इगलास थाने में लेखपाल एवं अमीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी और आधी अधूरी तैयारियों के बावजूद नहर में पानी छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
सवाल यह उठता है कि यदि अवैध कुलाबा भी काटा गया तो नहर के पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार अमीन व सींचपाल आदि कर्मचारी क्या कर रहे थे। हालांकि विभाग के एसई धर्मेंद्र सिंह फोगाट निर्माण में कमी से स्पष्ट इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया नहर कटने का कारण अवैध रूप से कुलाबा काटना है।
800 से अधिक किसानों की आलू, सरसों व मटर की फसल बर्बाद
रविवार रात करीब एक बजे मथुरा जिले के भूरेका से निकलने वाली हाथरस नहर की पटरी इगलास के समीप कटने से चार गांवों बादामपुर, गिंदौली, करथला व चिरौली की 1200 बीघा क्षेत्र की आलू, सरसों एवं मटर की फसलें बर्बाद हुई हैं। घटना का कारण किसानों द्वारा अवैध रूप से कुलाबा काटना बताया जा रहा है। फिलहाल बंध लगाकर नहर का पानी रोक दिया गया है। मामले में अज्ञात किसानों के खिलाफ इगलास थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
रविवार रात करीब एक बजे मथुरा से भूरेका से इगलास, हाथरस होते हुए आगरा, जलेसर एटा, फिरोजाबाद तक जाने वाली 74 किमी लंबी हाथरस नहर इगलास के पास कट गई थी। उस समय 840 क्यूसेक क्षमता वाली इस नहर में 498 क्यूसेक पानी चल रहा था। तहसील इगलास की टीम के सर्वे में पता चला है कि इससे इगलास के गांव बादामपुर, गिंदौली, करथला व चिरौली में 170 हेक्टेयर यानि 1200 बीघा क्षेत्र में फसलें जलमग्न हो गई। सिंचाई विभाग की टीम ने 48 घंटे तक चले प्रयासों के बाद बंध लगाकर नहर से बहता पानी रोक दिया है। इससे करीब 800 से अधिक किसानों की सरसों, आलू एवं मटर की फसल बह गई। सिंचाई खंड हाथरस के अधिशासी अभियंता बलजीत सिंह ने बताया कि नहर कटने का कारण प्रथमदृष्टया किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कुलावा काटना है। इसकी जांच की जा रही है। इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ इगलास थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तहसीलदार इगलास सौरभ यादव ने बताया कि सर्वे करा लिया गया है। इसके अनुसार 1200 बीघा क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई हैं। इसमें आलू, मटर व सरसों की फसलें प्रमुख हैं। इनकी कीमत के हिसाब से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
अंग्रेजों के जमाने में बनी थी नहर
अलीगढ़। हाथरस नहर अग्रेजों के समय सन् 1919 में बनी थी। 74 किमी लंबी यह नहर मथुरा जिले के भूरेका से आरंभ होकर अलीगढ़ के इगलास, हाथरस होती हुई आगरा के जलेसर, एटा के लोहचा होते हुए फिरोजाबाद के बरहन नहर तक जाती है। इससे हजारों बीघा फसलों की सिंचाई होती है।
हर बार अवैध कुलाबे के बहाने छिपाई जाती हैं कमियां
अलीगढ़। क्षेत्रीय किसान गुलाब सिंह व राजेंद्र ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। हर बार जब नहर व राजवाहा की घटिया गुणवत्ता की पटरियों की वजह से कटती है तो सिंचाई विभाग के पास एक ही बहाना होता है कि अवैध कुलाबा काटा गया है। हर बार अज्ञात लोगोें खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है। अगले साल फिर बजट आ जाता है और पुराना मामला छिपा लिया जाता है। सवाल यह उठता है कि नहर व राजवाहों की पटरियों की देखरेख के लिए जिम्मेदार विभागीय अमीन आदि कर्मचारी क्या करते हैं और किसने पटरी काटी इसका खुलासा क्यों नहीं हो पाता है।