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इस्लाम न्याय का धर्म, लेकिन इस्तेमाल राजनीतिक

Thu, 10 Dec 2015 01:34 AM IST
अलीगढ़
अलीगढ़ Updated Thu, 10 Dec 2015 01:34 AM IST
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Islam is a religion of justice , but its misuse for political
अलीगढ़। विदेश मामलों के विशेषज्ञ और सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भारत के पूर्व राजदूत तलमीज अहमद ने बुधवार को‘राजनीतिक इस्लाम और ग्लोबल जिहाद’ पर यूनीवर्सिटी पॉलीटेक्निक में व्याख्यान दिया।
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उन्होंने कहा कि 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद ही राजनीतिक इस्लाम की शुरूआत हुई। 1980 के दशक में अफगानिस्तान में अलकायदा के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण ग्लोबल जिहाद को बढ़ावा मिला। सऊदी अरब में वहाबी इस्लाम आगे बढ़ा जबकि मुस्लिम ब्रादरहुड का उद्देश्य राजनीतिक सुधार के साथ-साथ राजनीतिक सत्ता हासिल करना था। उन्होंने कहा कि सल्फी जिहाद ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध जिहाद को आगे बढ़ाया।
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तलमीज अहमद ने कहा कि इस्लाम मूलत: न्याय और दया का धर्म है लेकिन इसका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। अरब राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने के लिए मुस्लिम ब्रादरहुुड को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टेट को लेकर जो लोग अभियान चला रहे हैं, उनके पास संसाधनों की कमी नहीं है। इस्लामिक स्टेट ने तेल पर कब्जा कर रखा है।
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अमरीका द्वारा ईराक पर किए गए हमले पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच टकराव की जो बात अमरीका के विद्वान लिखते हैं वह पूरी तरह से निराधार है और इन जिहादियों का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है।

व्याख्यान माला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि अरब जगत की राष्ट्रीय संपत्ति कुछ परिवारों के हाथों में ही रहती है। दुनियां में मुसलिम समाज संकट से गुजर रहा है। मुसलिम महिलाओं को भी पूरी आजादी और समानता के अवसर उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शब्द जेहाद को गलत अर्थों में इस्तेमाल किया जा रहा है। हमें अशिक्षा के विरुद्ध जेहाद करना चाहिए।

जनरल शाह ने कहा कि भारतीय मुसलमान इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध है और हम सबको आतंकवादी गतिविधियों की भर्त्सना करनी चाहिए। अमेरिका में यहूदियों का ही बोलबाला है, सत्ता और प्रशासन की चाबी उन्हीं के हाथों में है क्योंकि वह पढ़े लिखे हैं और नोबेल पुरस्कार जीतने वालों में भी उनकी संख्या सबसे ज्यादा है।


डिपार्टमेंट ऑफ  वैस्ट एशियन एंड नॉर्थ अफ्रीका स्टडीज के अध्यक्ष प्रोफेसर मो. गुलरेज ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इंटरनेशनल स्टडीज संकाय के डीन प्रोफेसर नाजिम अली ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। 
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