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पढ़ने के बजाय घर वाले बच्चों को भेज रहे थे सैलून व ढाबे पर काम करने
सार
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के बजाय उनके घर वाले हेयर सैलून और ढाबा पर काम करने के लिए भेजते थे।उसके बाद वह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए।
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विस्तार
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के बजाय उनके घर वाले हेयर सैलून और ढाबा पर काम करने के लिए भेजते थे। यह जानकारी ड्राप आउट और होटल, दुकानों पर काम कर रहे 14 साल तक के बच्चों का बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वे में सामने आई है। सैलून और ढाबा संचालक कानूनी कार्रवाई के नाम पर दोनों छात्रों को विद्यालय भेजने के लिए तैयार हो गए है।
शिक्षा विभाग के लिपिक ज्ञानेंद्र गौतम और समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक ऋषि सिंह ने विकास खंड लोधा के सिंघारपुर के बाजार में होटल और दुकानों का सर्वे किया कि कहीं कोई बच्चा तो काम नहीं कर रहा है। इसी बीच हेयर सैलून और ढाबे पर एक-एक बच्चे काम करते मिल गए।
दोनों बच्चों का नाम स्कूल में दर्ज है। टीम ने ढाबा और सैलून संचालक को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि अगर बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उसके बाद वह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए।
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टीम के सदस्यों ने बताया कि दोनों बच्चों के परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक है। उन्हें भी जागरूक किया गया। माता-पिता ने बच्चों को स्कूल भेजने की हामी भर दी। उधर, स्कूल में लगातार अनुपस्थित चल रहे बच्चों पर नजर रखने के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापकों से कहा गया है।
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शिक्षा विभाग के लिपिक ज्ञानेंद्र गौतम और समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक ऋषि सिंह ने विकास खंड लोधा के सिंघारपुर के बाजार में होटल और दुकानों का सर्वे किया कि कहीं कोई बच्चा तो काम नहीं कर रहा है। इसी बीच हेयर सैलून और ढाबे पर एक-एक बच्चे काम करते मिल गए।
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दोनों बच्चों का नाम स्कूल में दर्ज है। टीम ने ढाबा और सैलून संचालक को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि अगर बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उसके बाद वह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए।
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टीम के सदस्यों ने बताया कि दोनों बच्चों के परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक है। उन्हें भी जागरूक किया गया। माता-पिता ने बच्चों को स्कूल भेजने की हामी भर दी। उधर, स्कूल में लगातार अनुपस्थित चल रहे बच्चों पर नजर रखने के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापकों से कहा गया है।