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गैंगस्टर के बेटे की हत्या में निर्दोष सैफ को भेजा गया था जेल
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महानगर के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर यासीन के 10वीं में पढ़ने वाले बेटे सेवी (16) की हत्या में हमदर्द नगर निवासी सैफ आलम नाम के जिस युवक को जेल भेजा गया था, दरअसल वह निर्दोष था। शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू स्तर से हुई जांच में उसे निर्र्दोष बताया गया है। ईओडब्ल्यू की ओर से उस समय इस मुकदमे के विवेचक रहे इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी पर सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ में मुकदमे की विवेचना भी ईओडब्ल्यू द्वारा ही की जाएगी।
वर्ष 2002/03 में दिल्ली पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी यासीन का बेटा जमालपुर रामनगर निवासी सेवी सेवी मैरिस रोड स्थित एक कान्वेंट स्कूल में दसवीं का छात्र था। स्कूल के बाद वह शाम के समय ट्यूशन पढ़ने जाता था। यह वाकया 15 सितंबर 2015 की देर शाम का है। ट्यूशन के बाद सेवी घर जाने के बजाय दोस्तों के साथ इधर-उधर घूमता रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात करीब साढ़े नौ के लगभग जब सेवी अपने कुछ दोस्तों के साथ मेडिकल रोड पर जामिया उर्दू के पास एक दुकान पर कोल्डड्रिंक पी रहा था, तभी अचानक आपस में ही कुछ विवाद हुआ और फायरिंग हो गई। इस दौरान सीने में गोली लगने से सेवी की मौत हो गई। इस प्रकरण में अगले दिन परिवार की ओर से कई नामजदों पर मुकदमा दर्ज कराया, जिनमें एक नाम आजमगढ़ निवासी सैफ का भी था।
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मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी ने शुरू की। दौरान-ए-विवेचना आमिर, हस्सान, ओसामा, जुनैद आदि की नामजदगी गलत पाते हुए उनके नाम निकाले गए। वहीं अजीम, सैफ आलम व मामून के खिलाफ 29 फरवरी 2016 में चार्जशीट दायर की गई।
इस मुकदमे में आरोप है कि इस दौरान सैफ आलम के नाम-पते आदि को लेकर बिना तस्दीक किए विवेचक ने हमदर्द नगर जमालपुर के सैफ आलम के पिता को फोन कर सैफ को थाने बुलाया और अगले दिन चालान कर जेल भेज दिया। इस दौरान कुछ मनगढ़ंत साक्ष्य भी तैयार किए गए। हालांकि सैफ आलम के पिता ने पुलिस के विवेचक से लेकर स्थानीय अधिकारियों तक को खूब दलील दी, मगर सुनवाई नहीं हुई।
बाद में सैफ के पिता जफर आलम ने उच्च स्तर पर शिकायत की, जिसकी जांच ईओडब्ल्यू को दी गई। ईओडब्ल्यू आगरा इकाई ने जांच के आधार पर सिविल लाइंस में निरीक्षक संजय कुमार यादव ने पूर्व इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी निवासी रेलवे स्टेशन रोड उन्नाव पर मुकदमा दर्ज कराया है। इसकी विवेचना भी ईओडब्ल्यू द्वारा की जाएगी। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस प्रवेश राणा ने यह मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।
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वर्ष 2002/03 में दिल्ली पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी यासीन का बेटा जमालपुर रामनगर निवासी सेवी सेवी मैरिस रोड स्थित एक कान्वेंट स्कूल में दसवीं का छात्र था। स्कूल के बाद वह शाम के समय ट्यूशन पढ़ने जाता था। यह वाकया 15 सितंबर 2015 की देर शाम का है। ट्यूशन के बाद सेवी घर जाने के बजाय दोस्तों के साथ इधर-उधर घूमता रहा।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात करीब साढ़े नौ के लगभग जब सेवी अपने कुछ दोस्तों के साथ मेडिकल रोड पर जामिया उर्दू के पास एक दुकान पर कोल्डड्रिंक पी रहा था, तभी अचानक आपस में ही कुछ विवाद हुआ और फायरिंग हो गई। इस दौरान सीने में गोली लगने से सेवी की मौत हो गई। इस प्रकरण में अगले दिन परिवार की ओर से कई नामजदों पर मुकदमा दर्ज कराया, जिनमें एक नाम आजमगढ़ निवासी सैफ का भी था।
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मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी ने शुरू की। दौरान-ए-विवेचना आमिर, हस्सान, ओसामा, जुनैद आदि की नामजदगी गलत पाते हुए उनके नाम निकाले गए। वहीं अजीम, सैफ आलम व मामून के खिलाफ 29 फरवरी 2016 में चार्जशीट दायर की गई।
इस मुकदमे में आरोप है कि इस दौरान सैफ आलम के नाम-पते आदि को लेकर बिना तस्दीक किए विवेचक ने हमदर्द नगर जमालपुर के सैफ आलम के पिता को फोन कर सैफ को थाने बुलाया और अगले दिन चालान कर जेल भेज दिया। इस दौरान कुछ मनगढ़ंत साक्ष्य भी तैयार किए गए। हालांकि सैफ आलम के पिता ने पुलिस के विवेचक से लेकर स्थानीय अधिकारियों तक को खूब दलील दी, मगर सुनवाई नहीं हुई।
बाद में सैफ के पिता जफर आलम ने उच्च स्तर पर शिकायत की, जिसकी जांच ईओडब्ल्यू को दी गई। ईओडब्ल्यू आगरा इकाई ने जांच के आधार पर सिविल लाइंस में निरीक्षक संजय कुमार यादव ने पूर्व इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी निवासी रेलवे स्टेशन रोड उन्नाव पर मुकदमा दर्ज कराया है। इसकी विवेचना भी ईओडब्ल्यू द्वारा की जाएगी। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस प्रवेश राणा ने यह मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।