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जहरीली शराब प्रकरणः शासन को गई रिपोर्ट में आबकारी विभाग जिम्मेदार..आईबी कर रही पड़ताल

Sun, 30 May 2021 02:18 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 30 May 2021 02:18 AM IST
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In the report sent to the government, Excise department is responsible..ib investigating
जहरीली शराब से मौतों के लिए जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से शासन को भेजी गई संयुक्त रिपोर्ट में आबकारी को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ठेकों से इस तरह की शराब बिक रही है, यह बिना आबकारी की मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता। इधर, शासन स्तर से भी इस सच्चाई की जानकारी के लिए आईबी की टीम यहां भेजी गई है। जो जांच पड़ताल कर सीधे लखनऊ को रिपोर्ट भेज रही है। ये टीमें घटना वाले गांवों से लेकर पोस्टमार्टम तक हर एक पहलू पर जांच कर रही है। शराब के सभी चर्चित कारोबारियों की कुंडली भी जुटाई जा रही है। इनके राजनीतिक कनेक्शन, संरक्षणदाता, अधिकारियों से संबंध पर भी जांच चल रही है।
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जिलधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने स्वीकारा है कि उनके व एसएसपी द्वारा संयुक्त रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। जिसमें इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत आख्या देते हुए बताया गया है कि किस तरह ठेकों से शराब बिक रही थी और किस तरह बिना किसी निगरानी या जांच आदि के यह सब धंधा सालों से चल रहा था। इस रैकेट के माफिया और उनके पुराने इतिहास, आबकारी अधिकारियों से सांठगांठ, राजनीतिक संरक्षण आदि के विषय में विस्तार से यह रिपोर्ट दी गई है। डीएम ने बताया कि इस रिपोर्ट पर शासन स्तर से अग्रिम निर्णय लिया जाएगा। उस निर्देश के अनुसार आगे काम किया जाएगा। इधर, आईबी की टीम ने भी यहां पहुंचकर इसी पहलू पर अपना काम शुरू कर दिया है। आधा दर्जन सदस्यों की टीम यहां पहुंची है। शनिवार को टीम के कुछ सदस्य गांवों में और कुछ पोस्टमार्टम केंद्र व अस्पतालों में मौजूद रहे।
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सख्ती शुरू , उठाए आधा दर्जन चिह्नित तस्कर
मिलावटी शराब का काम करने, काम में मदद करने, मालन बिकवाने वाले सेल्समैन सहित उनके मददगारों पर भी नजर टेढ़ी हो चुकी है। अब तक आधा दर्जन शराब कारोबारियों से पूछताछ हो चुकी है। इनको अलग अलग स्थानों पर पूछताछ के लिए बैठाया गया है। इनसे जिले में चल रहे अलग अलग रैकेटों को लेकर पूछताछ जारी है।
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यमुना पट्टी से गंगा खादर तक के तस्कर रडार पर
बेशक ताजा प्रकरण में शराब माफिया भाई अनिल चौधरी- सुधीर चौधरी और ऋषि शर्मा-मुनि शर्मा को मुख्य आरोपी माना जा रहा है। एक अन्य आरोपी विपिन यादव निवासी एटा का ठिकाना भी अलीगढ़ है। ये सभी शराब के कारोबार में वर्षों से सक्रिय हैं।
इससे अलग बात करें तो जिले में मिलावटी शराब बेचने के मामले में पूर्व में भी चर्चित रहे हैं, लेकिन जिले में शराब का ये गोरखधंधा नया नहीं है। दो दशक से यहां शराब का ऐसा ही खेल जारी है। खैर तहसील हरियाणा से आने वाली शराब का गढ़ है। अतरौली में लाहन से कच्ची शराब बनाने का काम होता है। शहर में करीब आधा दर्जन शराब तस्कर दूसरे राज्यों की अंग्रेजी में बेचते हैं। पूरे जिले में कहीं भी हरियाणा की शराब ली जा सकती है। मिलावटी देशी, दूसरे प्रांतों की देशी शराब अलीगढ़ में मिलना बहुत सहज है। यही नहीं यहां कई बार देशी शराब की फैक्टरी भी पकड़ी जा चुकी है। इन सभी ग्रुपों पर भी पुलिस की नजर है और पूरे नेक्सेस को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछले साल पकड़े गए थे 967 तस्कर
पिछले साल की पुलिस और आबकारी की संयुक्त कार्रवाई पर नजर डालें तो वर्ष 2020 में 822 छापेमारी हुई। जिसमें 967 गिरफ्तारियां कर 77532 लीटर अवैध शराब बरामद की गई। जिसकी कीमत 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार रुपये आंकी गई थी। इनमें से कई मामलों में अब तक मुकदमों में सुनवाई हो रही है।
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