फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   In 1884 more than 900 mm rainfall in Aligarh

अतीत का अलीगढ़ 16: 1884 में अलीगढ़ में हुई थी 900 मिली मीटर से ज्यादा बारिश, उठानी पड़ी थीं दुश्वारियां

Mon, 18 Dec 2023 10:05 PM IST
चमन शर्मा कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़
कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 18 Dec 2023 10:05 PM IST
सार

राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।

विज्ञापन
In 1884 more than 900 mm rainfall in Aligarh
अतीत का अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कटोरेनुमा आकृति में बसे अलीगढ़ में जलभराव आज के दौर में भी बड़ी समस्या है। हालांकि जिले में बहुत ज्यादा बारिश नहीं होती। जिले में बारिश का रिकार्ड 1844 ईस्वी से दर्ज करना शुरू किया गया। सभी छह तहसील मुख्यालयों में अंग्रेजों ने वर्षामापी यंत्र (रेन गेज) लगवाए थे।  इसके अलावा टप्पल परगना के बालनपुर में भी एक यंत्र लगाया गया था। आधी सदी के अभिलेखों के मुताबिक जिले में औसत बारिश 635 मिली मीटर सालाना थी।

विज्ञापन


अंग्रेज अफसर लिखते हैं कि बालनपुर और पड़ोस की खैर तहसील में लगाए गए वर्षामापी यंत्रों की माप में इतनी भिन्नता देखी गई जो अविश्वसनीय थी। इस रिकार्ड को खारिज कर दिया गया। 1884 में अलीगढ़ में  900 मिली मीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। इसमें जिले के शहरी इलाके के लोगों को खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था।
विज्ञापन


अतरौली तहसील में होती थी सबसे ज्यादा बारिश
जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्षा का वितरण असमान था। दर्ज किए अभिलेख से पता चलता है कि जिले के पूर्वी और मध्य हिस्से में अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा बारिश होती थी। अतरौली तहसील में सबसे ज्यादा बारिश होती थी। इसका औसत लगभग 717 मिली मीटर था। जिले के दक्षिण पश्चिम में स्थित इगलास में औसत बारिश 574 था, जबकि अलीगढ़ और सिकंदराराऊ में बारिश जिले की औसत वर्षा से ज्यादा होती थी। सिकंदराराऊ में 671 और अलीगढ़ में 670 मिली मीटर सालाना बारिश होती थी। इसके बाद हाथरस में 635  और खैर में 607 मिली मीटर सालाना बारिश होती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीन बार औसत के 33 फीसदी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई

लगभग आधी सदी की बारिश के दर्ज अभिलेखों में सिर्फ तीन साल ऐसे रहे जिनमें बारिश औसत से 33 फीसदी से ज्यादा रही। 1884 में अलीगढ़ जिले में लगभग 912 मिली मीटर बारिश हुई थी। 1887 में लगभग 891 मिली मीटर और 1879 में 861 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई थी। जहां तक तहसील का सवाल है तो सबसे ज्यादा 1885 में सिकंदराराऊ में 1140 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई थी। यहीं पर 1874 में 1120 मिली मीटर और अतरौली में 1879 में 1100 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई थी। 1890 में सिकंदराराऊ में 1010 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई थी।

कई बार सूखे जैसे हालात भी रहे
जिले में कम बारिश की वजह से कई बार सूखे जैसे हालात भी बने। 1868 के पूरे साल में जिले में सिर्फ 390 मिली मीटर बारिश हुई थी। अलीगढ़, खैर और इगलास सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके रहे। 1877 में  अकाल पड़ा था। इस साल सिर्फ 310 मिली मीटर बारिश हुई थी। इगलास सबसे ज्यादा प्रभावित था जहां सिर्फ 201 मिली मीटर बारिश हुई थी। 1880 में जिले में सालाना बारिश 341 मिलीमीटर रही। हाथरस और इगलास की अपेक्षा जिले के उत्तरी हिस्से में बारिश ज्यादा हुई थी। 1882 में जिले में 391 मिली मीटर बारिश हुई थी। इगलास में पूरे साल सिर्फ 180 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई थी। 1905 में जिले की औसत सालाना बारिश 350 मिली मीटर रही थी। सबसे कम बारिश सिकंदराराऊ में 250 मिली मीटर दर्ज की गई थी। 
जारी... 
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed