फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   'Immunity' disappearing from the plate due to inflation

महंगाई के कारण थाली से गायब हो रही ‘रोग प्रतिरोधक क्षमता’

Thu, 17 Sep 2020 02:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 02:33 AM IST
विज्ञापन
'Immunity' disappearing from the plate due to inflation
सब्जी दुकान - फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

कोरोना वायरस से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी पॉवर) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि महंगाई के कारण थाली से पौष्टिक आहार गायब होता जा रहा है। कम आय वर्ग व निर्धन परिवार के बच्चे और महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं।
सरकारी आंकड़ों में अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों की संख्या 8220 है, लेकिन सच्चाई इससे बहुत दूर है। महामारी के बाद लॉकडाउन, उद्योग-व्यापार एवं रोजगार चौपट होने से स्थिति बदतर हुई है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए विशेषज्ञ संतुलित अहार एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तरह-तरह की चीजों को खाने का सुझाव दे रहे हैं, जबकि महंगाई के चलते भोजन की थाली में हरी सब्जी, दाल, दूध, घी और दही जैसी जरूरी चीजें आमजन के लिए मुश्किल हो रही हैं।
विज्ञापन

सब्जियों का खुदरा दाम
आलू 35 से 40, प्याज 40, बैगन 40, तोरई 30, लहसन 200, लौकी 30, मूली 40, भिंडी 30, परवल 80, काशीफल 30, नींबू 100, मिर्च 100, टमाटर 60 (सभी सब्जी रुपये प्रति किलोग्राम)। अरहर, उड़द, मूंग, मसूर की दाल भी 100 रुपये से ऊपर बिक रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पौष्टिक अहार... डाइटिशियन मुमताज फातिमा का सुझाव
नाश्ता: एक अंडा, एक गिलास दूध, रोटी-ब्रेड, दलिया, पोहा आदि कुछ भी।
दोपहर का भोजन: शाकाहारी थाली में दाल, हरी सब्जी, रोटी, चावल आदि। मांसाहारी की थाली में मीट, मुर्गा या मछली के साथ अन्य चीजें।
रात्रि का भोजन: दाल, हरी सब्जी, रोटी आदि।
नोट: बीच में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मौसमी या संतरे का जूस, हर्बल टी आदि ले सकते हैं। कोरोना काल में सलाद आदि का सुझाव नहीं। सामान्य अहार का निर्धारण उम्र, वजन एवं बीमारी आदि को भी ध्यान में रखकर किया जाता है।
कुपोषित बच्चों के मामले मेरे पास आते हैं। इसका संबंध गरीबी व अशिक्षा से भी है। बहुत सारी माताएं ही कुपोषण की शिकार होती हैं। कुपोषित बच्चे एवं महिलाएं कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं।
- मुमताज फातिमा, डाइटिशियन, जेएन मेडिकल कॉलेज
पांच साल तक के बच्चों की मौत की एक बड़ी वजह कुपोषण है। कुपोषण से बच्चों का सर्वांगीण विकास रुक जाता है। बच्चा कुपोषित होगा तो संक्रमण की चपेट में आ जाएगा। कुपोषण से बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास रुक जाता है।
- डॉ. विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेषज्ञ।
कुपोषण के लक्षण...
- शरीर की वृद्धि रुकना। मांसपेशियां ढीली होना अथवा सिकुड़ना। झुर्रियां युक्त पीले रंग की त्वचा। कार्य करने पर शीघ्र थकान आना। मन में उत्साह का अभाव। चिड़चिड़ापन तथा घबराहट होना। बाल रूखे और चमक रहित होना। चेहरा कांतिहीन। आंखें धंसी हुई तथा उसके चारों ओर काला वृत्त बनना। शरीर का वजन कम होना। नींद तथा पाचन क्रिया गड़बड़ होना। हाथ-पैर पतले और पेट बढ़ा होना अथवा शीर में सूजन आना आदि,
-डॉ. विकास मेहरोत्रा से बातचीत पर आधारित।
महंगाई में रोटी-सब्जी जुटाना मुश्किल है। तीन बच्चे हैं। पति मजदूरी करते हैं लेकिन आजकल काम नहीं मिल रहा। मैं कई घरों में काम करती थी। कोरोना के कारण अधिकतर काम छूट गया। पिता की तबियत खराब रहती है। उनका इलाज भी कराना होता है।

- गुल अफशा, मल्लाह का नगला।
कोरोना काल में मध्यमवर्गीय परिवार पर करारा प्रहार हुआ है। काम-धंधे चौपट हैं। लोग बेरोजगार हो रहे हैं। सब्जी से लेकर खाने-पीने के सामान महंगे हैं। कालाबाजारी एवं मुनाफाखोरी का खेल चल रहा है। महंगाई के कारण पौष्टिक भोजन लोगों के थाली से गायब हैं।
- इंजी. आगा यूनुस, समाज सेवी।
- जनपद में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या - 6474
- जनपद में कुपोषित बच्चों की संख्या - 1746
कुल संख्या -- - 8220
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed