फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   ihad's master stroke big jolt to protest vote against Zip President

जयवीर के मास्टर स्ट्रोक से जिपं अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को बड़ा झटका

Sun, 30 Jul 2017 01:33 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Sun, 30 Jul 2017 01:33 AM IST
विज्ञापन
ihad's master stroke big jolt to protest vote against Zip President
राजनी‌ति - फोटो : demo pic
जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का झंडा फहराने वाले खेमे को भी ठा. जयवीर सिंह के मास्टर स्ट्रोक से तगड़ा झटका लगा है। मास्टर स्ट्रोक ये कि उन्हाेंने अचानक बसपा का एमएलसी पद छोड़ दिया है और उनके भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।  अचानक बदली परिस्थितियों में उनके विरोधी खेमे में शामिल भाजपा के कुछ जिपं सदस्य अब खुल कर विरोध नहीं पा रहे हैं। हां, ये जरूर कहा जा रहा है कि अब सपा, बसपा, कांग्रेस और निर्दलीयों को मिला कर अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। नीटू के खिलाफ एक जुट हुए जिपं सदस्यों ने कहा है कि वह अविश्वास प्रस्ताव के फैसले से पीछे नहीं हटेंगे। अब उनका तरीका बदल जाएगा।
विज्ञापन


गौर हो कि पहली जुलाई से ही जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने की प्रक्रिया शुरू हुई। 52 जिपं सदस्यों वाले सदन में 27 का बहुमत जरूरी है। भाजपा समर्थित राजनीतिक विरोधियों ने 29 जिपं सदस्यों के शपथ पत्र पेश कर खलबली मचा दी। इस पर पलटवार करते हुए दो दिन बाद ही नीटू ने 34 जिपं सदस्यों का समर्थन पत्र मय शपथ पत्रों के साथ पेश किया। जिला प्रशासन ने दोनों खेमों की उठापटक के बीच 29 जुलाई की तारीख अविश्वास प्रस्ताव के लिए तय कर दी। इस बीच हाईकोर्ट गए दोनों पक्षों की सुनवाई में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को उचित नहीं पाया गया। अभी विरोधी खेमा नये सिरे से अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी कर ही रहा था कि अब जयवीर सिंह के अचानक बसपा छोड़ने से पूरा गणित गड़बड़ा गया है। अगर वो भाजपा में शामिल हो गए तो कोई बड़ी बात नहीं है कि भाजपा के झंडे तले विरोध कर रहे सभी सुर खामोश हो जाएं।  
विज्ञापन


भाजपा.. बढ़ता कुनबा बढ़ती चुनौतियां
भाजपा में बड़े नेताओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। पहले से ही राजस्थान के राज्यपाल एवं पूर्व सीएम कल्याण सिंह भाजपा के शीर्ष नेताओं में शुमार हैं। इसके साथ ही तीन सांसद, सात विधायक, मेयर और कई प्रतिष्ठित नेता शामिल हैं। तीन सांसदों में सतीश गौतम अलीगढ़ से, राजेश दिवाकर हाथरस से और राजवीर सिंह राजू एटा से हैं। तीनों सांसदों के आवास अलीगढ़ में हैं। वर्तमान में अलीगढ़ के सात विधायक भाजपा से हैं। जिसमें संजीव राजा शहर विस क्षेत्र से, कोल विस क्षेत्र से अनिल पाराशर, इगलास विस क्षेत्र से राजवीर दिलेर, अतरौली विस क्षेत्र से संदीप सिंह, खैर विस क्षेत्र से अनूप प्रधान, बरौली विस क्षेत्र से ठा. दलवीर सिंह, छर्रा विस क्षेत्र से रवेंद्र पाल सिंह भाजपा विधायक हैं। मेयर शकुंतला भारती भी भाजपा से हैं। अलीगढ़ में भाजपा नेताओं की बढ़ती संख्या अंदरखाने टकराव की स्थितियों को भी जन्म दे सकती है, वो भी तब और खासतौर पर। जब परंपरागत आपसी विरोधी ही भाजपा में आ जाएं। ठा. दलवीर सिंह पहले ही भाजपाई हो चुके हैं। अब अगर ठा.जयवीर सिंह भी भाजपा में आ गए तो ये स्थितियां नये रूप में सामने आ सकती हैं। अफसरशाही और आम जनता के बीच भी ये चर्चा का विषय बन चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जारी है भाजपा में आने का सिलसिला
विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के अरुण फौजी, रालोद के दलवीर सिंह ने कमल का फूल थाम लिया था। चुनाव के बाद रालोद के पूर्व विधायक सतपाल सिंह सहित जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और दो अन्य ने रालोद छोड़ी दी। उनके भी जल्द ही भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं हैं। अब जयवीर सिंह के भाजपा में आने से अपुष्ट खबरों से पार्टी को नई ऊर्जा मिल रही है। विधानसभा चुनाव से पहले और उसके बाद से अब तक लगातार अगर किसी दल में नेताओं के आने का सिलसिला जारी है तो वह भाजपा ही है।


..तो क्या बरौली के दोनों ‘वीर’ एक ही झंडे तले आएंगे
अलीगढ़। जिले के साथ पूरे अलीगढ़ मंडल और पश्चिमी यूपी में राजनीतिक रूप से हर चुनाव में चर्चा में रहा बरौली विधानसभा क्षेत्र इस सियासी उठापटक से भौंचक है। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले ठा. जयवीर सिंह के भाजपा में शामिल होने की खबरों का उनके खेमे ने जोरदार खंडन किया। खबर देने वालों के खिलाफ मान हानि का मुकदमा तक चलाने की बात कही गई, लेकिन अब अचानक बसपा से एमएलसी पद छोड़ने वाले ठा.जयवीर सिंह ने पुरानी खबरों को हवा दे दी है। अगर ठा. जयवीर सिंह भाजपा में शामिल होते हैं तो बरौली विधानसभा क्षेत्र में दशकों से एक दूसरे से कट्टर विरोधी रहे ठा. दलवीर सिंह और ठा. जयवीर सिंह पहली बार एक ही पार्टी में आ जाएंगे। वो है भाजपा। शुरुआत ठा. दलवीर सिंह ने की, जब 8 जनवरी 2017 को वो रालोद छोड़ कर ढोल नगाड़ों के साथ भाजपा में शामिल हुए और विधानसभा चुनाव लड़ कर भाजपा के विधायक बने। इस चुनाव में उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ठा.जयवीर सिंह बसपा से चुनाव लड़े और लगातार दूसरी बार हार गए। इससे पहले जयवीर सिंह अपने धुर विरोधी दलवीर सिंह से 2012 का विस चुनाव हार चुके थे। इन दोनों वीरों की सियासत हमेशा चर्चा में रही, लेकिन अब ये चुनावी प्रतिद्वंदता की चर्चाएं नये रूप में सामने आएंगी या नहीं..? ये कहना मुश्किल है। कहने को तो बरौली से रालोद, कांग्रेस और सपा भी वहां पर सक्रिय है, लेकिन नेताओं की बात करें तो इन दोनों वीरों के अलावा कोई भी वहां लगातार चर्चा में नहीं रह पाया। फिलहाल बरौली में विपक्ष कमजोर होता दिख रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed