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अलीगढ़ : बेटा फोन उठा लेता तो बच जाती मां की जान

Mon, 14 Mar 2022 12:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2022 12:54 AM IST
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If the son had received  the phone, the mother's life would have been saved
सुनीता गुप्ता का फाइल फोटो। - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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बेटे को अब इस बात का अफसोस है। अगर वह घटना वाली शाम आरोपियों के घर पहुंचने पर मां द्वारा मिलाई गई कॉल को रिसीव कर लेता तो शायद उसकी मां बच जाती। हालांकि कुछ मिनट बाद जब उसने अपने मोबाइल में मां की मिस्ड कॉल देखी तो पलटकर दो बार कॉल की। पहली कॉल कट गई और दूसरी रिसीव नहीं हुई। इस पर उसने समझा मां पूजा कर रही होंगी और वह सीधे घर पहुंचा। तब तक मां को अधमरी हालत में छोड़कर आरोपी भाग चुके थे। इस दौरान आरोपी करीब 30 मिनट तक घर में रुके थे।
यह बात खुद आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में भी स्वीकारी कि जब वे विजेंद्र के घर पहुंचे तो मनोज ने दरवाजे पर दस्तक दी। सुनीता ने दरवाजा खोला और पूछा, कैसे आए। चूंकि वह अक्सर आता रहता था। इसलिए सुनीता को लगा कि अभी कुछ देर पहले उसने अपने पति को खाने के लिए कॉल किया है। इसलिए उन्होंने ही इसे यहां बुलाया हो। सुनीता ने मनोज को अंदर आने दिया और पीने को पानी दिया। इस बीच उसने अपने बेटे के मोबाइल पर दो बार कॉल किए। मगर फोन रिसीव नहीं हुआ। इसी बीच कैलाश ने जब उसका रस्सी से गला घोटा तो वह घबराती हुई पहले बाहर भागने लगी। मगर मौका न मिलने पर अंदर मंदिर वाले कमरे में भागी। इसी बीच आरोपी उसे चाकू व कैंची घोंप रहे थे। कमरे में पड़े महिला के मोबाइल पर कॉल आई। पहली कॉल मनोज ने काटी। फिर दूसरी आई तो उसे लगा कि कहीं बेटा आ न रहा हो। इसी हड़बड़ाहट में वे ज्यादा सलीके से घर की तलाशी न ले सके और तीस मिनट में अपना काम तमाम कर भाग गए। बेटे अनिकेत ने पुलिस के इस खुलासे पर यही कहा कि अगर वह समय से मां की कॉल उठा लेता तो शायद यह वारदात न होती।
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नहीं खोल पाए थे नकदी-जेवर वाली अलमारी
पुलिस पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे उस अलमारी को खोलने के प्रयास में लगे थे, जिसमें नकदी व जेवर रखे थे। मगर इसी बीच बेटे की कॉल आ गई। इस पर उन्हें यह डर लग गया कि वह आ गया तो पकड़े जाएंगे और उसे बिना खोले ही जो मिला उसे लेकर भाग गए।
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चाकू का टूटा मुट्ठा रास्ते में फेंका
दोनों ने स्वीकारा कि वे चाकू का टूटा हुआ मुट्ठा अपने साथ लेकर आए थे, जिसे उन्होंने रास्ते में फेंक दिया। हालांकि पुलिस ने उसे बरामद करने का प्रयास किया। मगर मिल न सका।
फिर सीसीटीवी फुटेज बने पुलिस के लिए मुखबिर
महानगर में लगे स्मार्ट कैमरे एक बार फिर सनसनीखेज वारदात के खुलासे में पुलिस के मुखबिर के रूप में काम आए हैं। इस घटना के खुलासे में जुटी पुलिस टीमें दो दिन तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। तीसरे दिन एक सीसीटीवी फुटेज में टिर्री से उतरते दो संदिग्ध कैद पाए गए। उनमें से एक अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। इसी बात पर पुलिस ने उसे संदेह के दायरे में रखा। हालांकि, परिवार का कोई सदस्य अंधेरे के सीसीटीवी फुटेज होने के कारण उसे पहचान न सका। मगर पुलिस ने उस संदेह पर काम करते हुए सीसीटीवी का पीछा किया और 400 से ज्यादा सीसीटीवी देखते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। हर सीसीटीवी में एक खास बात थी कि एक आरोपी बार-बार कैमरे से बचने का प्रयास करता दिखा और हर बार हुडी व मास्क से अपना चेहरा छिपाने का प्रयास करता दिखा।
पुलिस को सबसे पहला सीसीटीवी मिला कि वे टिर्री से उतर रहे हैं। उनमें से दोनों के चेहरे पर एन-95 मास्क लगा है। घटनास्थल पर भी एक एन-95 मास्क पड़ा मिला था। इन दोनों कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने जब आगे सीसीटीवी देखे तो कुछ नहीं मिला। मगर पीछे सीसीटीवी देखे तो दोनों कुछ देर पहले पैदल आते हुए रघुवीरपुरी, गूलर रोड और फिर मसूदाबाद बस स्टैंड के बराबर वाली गली में प्रवेश करते हुए कैद पाए गए। मतलब वे कैलाश के घर नई बस्ती से मसूदाबाद के बराबर वाली गली से रघुवीपुरी फिर गूलर रोड होते हुए नगला मसानी, वहां से टिर्री से इंदिरा नगर तक पहुंचे हैं। वापसी में वे दूसरे रास्तों से नई बस्ती लौटे हैं। जाते समय उन्होंने मसूदाबाद से ही एक स्टोर से दो मास्क भी खरीदे हैं, जिनमें से एक मौके पर पड़ा मिला।
मुखबिर ने की कैलाश की पहचान
मसूदाबाद इलाके में पुलिस के मुखबिर ने कैलाश की पहचान कर ली। इस पूरे काम में तीन दिन लगे और जब पुलिस कैलाश तक पहुंची तो पूरा भेद खुल गया। उसने पूरा वाकया बताया। बाद में दोनों की गिरफ्तारी भी हो गई। दोनों को यह भनक लगी कि मसूदाबाद इलाके में पुलिस उन्हें तलाश रही है। तभी वे गाजियाबाद भागने की तैयारी में दबोचे गए।
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वारदात के बाद पहुंचा अस्पताल, अगले दिन घर भी आया
इस घटना को अंजाम देते समय दोनों के कपड़ों पर खून के धब्बे आ गए थे। दोनों ने सबसे पहले कैलाश के घर आकर कपड़े बदले। फिर यहां से मनोज सबसे पहले आगरा रोड के उस अस्पताल पहुंचा, जहां महिला को इलाज के लिए ले जाया गया। जब उसे वहां खबर मिली कि उसकी मौत हो गई और उसने किसी के विषय में कुछ नहीं बताया तो वह संतुष्ट होकर लौट आया। फिर अगले दिन संवेदना जताने विजेंद्र के घर भी गया। इस दौरान उसने पुलिस की जांच पर भी जानकारियां जुटाईं और संतुष्ट होकर लौटकर आने के बाद फिर अपनी कंपनी के काम में लग गया था, जबकि कैलाश अपने होटल पर भी गया था।
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एसएसपी ने ठोकी पीठ, टीम को 25 हजार का इनाम
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बेहद कम समय में इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे में लगी पांचों टीमों की पीठ ठोकी है। एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत व सीओ प्रथम राघवेंद्र सिंह की अगुवाई में लगी टीम को 25 हजार के नकद इनाम की घोषणा की है। इस खुलासा व गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर देहली गेट प्रमेंद्र कुमार, एसआई अमित, प्रमोद, मुकेश चौधरी, जिला सर्विलांस प्रभार संजीव कुमार, नगर सर्विलांस प्रभारी संदीप सिंह, शोएब आलम, महेंद्रपाल, विनोद कुमार, याकूब खान, सुखवीर सिंह, सुभाष, संदीप, ज्ञानवीर, मनोज, मुरारीलाल, राजीव, अतुल, सचिन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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रिश्तेदार खुलासे पर संतुष्ट, 5100 का इनाम दिया
इस खुलासे के समय पुलिस लाइन में मौजूद परिजनों व रिश्तेदारों ने खुले मन से पुलिस टीम की सराहना की और टीम को 5100 रुपये के इनाम की भी घोषणा की।
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रिश्तेदारों ने निकाला गुस्सा, चप्पलों से आरोपियों को पीटा
बोले, जब तक आरोपियों के कैंची न घुसे, तब तक नहीं मिलेगी संतुष्टि
अमर उजाला बयूरो
अलीगढ़। पुलिस लाइन में वारदात के खुलासे की खबर पर रविवार दोपहर दोनों बेटों के अलावा, परिवार के अन्य करीबी सदस्य व रिश्तेदार काफी संख्या में पहुंच गए। दोनों आरोपियों को एक कमरे में बंद देख उनका गुस्सा सातवें आसमान पर आ गया। कुछ महिलाओं व युवकों ने आरोपियों की चप्पलों से पिटाई कर दी। इस दौरान मौजूद सीओ प्रथम राघवेंद्र सिंह व इंस्पेक्टर देहली गेट ने जैसे तैसे भीड़ को कमरे से बाहर निकाला। दोनों आरोपियों को कमरे में कैद किया।

हुआ यूं कि दोपहर दो बजे प्रेसवार्ता प्रस्तावित थी। इस खबर पर दोनों बेटों के साथ परिवार की बड़ी बहू भाजपा नेत्री कृष्णा गुप्ता, भाजपा नेता राकेश साईं सहित तमाम रिश्तेदार व परिजन वहां पहुंच गए। इस दौरान कुछ लोग पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर रहे थे। खुलासे पर टीम का आभार जता रहे थे, तभी कुछ युवाओं व महिलाओं ने कमरे में घुसकर आरोपियों की पिटाई कर दी। इससे पुलिस हक्का-बक्का रह गई। किसी तरह दोनों को बचाकर भीड़ को बाहर निकाला। यहां कृष्णा गुप्ता ने मीडिया से गुस्से में कहा कि आरोपियों ने बहुत बुरा किया है। इन्हें भी जब तक कैंची न घोंपी जाएगी, तब तक मन को संतुष्टि नहीं मिलेगी। बाद में पुलिस ने उन्हें किसी तरह वहां से विदा किया। आरोपियों को आनन-फानन मेडिकल व रिमांड के बाद जेल दाखिल किया।
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