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दुष्कर्म करता तो थाने न पहुंचता हमारा बेटा
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बेटा निर्दोष जेल भेजा गया था। 26 महीने हमने कैसे काटे हैं, इसका अंदाजा सिर्फ हमको है। अगर हमारा बेटा दोषी होता तो वह शायद पुलिस के बुलावे पर बेखौफ फरीदाबाद से चलकर यहां न पहुंचता और उसी ने यह प्रस्ताव रखा कि मैं निर्दोष हूं। अगर किसी को मेरी बात पर भरोसा नहीं तो डीएनए करा लिया जाए। इसी प्रस्ताव का परिणाम है कि आज हमारा बेटा हमारे पास है। यह दर्द बयां किया है उस पिता ने, जिसका बेटा दुष्कर्म के आरोप में 26 महीने तक जेल रहा।
गांव में छोटी मोटी प्रेक्टिस कर अपने परिवार का पालन करने वाले सज्जन सिंह के तीन बेटों में अमित मझला है। वह बताते हैं कि अमित फरीदाबाद की एक कंपनी में जॉब करता था। घटना से करीब डेढ़ साल पहले से वह इसलिए छुट्टी लेकर गांव नहीं आता था कि उसे प्रमोशन मिलने वाला था। अगर ज्यादा छुट्टी लेगा तो प्रमोशन में दिक्कत आएगी।
हां इस बार सिर्फ दो बार एक बार अपने भाई की शादी और एक बार एक दिन के लिए और आया था। इसके बाद 22 फरवरी को जब उनके गांव की बच्ची ने गर्भवती होने पर अमित पर यह आरोप मढ़ा तो तत्कालीन एसओ ने मुझे फोन कर थाने बुलाया। कहा कि आपका बेटा कहां है, उसे बुलाओ, उस पर दुष्कर्म का आरोप लग रहा है, कुछ पूछताछ करनी है। उनसे यह दलील दी गई कि यह आरोप गलत है।
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तो एसओ ने भरोसा दिलाया कि हम कुछ गलत नहीं होने देंगे। इस पर अगले ही दिन अमित फरीदाबाद से सीधे थाना बरला पहुंचा। पुलिस ने वहीं उसे दुष्कर्म में गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। इसके बाद हमने पैरोकारी करते हुए अपने अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय के जरिये न्यायालय में उसके नौकरी संबंधी साक्ष्य आदि पेश किए। बेटे की ओर से डीएनए कराने का प्रस्ताव अनुरोध न्यायालय में दिया गया। तब जाकर राहत मिली है।
साझेदारी विवाद में पैदा हुई रंजिश
सज्जन सिंह बताते हैं कि उन्होंने किशोरी के पिता के साथ खेत साझेदारी पर किया था। जिसमें कुछ विवाद हुआ था। एक दिन विवाद में मारपीट हो गई थी। तभी से यह परिवार रंजिश मानता था और उसी रंजिश में यह आरोप मढ़ा गया।
पूरा गांव जानता है असली आरोपी कौन है
सज्जन सिंह उस व्यक्ति का नाम नहीं लेते, मगर खुलकर कहते हैं कि पूरा गांव इस बात को जानता है कि इस घटना का असल आरोपी कौन है। वह घटना उजागर होने वाली रात ही गांव से गायब हो गया था। खुद बेटी के पिता ने गांव में कई जगहों पर उसका नाम लिया। मगर उसके खिलाफ पुलिस में न तो पिता ने शिकायत दी और न बेटी ने कुछ कहा। डेढ़ साल तक वह व्यक्ति गांव में नहीं आया। जब उसके पिता की मौत हुई तो वह अचानक गांव में आ गया और अब भी गांव में ही रहता है। सज्जन की मानें तो गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर इस परिवार ने उसे छोड़कर हमारे बेटे को फंसाया।
बमुश्किल डीएनए हुआ, पुलिस रही परेशान
अमित के पिता की मानें तो न्यायालय ने कई बार डीएनए सैंपलिंग के लिए किशोरी, उसकी बच्ची व हमारे बेटे को तलब किया। मगर कभी अस्पताल बेटी नहीं पहुंचती थी तो कभी कोई बहाना हो जाता था। बाद में न्यायालय ने पुलिस को सख्त आदेश दिए। तब जाकर डीएनए सैंपल हुआ था।
7 अप्रैल को करेंगे बरी करने की अपील
सज्जन सिंह ने बताया कि उनकी उनके अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय से वार्ता हो गई है। बेटा अभी रिश्तेदारी में भेज दिया है। 7 अप्रैल को न्यायालय में तारीख नियत है। उसी दिन बेटे को बरी करने संबंधी अपील दायर की जाएगी।
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गांव में छोटी मोटी प्रेक्टिस कर अपने परिवार का पालन करने वाले सज्जन सिंह के तीन बेटों में अमित मझला है। वह बताते हैं कि अमित फरीदाबाद की एक कंपनी में जॉब करता था। घटना से करीब डेढ़ साल पहले से वह इसलिए छुट्टी लेकर गांव नहीं आता था कि उसे प्रमोशन मिलने वाला था। अगर ज्यादा छुट्टी लेगा तो प्रमोशन में दिक्कत आएगी।
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हां इस बार सिर्फ दो बार एक बार अपने भाई की शादी और एक बार एक दिन के लिए और आया था। इसके बाद 22 फरवरी को जब उनके गांव की बच्ची ने गर्भवती होने पर अमित पर यह आरोप मढ़ा तो तत्कालीन एसओ ने मुझे फोन कर थाने बुलाया। कहा कि आपका बेटा कहां है, उसे बुलाओ, उस पर दुष्कर्म का आरोप लग रहा है, कुछ पूछताछ करनी है। उनसे यह दलील दी गई कि यह आरोप गलत है।
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तो एसओ ने भरोसा दिलाया कि हम कुछ गलत नहीं होने देंगे। इस पर अगले ही दिन अमित फरीदाबाद से सीधे थाना बरला पहुंचा। पुलिस ने वहीं उसे दुष्कर्म में गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। इसके बाद हमने पैरोकारी करते हुए अपने अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय के जरिये न्यायालय में उसके नौकरी संबंधी साक्ष्य आदि पेश किए। बेटे की ओर से डीएनए कराने का प्रस्ताव अनुरोध न्यायालय में दिया गया। तब जाकर राहत मिली है।
साझेदारी विवाद में पैदा हुई रंजिश
सज्जन सिंह बताते हैं कि उन्होंने किशोरी के पिता के साथ खेत साझेदारी पर किया था। जिसमें कुछ विवाद हुआ था। एक दिन विवाद में मारपीट हो गई थी। तभी से यह परिवार रंजिश मानता था और उसी रंजिश में यह आरोप मढ़ा गया।
पूरा गांव जानता है असली आरोपी कौन है
सज्जन सिंह उस व्यक्ति का नाम नहीं लेते, मगर खुलकर कहते हैं कि पूरा गांव इस बात को जानता है कि इस घटना का असल आरोपी कौन है। वह घटना उजागर होने वाली रात ही गांव से गायब हो गया था। खुद बेटी के पिता ने गांव में कई जगहों पर उसका नाम लिया। मगर उसके खिलाफ पुलिस में न तो पिता ने शिकायत दी और न बेटी ने कुछ कहा। डेढ़ साल तक वह व्यक्ति गांव में नहीं आया। जब उसके पिता की मौत हुई तो वह अचानक गांव में आ गया और अब भी गांव में ही रहता है। सज्जन की मानें तो गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर इस परिवार ने उसे छोड़कर हमारे बेटे को फंसाया।
बमुश्किल डीएनए हुआ, पुलिस रही परेशान
अमित के पिता की मानें तो न्यायालय ने कई बार डीएनए सैंपलिंग के लिए किशोरी, उसकी बच्ची व हमारे बेटे को तलब किया। मगर कभी अस्पताल बेटी नहीं पहुंचती थी तो कभी कोई बहाना हो जाता था। बाद में न्यायालय ने पुलिस को सख्त आदेश दिए। तब जाकर डीएनए सैंपल हुआ था।
7 अप्रैल को करेंगे बरी करने की अपील
सज्जन सिंह ने बताया कि उनकी उनके अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय से वार्ता हो गई है। बेटा अभी रिश्तेदारी में भेज दिया है। 7 अप्रैल को न्यायालय में तारीख नियत है। उसी दिन बेटे को बरी करने संबंधी अपील दायर की जाएगी।