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मैंने तुम्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा है...
आशीष निगम
Updated Sun, 14 May 2017 01:55 AM IST
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आज मदर्स डे मनाया जाएगा। बच्चे अपनी मां को कोई न कोई तोहफा देंगे और उसकी ममता का सम्मान करेंगे। अलीगढ़ में औसतन हर रोज 125 महिलाएं मां बनने का गौरव हासिल करती हैं। लेकिन आपको ये जानकार हैरत होगी कि टेस्ट ट्यूब बेबी में सफल होने के बाद अब अलीगढ़ में सरोगेसी (किराये की कोख) भी हो रही है।
शहर में सरोगेसी के जरिए 22 माताओं की गोद भरी है। टेस्ट ट्यूब बेबी के जरिए 2000 महिलाओं को माता बनने का सुख मिला है। जीवन हास्पिटल सहित कुछ दूसरे अस्पतालों में ये सुविधा मिल रही हैं। जिसके लिए दिल्ली की कुछ एजेंसियां करार करने के बाद काम करती हैं। अलीगढ़ में इसका खर्च 11 लाख रुपये तक आता है जबकि दिल्ली, बंगलुरू और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ये खर्च 13 लाख रुपये तक है। ऐसे में अलीगढ़ से परिचित दंपति यहीं पर इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
डॉ. जयंत शर्मा और डॉ. दिव्या चौधरी ने बताया कि अलीगढ़ में अब दो तीन हॉस्पिटल ये सुविधा देने लगे हैं, जबकि इसकी शुरुआत पूरे मंडल में सबसे पहले उन्होंने ही की थी। अलीगढ़ का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी लगभग 7 साल का जबकि सरोगेसी से हुए बच्चे की उम्र लगभग 4 साल तक हो रही है। गौर हो कि जिन घरों के आंगन में ये बच्चे खेल रहे हैं उनको देख कर मां-बाप का दिल तो खुशी से झूम उठता है, लेकिन मजबूरी में पैसों की खातिर अपनी कोख में खून के एक एक कतरे से बच्चे को पालने वाली मां पूरी जिंदगी न तो उसको देख पाएगी..! न दुलार कर पाएगी..! हां, उसके ममता भरे हृदय से एक कसक जरूर उठती है.. मैंने तुम्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा है..।
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सरोगेसी
जब महिला अपने गर्भाशय में बच्चे को पालने में पूरी तरह से असमर्थ होती है तो किसी दूसरी ऐसी महिला की जरूरत होती है जो बच्चे को अपनी कोख में पाल सके। इसी महिला को सरोगेट मदर (किराये की कोख देने वाली मां) कहते हैं। टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रि या होने के बाद ही निषेचित अंडे को सरोगेट मदर के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। फिर यही मां पूरे नौ महीने तक बच्चे को गर्भ में पालती है। इस प्रक्रिया को सरोगेसी कहते हैं। हास्पिटल सरोगेसी कराने के लिए एजेंसियों के माध्यम से पूरे नौ महीने का कानूनी करार करते हैं। सरोगेट मदर इन्हीं एजेंसियाें के माध्यम से मिलती हैं, जिनकी पहचान पूरी जिंदगी गोपनीय रहती है। इस पूरी प्रक्रिया का अलीगढ़ में खर्च 11 लाख रुपये तक आता है।
टेस्ट ट्यूब बेबी
जब महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु के निषेचन की प्रक्रिया गर्भाशय में ठीक से नहीं हो पाती है तो इस निषेचन प्रक्रिया को एडवांस मशीनों की सहायता से लैब में पूरा किया जाता है। इस प्रक्रिया का 15 दिवसीय पहला चरण पूरा होने के बाद उसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर देते हैं। क्योंकि अंडाणु और शुक्राणु के मिलने की प्रक्रिया एक टेस्ट ट्यूब से शुरू होती है इसलिए ऐसे बच्चों को टेस्ट ट्यूब बेबी कहते हैं। इसका खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये है।
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शहर में सरोगेसी के जरिए 22 माताओं की गोद भरी है। टेस्ट ट्यूब बेबी के जरिए 2000 महिलाओं को माता बनने का सुख मिला है। जीवन हास्पिटल सहित कुछ दूसरे अस्पतालों में ये सुविधा मिल रही हैं। जिसके लिए दिल्ली की कुछ एजेंसियां करार करने के बाद काम करती हैं। अलीगढ़ में इसका खर्च 11 लाख रुपये तक आता है जबकि दिल्ली, बंगलुरू और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ये खर्च 13 लाख रुपये तक है। ऐसे में अलीगढ़ से परिचित दंपति यहीं पर इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
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डॉ. जयंत शर्मा और डॉ. दिव्या चौधरी ने बताया कि अलीगढ़ में अब दो तीन हॉस्पिटल ये सुविधा देने लगे हैं, जबकि इसकी शुरुआत पूरे मंडल में सबसे पहले उन्होंने ही की थी। अलीगढ़ का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी लगभग 7 साल का जबकि सरोगेसी से हुए बच्चे की उम्र लगभग 4 साल तक हो रही है। गौर हो कि जिन घरों के आंगन में ये बच्चे खेल रहे हैं उनको देख कर मां-बाप का दिल तो खुशी से झूम उठता है, लेकिन मजबूरी में पैसों की खातिर अपनी कोख में खून के एक एक कतरे से बच्चे को पालने वाली मां पूरी जिंदगी न तो उसको देख पाएगी..! न दुलार कर पाएगी..! हां, उसके ममता भरे हृदय से एक कसक जरूर उठती है.. मैंने तुम्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा है..।
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सरोगेसी
जब महिला अपने गर्भाशय में बच्चे को पालने में पूरी तरह से असमर्थ होती है तो किसी दूसरी ऐसी महिला की जरूरत होती है जो बच्चे को अपनी कोख में पाल सके। इसी महिला को सरोगेट मदर (किराये की कोख देने वाली मां) कहते हैं। टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रि या होने के बाद ही निषेचित अंडे को सरोगेट मदर के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। फिर यही मां पूरे नौ महीने तक बच्चे को गर्भ में पालती है। इस प्रक्रिया को सरोगेसी कहते हैं। हास्पिटल सरोगेसी कराने के लिए एजेंसियों के माध्यम से पूरे नौ महीने का कानूनी करार करते हैं। सरोगेट मदर इन्हीं एजेंसियाें के माध्यम से मिलती हैं, जिनकी पहचान पूरी जिंदगी गोपनीय रहती है। इस पूरी प्रक्रिया का अलीगढ़ में खर्च 11 लाख रुपये तक आता है।
टेस्ट ट्यूब बेबी
जब महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु के निषेचन की प्रक्रिया गर्भाशय में ठीक से नहीं हो पाती है तो इस निषेचन प्रक्रिया को एडवांस मशीनों की सहायता से लैब में पूरा किया जाता है। इस प्रक्रिया का 15 दिवसीय पहला चरण पूरा होने के बाद उसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर देते हैं। क्योंकि अंडाणु और शुक्राणु के मिलने की प्रक्रिया एक टेस्ट ट्यूब से शुरू होती है इसलिए ऐसे बच्चों को टेस्ट ट्यूब बेबी कहते हैं। इसका खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये है।