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अलीगढ़ः दहेज हत्या में पति को 10 साल कैद की सजा
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मिशन शक्ति अभियान के तहत सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग के न्यायालय से दहेज हत्या के आरोपी पति को दस साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई है। खास बात है कि इस मुकदमे में सत्र परीक्षण के दौरान सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए थे, मगर अभियोजन के सवालों में उलझने के कारण न्यायालय ने आरोपी को सजा सुनाई है। वहीं सास को बरी किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार मैनपुरी के बिछवा क्षेत्र के गांव धारापुर के रामौतार ने 12 अप्रैल 2020 को लोधा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार उसने अपनी बेटी कविता की शादी 8 नवंबर 2019 को लोधा के गांव दुनाई के धर्मेंद्र संग की थी। शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। घटना की सुबह धर्मेंद्र ने अपनी ससुराल यह फोन किया कि कविता को सांप ने काट लिया है। इस सूचना पर जब मायके पक्ष के लोग यहां आए तो कविता के पास पहले से मौजूद छोटी बेटी ने बताया कि कविता को ससुरालियों ने मारपीट कर फांसी लगाकर मारा है। मामले में पति के अलावा सास, देवर, ननद आदि को नामजद कर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना में पुलिस ने पति व सास के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। वे अपने बयान व तहरीर पर नहीं टिके। मगर डीजीसी फौजदारी के सवाल जवाबों पर जब वे उलझे तो गवाहों को पक्षद्रोही होना माना गया। इस आधार पर न्यायालय ने पति को दस साल कैद व जुर्माना तय किया है। सास को बरी किया गया है।
दहेज उत्पीड़न में तीन साल की सजा
अलीगढ़। एसीजेएम-7 नरेश कुमार दिवाकर के न्यायालय से दहेज उत्पीड़न के आरोपियों को तीन साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एडीए सासनी गेट की सरिता देवी ने सिविल लाइंस बदायूं के सोमप्रकाश, विष्णुदत्त, रानी के खिलाफ 29 अक्तूबर 2013 को दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में आरोपियों को तीन साल कैद व 20-20 हजार रुपया जुर्माने से दंडित किया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार मैनपुरी के बिछवा क्षेत्र के गांव धारापुर के रामौतार ने 12 अप्रैल 2020 को लोधा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार उसने अपनी बेटी कविता की शादी 8 नवंबर 2019 को लोधा के गांव दुनाई के धर्मेंद्र संग की थी। शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। घटना की सुबह धर्मेंद्र ने अपनी ससुराल यह फोन किया कि कविता को सांप ने काट लिया है। इस सूचना पर जब मायके पक्ष के लोग यहां आए तो कविता के पास पहले से मौजूद छोटी बेटी ने बताया कि कविता को ससुरालियों ने मारपीट कर फांसी लगाकर मारा है। मामले में पति के अलावा सास, देवर, ननद आदि को नामजद कर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना में पुलिस ने पति व सास के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। वे अपने बयान व तहरीर पर नहीं टिके। मगर डीजीसी फौजदारी के सवाल जवाबों पर जब वे उलझे तो गवाहों को पक्षद्रोही होना माना गया। इस आधार पर न्यायालय ने पति को दस साल कैद व जुर्माना तय किया है। सास को बरी किया गया है।
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दहेज उत्पीड़न में तीन साल की सजा
अलीगढ़। एसीजेएम-7 नरेश कुमार दिवाकर के न्यायालय से दहेज उत्पीड़न के आरोपियों को तीन साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एडीए सासनी गेट की सरिता देवी ने सिविल लाइंस बदायूं के सोमप्रकाश, विष्णुदत्त, रानी के खिलाफ 29 अक्तूबर 2013 को दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में आरोपियों को तीन साल कैद व 20-20 हजार रुपया जुर्माने से दंडित किया गया है।
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